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300 साल पहले भी लोगों ने किया था कोरोना जैसी महमारी का सामना, 280 साल में हुआ पूरी तरह खात्मा

photo courtesy Google

कोरोना ने दुनियाभर में हाहाकार मचाया हुआ है। ये वायरस करोड़ों लोगों की जान जा चुका है। इससे लड़ने के लिए दुनियाभर में टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, ताकि इस महामारी को हराया जा सके। आपको बता दें कि ऐसी ही महामारी का सामना लोगों ने करीब 300 साल पहले किया था। इसका खुलासा तब हुआ जब बोस्टन के लाइब्रेरी एंड आर्काइव्स ने एक मंत्री की डायरी समेत नए डिजीटल रिकॉर्ड्स को ऑनलाइन पोस्ट किया। इन पोस्ट्स के जरिए पता चला है कि 1700 के दशक में आए चेचक के विनाशकारी प्रकोप ने हजारों लोगों की जिंगदी खत्म कर दी थी।

इन रिकॉर्ड के मुताबिक, 17वीं शताब्दी में अमेरिका के तटों से दूर के इलाकों में भयानक महामारी फैली थी। अब तीन सदियों बाद कोरोना वायरस का प्रकोप देखने पर एक्सपर्ट्स इसकी समानता 3 सदी पहले फैली महामारी से देखकर हैरान है। इसको लेकर सीएलए के पुरातात्विक लेखपाल जाचारी बोदनार ने कहा- हम कितने कम बदले हैं। इंटरव्यू में बोदनार ने कहा- 'तथ्य ये है कि हम अपने अतीत के रिकॉर्ड में इन समानताओं को ढूंढ रहे है, कभी-कभी जितना हम सीखते हैं, उतना ही हमें और सीखने की जरूरत होती है।'

बोदनार ने आगे कहा कि मुझे ऐसा लगता है। जिस वक्त चेचक जैसी महामारी का दुनिया से सफाया किया गया था उस वक्त तक ये महामारी दुनिया भर में लाखों लोगों की मौत का कारण बन चुकी थी। रोग नियंत्रण और रोकथाम के लिए काम करने वाले यू.एस. केंद्र का कहना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में चेचक का अंतिम प्राकृतिक प्रकोप 1949 में आया था। 1980 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन की फैसले लेने वाली शाखा ने इसे समाप्त करने की घोषणा की और तब से चेचक के कोई मामले सामने नहीं आए है।

इस तरह से चेचक को खत्म होने पूरे 280 साल का समय लगा था। 1600 के दशक में यूरोप से आए चेचक महामारी के प्रकोप से मूल तौर पर ​​बड़ी संख्या में अमेरिकियों की मौत हुई थी। उस सदी के आखिर तक दुनिया में चेचक महामारी के खिलाफ कोई टीका नहीं था। एक अमेरिकी डॉक्टर ने 1897 में चेचक के खिलाफ 4 वर्षीय बच्चे को पहला टीका लगाया था।