Needle Free Corona की नई वैक्सीन, अब बिना चुभे ही लग जाएगा कोरोना का टीका, देखें कोरोना के खिलाफ कैसे करती है काम!

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Needle Free Corona Vaccine

भारत में रहने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। इसी महीने कोरोना की एक ऐसी वैक्सीन आ रही है जिसमें सुई लगाने की जरूरत नहीं होती। इस वैक्सीन के तीन डोज दिए जाते हैं। यह पहली वैक्सीन है जो डीएनए तकनीकि पर बनी है। सबसे खास बात यह कि इस वैक्सीन को सुरक्षित रखने लिए कोल्ड चैन मेंटेन करने की जरूरत नहीं होती है। वैक्सीन रूम टेंपरेचर पर रखी जा सकती है। मतलब यह कि कोरोना वैक्सीन की कोल्ड चैन मेंटेन करने के लिए जो भारी-भरकम खर्चा करना पड़ता था। वो खत्म हो जाएगा। इस वैक्सीन को जायडस-कैडिला ने बनाया है और डीजीसीआई से इसकी मार्केटिंग और उपयोग की मांगी गई है।

नैशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑफ इम्यूनाइजेशन (NTAGI) के चेयरपर्सन डॉक्टर एन के अरोड़ा ने बताया कि यह पहली डीएनए वैक्सीन है। यह इस महीने के अंतिम हफ्ते या अगस्त के हपले हफ्ते तक लॉन्च हो सकती है। इसमें वायरस के जेनेटिक कोड के छोटे से हिस्से को लेकर शरीर को कोरोना के खिलाफ लड़ना सिखाती है। डॉक्टर अरोड़ा ने कहा कि हमारे शरीर का कोड आरएनए और डीएनए में होता है और इसमें वैक्सीन डालते हैं तो यह शरीर के अंदर जाकर करके वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाता है।

भारत में अभी लगाई जा रही तीनों वैक्सीन डबल डोज वाली है। लेकिन जायकोव-डी वैक्सीन इन सभी से अलग है। यह तीन डोज की है। पहला जीरो दिन, दूसरा 28दिन और तीसरा 56दिन पर दी जाएगी। यह एक निडिल फ्री वैक्सीन है। यह वैक्सीन जेट इंजेक्टर से दी जा सकेगी। जेट इंजेक्टर का इस्तेमाल यूएस में सबसे ज्यादा होता है। इससे वैक्सीन को हाई प्रेशर से स्किन में इंजेक्ट किया जाता है। आमतौर पर जो निडिल इंजेक्शन यूज होते हैं, उससे फ्लूड या दवा मसल्स में जाती है। जेट इंजेक्टर में प्रेशर के लिए कंप्रेस्ड गैस या स्प्रिंग का इस्तेमाल होता है। इससे फायदा है कि वैक्सीन लेने वालों को दर्द कम होगा। क्योंकि यह आम इंजेक्शन की तरह आपके मसल के अंदर नहीं जाती। इस वैक्सीन का ट्रायल 12से 18साल के बच्चों पर भी हुआ है।

वायरस के खिलाफ शरीर में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इसमें जेनेटिक मटेरियल का इस्तेमाल किया गया है। जैसे अमेरिका में फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए mRNA तकनीक का इस्तेमाल किया है। उसी तरह भारत में इस वैक्सीन के जेनेटिक मटेरियल में प्लाज्मिड-डीएनए का इस्तेमाल किया गया है। mRNA तकनीक को मैसेंजर RNA भी कहा जाता है, जो शरीर में जाकर कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने का मैसेज देती है। वहीं, प्लाज्मिड इंसानी कोशिकाओं में मौजूद एक छोटा डीएनए मॉलिक्यूल होता है।