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BECA पर भारत-अमेरिका के दस्तखत के साथ ही चीन की चीखेंं निकलनीं शुरू

BECA पर भारत-अमेरिका के दस्तखत के साथ ही चीन की चीखेंं निकलनीं शुरू

इधर भारत और अमेरिका ने बीईसीए (बेसिक एक्सचेंज एंड को-ऑपरेशन एग्रीमेंट BECA ) पर दस्तखत किए हैं और चीन की चीखें निकलनी शुरू हो गई हैं। चीन ने कहा है कि अमेरिका पड़ोसियों से हमारे संबंधों को खराब करने पर तुला हुआ है। अमेरिकी हमारे पड़ोसी देशों के साथ कलह पैदा कर रहा है।दरअसल,  BECA पर भारत और अमेरिका के साइन करने के बाद जहां जंग के मैदान में चीन को शिकस्त देना और आसान हो गया है तो वहीं पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक निशाना लगाना आसान हो गया है।
<h3><span style="color: #ff0000;">चीन के विदेश मंत्रालय ने माइक पोम्पियो को दी बंदर घुड़की</span></h3>
चीन ने मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ को बंदर घुड़की भी दी है कि वो इस इलाके में हमारे पड़ोसियों के बीच कलह के बीज न बोएं। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग ने मीडिया के सवाल के जवाब में कहा कि पोम्पियो का चीन को निशाना बनाना और आरोप लगाना कोई बात नहीं है।
<h3><span style="color: #ff0000;">सेटेलाइट डेटा भारत को मिलने की आशंका से चीन के हाथ-पांव फूले</span></h3>
दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच नए समझौतों से चीन घबरा गया है। चीन को लगने लगा है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था अब पहले से भी मजबूत हो गई है। बीईसीए के प्रावधानों के मुताबिक अमेरिका से उच्चस्तरीय मिलिटरी टेक्नोलॉजी भारत को मिलनी शुरू हो जाएगी। इसके अलावा सेटेलाइट डेटा के अलावा अतिसंवेदनशील सूचनाओं को अमेरिका और भारत एक दूसरे के साथ साझा कर सकेंगे। मिलिटरी टेक्नोलॉजी और सेटेलाइट डेटा शेयरिंग से चीन कांप रहा है। ध्यान रहे, अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा सेटेलाइट अमेरिका के हैं। अमेरिका के जासूसी सेटेलाइट चीन की सभी सैनिक-असैनिक गतिविधियों की टोह लेते रहते हैं। अभी तक भारत और अमेरिका के बीच सीधा कोई समझौता न होने के कारण सेटेलाइट डेटा साझा करने में समस्याएं आती थीं।
<h3><span style="color: #ff0000;">पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर होगा और भी सटीक हमला</span></h3>
डेटा शेयरिंग दोनों तरफ से होगी लेकिन बीईसीए से भारत को फायदा ज्‍यादा है। उसे मिलिट्री ग्रेड डेटा का एक्‍सेस मिलेगा जिसकी मदद से टारगेट को सटीकता के साथ लोकेट किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, मिलिट्री ग्रेड कोऑर्डिनेट्स से मिसाइलों या हवा में लॉन्‍च किए जाने वाले बमों को किसी आतंकी ठिकाने पर टारगेट किया जा सकता है, वह भी एकदम सटीक। इस एग्रीमेंट से मिलने वाला डेटा बड़े काम का होगा। लॉन्‍च-रेंज नेविगेशन और मिसाइल टारगेटिंग की एक्‍युरेसी बढ़ जाएगी। अभी के हालात देखते हुए, यह डेटा भारत की पश्चिमी और उत्‍तरी सीमा पर काम आ सकता है।

बीईसीए के बाद सभी अंतर्राष्ट्रीय बाधाएं खत्म हो गई हैं। अब चीन की मिलिट्री गतिविधियां भारतीय एजेंसियों के सामने होंगी। जंग के हालात में चीन की गतिविधियां पहले ही मिल जाने से भारतीय सेना पीएलए को पलक झपकते ही धूल में मिला सकती है।.