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बिहार चुनाव-2020 : गया में भाजपा के अभेद्य दुर्ग सेंध लगाने की कोशिश में कांग्रेस

गया को अभेद्य दुर्ग बना चुकी भाजपा को हराने के लिए विपक्षी महागठबंधन पुरजोर कोशिश में लगा है।

आईएएनएस अपडेटेड October 17, 2020 17:27 IST
Congress trying to dent BJP's impregnable fort in Gaya
गया में भाजपा के अभेद्य दुर्ग सेंध लगाने की कोशिश में कांग्रेस (फोटो-आईएएनएस)

देश-दुनिया में ‘मोक्ष नगरी’ के रूप में प्रसिद्ध बिहार के गया में प्रतिवर्ष पितृपक्ष के मौके पर लाखों लोग अपने पुरखों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान के लिए यहां पहुंचते हैं। आज बिहार विधानसभा चुनाव में गया विधानसभा क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस क्षेत्र को अभेद्य दुर्ग बना चुकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने के लिए विपक्षी महागठबंधन पुरजोर कोशिश में लगा है।

राजग ने एकबार फिर यहां से 7 बार चुनाव जीत चुके भाजपा के नेता प्रेम कुमार को चुनावी मैदान में उतार दिया है, वहीं महागठबंधन ने यहां से कांग्रेस के नेता अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव को चुनाव मैदान में उतारा है। इस चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी मोहन श्रीवास्तव भाजपा के विजय रथ को रोकने की पूरी कोशिश में है। पिछले चुनाव में प्रेम कुमार ने कांग्रेस के प्रियरंजन डिंपल को हराया था। उस चुनाव में प्रेम कुमार को 66,891 मत मिले थे, जबकि डिंपल को 44,102 मत से संतोष करना पड़ा था।

वर्ष 2010 में सीपीआई के जलालुद्दीन अंसारी मैदान में थे और उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा था। 30 साल से लगातार यानी 1990 से प्रेम कुमार गया से जीतते रहे हैं। गया शहर विधानसभा सीट से 1990 से लगातार 7 बार जीत दर्ज करने वाले प्रेम कुमार इस समय राज्य में कृषि मंत्री हैं। गया में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 2.65 लाख है।

नालंदा कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर और गया के रहने वाले डॉ. चंद्रगुप्त कहते हैं कि यहां गांवों में रहने वाली बड़ी जनसंख्या शहर में आकर बसी है। उन्होंने कहा कि यहां व्यवसायियों की संख्या अच्छी खासी है। उन्होंने कहा कि यहां खास बात है कि जातिगत आधार पर मतदान नहीं के बराबर होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान विधायक प्रेम कुमार का कुछ क्षेत्रों में विरोध जरूर है, लेकिन महागठबंधन के प्रत्याशी को उन्हें पराजित कर पाना एक चुनौती है।

इधर, गया के वरिष्ठ पत्रकार विमलेंद्र प्रियदर्शी कहते हैं कि गया में नए लोग बसते गए, नए मुहल्लों का उदय हुआ, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ीं। प्रियदर्शी कहते हैं, “गया शहर में विधायक के प्रति लोगों में थोड़ी नाराजगी है। लोगों की शिकायत है कि चुनाव जीत जाने के बाद विधायक क्षेत्र में कभी भी लोगों की खोज-खबर लेने नहीं आते हैं। लेकिन उनके पक्ष में यह भी है कि वे सरल व्यक्तित्व के हैं और 30 साल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के बाद भी उन पर किसी तरह का आरोप नहीं लगा है।”

गया से राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (रालोसपा) ने श्रीधर प्रसाद को जबकि जन अधिकार पार्टी ने राजीव कुमार को टिकट दिया है। गया क्षेत्र इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के लिए कितना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भाजपा के प्रमुख जेपी नड्डा ने अपनी बिहार में चुनावी रैली की शुरूआत गया से की थी। बहरहाल, गया में मुकाबला रोचक है और मुख्य मुकाबला दोनों प्रमुख गठबंधनों के बीच माना जा रहा है।

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