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BJP को कर्नाटक चुनाव में मोदी मंत्र के दम पर 113 सीटें पार करने का भरोसा

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए रोड शो करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

राजशेखर एस  

बेंगलुरु: कर्नाटक भाजपा के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राज्य भर में लगातार रैलियों और रोड शो से उत्साहित हैं। उन्हें इस बात का भरोसा है कि पार्टी 224 सीटों वाली विधानसभा में साधारण बहुमत हासिल करने के लिए 113 सीटों के जादुई आंकड़े को पार कर लेगी।

10 मई को होने वाले मतदान के लिए सार्वजनिक प्रचार सोमवार को समाप्त हो गया। पिछले तीन दिनों के अपने अभियान के अंतिम चरण के दौरान मोदी ने पार्टी के मनोबल को ऊंचा कर दिया और पार्टी के उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार कर दिया।

“ई बरिया निर्धारा; भाजपा बहुमतादा सरकार” (‘इस बार का निर्णय भाजपा की बहुमत वाली सरकार का है’) नारे के साथ  प्रधानमंत्री ने कहा कि कर्नाटक का निर्णय पहले से ही लोगों द्वारा कर लिया गया है। लोगों ने “अपना स्नेह और आशीर्वाद देते हुए मुझे फूलों की बारिश से नहला दिया है।”

मोदी द्वारा दिया गया यह नारा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कर्नाटक में भाजपा को कभी भी पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं मिल पायी है।

हालांकि, पार्टी ने कर्नाटक में दो बार सरकार बनायी है, लेकिन वह 113 सीटों की जादुई संख्या हासिल करने से चूकती रही है।

पिछले 10 दिनों में राज्य में सात दिनों के दौरे सहित प्रधानमंत्री ने विधानसभा चुनाव के लिए 25 से अधिक रैलियों और रोड शो को संबोधित किया।

नाम न छापने की शर्त पर कर्नाटक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि कर्नाटक में प्रधानमंत्री के दौरे शुरू होने से पहले पार्टी की संभावनायें बहुत धूमिल थीं। उस नेता ने कहा, “हम दूसरे नंबर पर थे। अब हम कांग्रेस से आगे हैं।”

इसी तरह की भावना को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा भी बल देते हैं।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रोड शो और रैलियों ने पार्टी को अतिरिक्त 15 सीटें जीतने में मदद की है।

 

 लिंगायत नेता के रूप में देखे जा रहे मोदी  

पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा अब भी निर्विवाद लिंगायत नेता हैं। चुनावी राजनीति छोड़ने के उनके फ़ैसले ने कांग्रेस को कर्नाटक की इस प्रमुख जाति को वापस जीतने का एक बड़ा अवसर दे दिया था।

कांग्रेस में अलग-अलग गुटों के विपरीत दिशाओं में खिंचने के कारण पार्टी ने लिंगायत चेहरे को पेश करने का अवसर खो दिया। वास्तव में कांग्रेस नेताओं ने लिंगायतों को रिझाने का कोई प्रयास ही नहीं किया। इसके बजाय, पार्टी ने लिंगायतों के आने और उसके दरवाज़े पर दस्तक देने का इंतज़ार किया।

दूसरी ओर, लिंगायत नेताओं के एक वर्ग ने मोदी को लिंगायत नेता के रूप में देखना शुरू कर दिया है। इस संवाददाता को लिंगायत बहुल कित्तुरु कर्नाटक में मिली एक सामान्य प्रतिक्रिया कुछ इस तरह थी, “हमारे लिए मोदी ही नेता हैं। हम उन्हें ही वोट देंगे।” । इससे न केवल भाजपा की संभावनाओं में सुधार हुआ है, बल्कि लिंगायतों के कांग्रेस की ओर पलायन को रोकने में भी सफलता मिली है।

कर्नाटक में यह दूसरी बार है, जब लिंगायतों ने जाति से बाहर के किसी व्यक्ति को अपना नेता माना है। स्वर्गीय रामकृष्ण हेगड़े पहले ऐसे नेता थे।

 

 बैकफ़ुट पर कांग्रेस

प्रधानमंत्री के लगातार हुए कर्नाटक दौरे ने कांग्रेस पार्टी को बैकफ़ुट पर ला दिया है। टिकट वितरण के अंतिम दौर के बाद, विशेष रूप से कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र में बढ़ी हुई आंतरिक कलह के अलावा, यह बड़ी पुरानी पार्टी मोदी के प्रभाव को कम करने में असमर्थ रही है।

दूसरी ओर, आक्रामक भाजपा चुनाव की तारीख़ों की घोषणा से पहले ही ज़मीन पर कब्ज़ा करने में कामयाब रही।

प्रारंभ में ऐसा प्रतीत हो रहा था कि कांग्रेस को कित्तूर कर्नाटक के लिंगायत बहुल क्षेत्र में भाजपा पर बढ़त हासिल थी। मगर,जैसे ही पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नाम जारी कर दिए, तो स्थिति बदल गयी और पार्टी विभाजित हो गयी। प्रधानमंत्री ने भाजपा के पक्ष में तराजू को झुकाने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में काम किया।

 

शेट्टार-सावदी फ़ैक्टर

पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार और पूर्व उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी को बीजेपी के नेताओं को साथ लेकर सहानुभूति हासिल करने की कांग्रेस की योजना भी कोई प्रभाव हासिल कर पाने में विफल रही।

इस पत्रकार के साथ बातचीत के दौरान धारवाड़, हावेरी, गदग, बेलगावी और हावेरी के कित्तूर कर्नाटक ज़िलों के अधिकांश लिंगायतों ने पूर्व मुख्यमंत्री पर ग़ुस्सा व्यक्त किया और उनसे पूछा कि उन्होंने विधायक के टिकट पाने के लिए विचारधारा का बलिदान क्यों कर दिया।

लिंगायतों की सहानुभूति तो दूर, शेट्टार अब जीत के लिए कांग्रेस पर निर्भर हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, नड्डा और अन्य सहित भाजपा के शीर्ष नेताओं की हुबली यात्रा के बाद कांग्रेस शेट्टार को जिताने के लिए अपने संसाधन बढ़ा रही है, जबकि मोदी ने ख़ुद पड़ोसी हावेरी में एक रैली को संबोधित किया।

चुनाव प्रचार अभियान का अंतिम दिन सोमवार को समाप्त हो गया, कांग्रेस अपनी शीर्ष नेता बीमार सोनिया गांधी को शेट्टार के प्रचार के लिए हुबली ले आयी।

 

कांग्रेस का सेल्फ़ गोल

इस बीच चुनाव प्रचार के आख़िरी चरण में कांग्रेस द्वारा किए गए कई आत्मघाती गोलों ने बीजेपी को फ़ायदा पहुंचाया है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की यह टिप्पणी भी शामिल है कि लिंगायत मुख्यमंत्री भ्रष्ट हैं, प्रधानमंत्री या पार्टी के घोषणापत्र में बजरंग दल पर उस प्रतिबंधित पॉपुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया की तुलना करके झूठे नैरेटिव का प्रयास करते हैं, जिसके आतंकवादी सम्बन्ध हैं।