5 August: कश्मीर तब और अब! ना-पाकियों के सीने पर लोट रहा सांप, भारत में विलय को बिलबिला रहे POK और गिलगिट बालटिस्तान

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5 August: कश्मीर तब और अब

5 अगस्त 2019 का दिन भारत के संवैधानिक इतिहास में एक विशेष दिन है। इस दिन के बाद कश्मीरियों का जीवन बदल गया है। आतंकियों का अंत शुरू हो गया। पाकिस्तान की साजिशों पर अंकुश लग गया। लद्दाख के लोगों को नया जीवन नई पहचान मिल गई। विकास की धारा शेष भारत के साथ कश्मीर और लद्दाख में भी बहने लगी। पाकिस्तान ने कश्मीर को लेकर दुनियार में झूठ फैलाने की साजिश की। पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र संघ में निर्धारित 15 के भाषण की जगह 50 मिनट तक बकवास की आग उगली, साथ ही दुनिया को परमाणु जंग की धमकी भी दी। पाकिस्तान लौटते समय सऊदी अरब ने पाकिस्तानी पीएम इमरान खान से अपना जहाज वापस मांग लिया। इमरान खान को कनाडा के आसमान से वापस अमेरिका आकर सऊदी अरब का जहाज खाली करना पड़ा और फिर वहां से प्राइवेट एयर लाइन से पाकिस्तान की ओर उड़ान भरी। पाकिस्तान के साथ मलेशिया और तुर्की ने भी भारत के खिलाफ विष वमन किया। इस्लामिक सहयोग संगठन ने कश्मीर पर पाकिस्तान की मांगों को ठुकराया और भारत का साथ दिया। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने कश्मीर में निवेश के बड़े ऐलान किए। भारत के बड़े नामी-गिरामी उद्योग घरानों ने भी जम्मू-कश्मीर के विकास में योगदान का संकल्प किया और योजनाओं का ऐलान किया।

कश्मीर में स्कूल-कॉलेज खोले जाने लगे। हिंदुओं के मंदिरों का पुनरुद्धार और जीर्णोद्धार होने लगा। घाटी के मंदिरों में घंटिया बजने लगीं, यज्ञ-हवन पूजा शुरू होने लगी। घाटी में जहां केवल बारुद की गंध आती थी वहां से समिधा की खुशबू फिजाओं में तैरने लगी। कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की आंशिक तौर पर ही सही लेकिन घर वापसी शुरू होने लगी। सरकारी दफ्तरों में कश्मीरी पंडितों की हाजिरी लगने लगी। हाट-मार्केट-बाजारों में कश्मीरी पंडितों की आमद-रफ्त बढने लगी। कश्मीर में सैलानियों का आना शुरू हो गया। डल झील पहले की तरह अपनी खूबसूरती पर इठलाने लगी। शिकारे वालों ने अपने पुराने शिकारों की मरम्मत करवाई तो कुछ ने नए शिकारे बन वाए। श्रीनगर से इंटरनेशनल हवाई सेवाओं की शुरुआत हुई। प्राइवेट इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेज यूनिवर्सिटीज खोली जा रही हैं। फूड पार्क खोले जा रहे हैं। नई फैकट्रियों और कारखानों की नींव पड़ चुकी है। कश्मीर-लद्दाख अलग राज्य बनने के बाद से स्थानीय प्रतिभाएं नेशनल और इंटर नेशल लेवल पर निकल कर सामने आ रही हैं। कहने का मतलब कश्मीर में जिंदगी पटरी पर लौटने लगी।

5 अगस्त लद्दाखियों के लिए तो आजादी से भी बड़ा दिन था। लद्दाखियों को पहली बार दिल्ली से सीधे जुड़ने का मौका मिला। लद्दाख को अपना पहला प्रशासक लेफ्टिनेंट जनरल मिला। लद्दाख में चारों ओर तिरंगा ही तिरंगा लहरा रहा था। लद्दाखियों ने महीनों तक ऐसा जश्न मनाया जैसे कि लोसर मनाया जा रहा हो। बौद्ध बहुल्य लद्दाख के स्थानीय निवासियों का आत्म विश्वास लौटा है। बौद्ध संस्कृति पर हो रहे हमलों को जवाब दिया जाने लगा है। बौद्ध सीधे तौर पर किसी पर हमला नहीं करते लेकिन अब अगर कोई उनकी संस्कृति पर हमला करने की कोशिश करता है तो उसे करारा जवाब मिलता है। लद्दाख के लोग अब देश के पहले कार्बन मुक्त प्रदेश के सपने के साकार करने की की मुहिम में जुटे हैं। विकास योजनाओं को इसी अनुसार गति दी जा रही है। लद्दाख में इलेक्ट्रॉनिक और हाइड्रोजन वहान दिखाई देने लगे हैं। लेह में 1.25 मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन जेनरेशन पायलट प्रोजेक्ट बन रहा है। ग्रीन पॉवर प्रोजेक्ट के लिए कई समझौते हुए हैं। लद्दाखियों को आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना से लोगों को मालिकाना अधिकार और संपत्ति अधिका कार्ड दिए गए हैं।

लद्दाख का इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 4 हवाई अड्डे और 37 हेलिपेड बनाए जा रहे हैं। लद्दाख मे सैलानियों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी होने से स्थानीय लोगों के जीवनस्तर में सुधार आने लहा है।  आधारभूत ढांचे को मजबूत बना पर्यटन को भी गति देने की तैयारी है।

लद्दाख के दुर्गम लेकिन खूबसूरत इलाकों में हेलिकॉप्टर सेवाओं से सैलानियों को सुविधा होने लगी है। लद्दाख में इस समय 100 के करीब छोटे बड़े पुलों के निर्माण के बाद 55 नए पुलों पर कार्य जोरशोर से जारी है। अब सड़कें, टनल बनाने, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। 5 अगस्त 2019 के बाद लद्दाख के कायाकल्प के सपने साकार होने लगे हैं।

5 अगस्त 2019 से लेकर आज 5 अगस्त 2022 तक का सफर इतना आसान नहीं रहा है, जितना देखने में लगता है। पाकिस्तानी साजिशों और षडयंत्रों को नेस्तनाबूद करना पड़ा है। हमारे सुरक्षाबल 24 घण्टे जाग-जाग कर पहरेदारी कर रहे हैं। अलगाववादियों पर काबू पाना आसान नहीं था। टेरर फण्डिंग के मामले अब भी सामने आ रहे हैं। यासीन मलिक जैसे कुख्यात आतंकवादी समर्थक अलगाववादियों को न्याय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। तो वहीं अब बिटक्वाइन के मार्फत पाकिस्तान से टेरर फण्ड के मामले सामने आ रहे हैं। लगभग 120 आम नागरिकों को अपनी जान देकर इस शांति की कीमत चुकानी पड़ी है। इनमें लगभग स्थानीय कश्मीरी और बाकी बाहरी नागरिक शामिल हैं।

कश्मीर में जब से ‘भाड़े का गन-तंत्र’छोड़भारत के ‘गणतंत्र’में भरोसा दिखाना शुरू किया तो एक बार फिर पाकिस्तान बिलबिलाया और उसने पाकिस्तानी आतंकियों की घाटी में घुसपैठ करानी शुरू कर दी। इस दौरान लगभग 50 बड़े पाकिस्तानी आतंकी सरगना सुरक्षाबलों की गोलियों का शिकार बने। मगर 170 के आस-पास सुरक्षाबलों को भी शहादत देनी पड़ी है लेकिन लगभग साढे पांच सौ से ज्यादा आतंकियों का सफाया भी कर दिया है।

कश्मीरी फिजाओं में बह रही केसरिया महक एलओसी पार कर मीरपुर-मुजफ्फर पुर तक जाती है तो वहां के लोग भी भारत में मिल जाने को तड़प उठते हैं। गुलाम कश्मीर हो या गिलगिट बालटिस्तान वहां के अधिकांश लोग भारत में मिल जाने को आतुर हैं। तमाम ऐसे प्रदर्शन हुए हैं जब भारत का तिरंगा लेकर लोगों  पाकिस्तानी कब्जे के खिलाफ सड़को पर उतरे हैं।

5 अगस्त 2019 को भारतीय संसद में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में गृहमंत्री अमित शाह ने इस संकल्प को दोहराया है कि इस पार का हो या इस पार का सारा कश्मीर और गिलगिट बालटिस्तान भारत का अभिन्न हिस्सा है। अक्साई चिन भारत का हिस्सा है। भारत सरकार इस हिस्से को वापस लेकर रहेगी। चाहे जान क्यों न लड़ानी पड़ जाए।