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शौर्यचक्र विजेता की विधवा का आरोप, ‘रेफरेंडम 2020’ से जुड़ी है मेरे पति की हत्या

शौर्यचक्र पुरस्कार विजेता बलविंदर सिंह संधू की हत्या के अगले दिन शनिवार को उनकी विधवा ने कहा कि उनके पति की हत्या उन लोगों से जुड़ी है, जो ‘रेफरेंडम 2020’ की वकालत कर रहे थे।

आईएएनएस अपडेटेड October 17, 2020 19:00 IST
Shauryachakra Award winner Balwinder Singh Sandhu murdered
शौर्यचक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू की विधवा का आरोप, 'रेफरेंडम 2020' से जुड़ी है मेरे पति की हत्या

1980 के दशक में सिख उग्रवादियों से लड़ने वाले शौर्यचक्र पुरस्कार विजेता बलविंदर सिंह संधू की हत्या के अगले दिन शनिवार को उनकी विधवा ने उग्रवादियों को पति की मौत का जिम्मेदार ठहराया। पंजाब के तरनतारन जिले में दो हमलावरों ने शुक्रवार को बलविंदर की गोली मारकर हत्या कर दी।

बलविंदर की पत्नी ने कहा कि उनके पति की हत्या उन लोगों से जुड़ी है, जो ‘रेफरेंडम 2020’ की वकालत कर रहे थे। संधू की पत्नी जगदीश कौर ने मीडिया से कहा, “यह खालिस्तानी आतंकवादियों की करतूत है, क्योंकि मेरे परिवार की किसी से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी।”

उन्होंने आगे कहा, “उनकी हत्या पंजाब में ‘रेफरेंडम 2020 की शुरुआत का पहला स्टेप है।”

विश्व स्तर पर प्रचारित ‘रेफरेंडम 2020’ प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) द्वारा पंजाब को एक ‘राष्ट्र’ के रूप में ‘मुक्त’ करने के लिए खालिस्तान समर्थक एक आंदोलन है।

सरकार द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा वापस लेने के करीब एक साल बाद संधू को दो अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी। उनका अंतिम संस्कार मूल निवास स्थान पर किया गया। जगदीश कौर ने कहा, “हमने परिवार के एक सदस्य को खो दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम आतंकवादियों से डरते हैं। हम अभी भी उनसे लड़ने के लिए काफी मजबूत हैं।”

कम्युनिस्ट विचारधारा वाले और साल 1993 के शौर्यचक्र पुरस्कार विजेता बलविंदर सिंह को सुबह 7 बजे के करीब उनके गृहनगर भिखीविंड में तरनतारन शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर पॉइंट जीरो से गोली मारी गई। तरनतारन 80 और 90 के दशक में उग्रवाद का अड्डा हुआ करता था। संधू को पांच गोलियां मारी गई थीं। उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

रिवॉल्यूशनरी मार्क्‍सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (आरएमपीआई) के जिला समिति सदस्य बलविंदर अपनी बहादुरी के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुके थे और उन पर नेशनल ज्योग्राफिक डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है। उनकी पत्नी जगदीश कौर आरएमपीआई की जिला समिति सदस्य हैं, जिसका नेतृत्व मंगत राम पासला कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने फिरोजपुर के डीआईजी की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया है, ताकि हमले की सही जांच की जा सके।

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