राष्ट्रीय

बढ़ेगी Indian Navy की ताक़त! इस अचूक हथियार से सुनने के क़ाबिल नहीं रहेंगे दुशमन सैनिक

भारत के पास दुनिया की 7वीं सबसे पावरफुल नौसेना (Indian Navy) है। 300 एयरक्राफ्ट, 150 जंगी जहाज और सबमरीन, 4 फ्लीट टैंकर्स, 24 कॉर्वेट्स और 15 अटैक सबमरीन और भी काफी शक्तिशाली हथियारों और युद्धपोतों से लैस इंडियन नेवी के आगे दुनिया के कई देशों की नौसेनाएं नहीं टिकती है। इंडियन नेवी की इन्हीं ताकतों से तो दुश्मन देश थर-थर कांपते हैं। इंडियन नेवी के फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो तैयार हो रहा है, जो अभी ट्रायल स्टेज में है। एक साल में इसका ट्रायल पूरा हो जाएगा जिसके बाद नेवी के सभी एयरक्राफ्ट में इसे लगाया जाएगा। इससे एयरक्राफ्ट से नेवी के शिप या सबमरीन के बीच होने वाला कम्युनिकेशन ज्यादा सुरक्षित तो होगा ही साथ ही डेटा शेयर भी तेजी से होगा। कम्युनिकेशन का यह सिस्टम ज्यादा आसान होगा, ज्यादा तेज होगा और ज्यादा सुरक्षित भी।

रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाला संगठन वेपन एंड इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स इंजीनियरिंग स्टेब्लिशमेंट (WESEE) इस पर काम कर रहा है। WESEE नेवी की जरूरत पूरी करने के लिए वह सभी सिस्टम डिवेलप करता है जो इंडस्ट्री नहीं कर पाती या जो क्षमता अभी इंडस्ट्री में नहीं है। इस स्वायत्त संगठन को नेवी फंड करती है और इसमें नेवी अधिकारियों के साथ डीआरडीओ के साइंटिस्ट हैं।

तीनों सशस्त्र सेनाओं  यानी आर्मी, नेवी (Indian Navy), एयरफोर्स में नेवी ही कम्युनिकेशन के लिए स्वदेशी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो का इस्तेमाल कर रही है। इसे WESEE ने नेवी के लिए डिजाइन किए हैं। ऑपरेशनल जरूरतों के लिए नेवी के सभी एसेस्ट्स को एक दूसरे से कम्युनिकेट करना होता है। यह बातचीत वॉइस कॉल, वॉइस मैसेज, डेटा किसी के भी जरिए हो सकती है। जैसे एयरक्राफ्ट को शिप से और सबमरीन से या शिप को शिप से, शिप को सबमरीन से कम्युनिकेट करना होता है। सेटेलाइट कम्युनिकेशन के अलावा रेडियो से भी कम्युनिकेशन होता है। WESEE के डिवेलप किए हुए सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर) को नेवी के शिप में लगाया जा रहा है और पुराने सिस्टम को रिप्लेस किया जा रहा है।

रोमियो में भी स्वदेशी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो

अमेरिका से लिए जा रहे MH60R रोमियो हेलिकॉप्टर में भी स्वदेशी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो फिट किया जा रहा है। यह एडीआर-एफ का पुराना वर्जन है। इसे एयर बॉर्ड रेडियो कहते हैं। इसे अमेरिका को भेजा गया है और यह अमेरिका से रोमियो हेलिकॉप्टर में फिट होकर ही आएंगे। इंडियन नेवी के लिए अमेरिका से 24 रोमियो हेलिकॉप्टर लेने की डील की गई है। रोमियो हेलीकॉप्टर से इंडियन नेवी अपने पुराने पड़ चुके सी-किंग हेलीकॉप्टरों को रिटायर करेगी। रोमियो हेलीकॉप्टर मल्टी रोल हेलीकॉप्टर है।

यह भी पढ़ें: दक्षिण पूर्व एशिया में Indian Navy की बढ़ती मौजूदगी

इस हेलिकॉप्टर से किसी जहाज पर हमला किया जा सकता है, राहत और बचाव का काम किया जा सकता है, सबमरीन को ढूंढ कर उसे तबाह किया जा सकता है। साथ ही समंदर में निगरानी रखी जा सकती है। इसके जरिए हवा से सतह पर मार करने वाली हेलफ़ायर मिसाइलें भी दागी जा सकती हैं। अमेरिकी नेवी में भी रोमियो हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल सबमरीन हंटर के तौर पर किया जाता है। इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल हर तरह जंगी जहाज जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर, डिस्ट्रायर या फ्रिगेट से किया जा सकता है।

आईएन ब्यूरो

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