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यूपी में अपराध बढ़ रहे या स्लीपर क्रिमिनल सेल फुल मोड में एक्टिव?

स्लीपर क्रिमिनल सेल का फुल मोड में एक्टिव हो जाना प्रदेश की जनता के लिए गहरे दुख का कारण बनता जा रहा है।

राकेश सिंह अपडेटेड October 17, 2020 18:32 IST
Balia Murder, Hathras Case, SDM, Dy SP Suspend
बलियाः हत्याकाण्ड से पहले, कोटा आवंटन पर दावेदारों से बात करते अफसर

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाइयों से सहमे अपराधी अब फिर अपने कारनामें शुरू कर चुके हैं। इन स्लीपर क्रिमिनल सेल का फुल मोड में एक्टिव हो जाना प्रदेश की जनता के लिए गहरे दुख का कारण बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर लगातार सवाल उठाने वाली घटनाएं अचानक नहीं हो रही हैं, इनके पीछे कहीं न कहीं गहरी राजनीतिक साजिश छिपी हुई है।

उत्तर प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने हैं, उन्होंने कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कई तरह के उपाय किए। इसमें महिलाओं को सरेराह छेड़खानी से बचाने के लिए रोमियो स्क्वाड बनाने से लेकर अपराधियों पर नकेल के लिए ताबड़तोड़ एनकाउंटर जैसे उपाय शामिल थे। कुछ समय तक तो लगा कि योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनसे योगी सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठने शुरू हुए हैं।

इसकी शुरुआत कानपुर के बिकरू हत्याकांड से हुई। जहां पर एक अपराधी विकास दुबे को गिरफ्तार करने के लिए पहुंचे पुलिस दल पर ही हमला कर दिया गया और 8 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बाद इस घटना को लेकर राजनीति शुरू हो गई। विकास दुबे की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद उत्तर प्रदेश के लोगों ने राहत की सांस ली ही थी कि कई जगहों पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों की घटनाओं में बहुत तेज वृद्धि देखने को मिली। विकास दुबे कांड को मुद्दा बनाने में विफल विपक्षी दलों ने इसको लेकर मुद्दा बनाने की कोशिश की।

मीडिया के सहयोग से विपक्ष ने हाथरस जैसी घटना को एक सनसनीखेज वारदात में बदलने की कोशिश की। इस मामले में अपनी टीआरपी को उछालने की कोशिश में टीवी चैनलों ने अपनी सारी सीमाएं लांघ दीं। विपक्ष के राजकुमार और राजकुमारी भी नौटंकी करने में कहीं पीछे नहीं रहे। जैसे-जैसे हाथरस मामले की सच्चाई सामने आने लगी तो मीडिया और विपक्षी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और प्रियंका की जोड़ी अब चुप हो गई है।

लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के सामने आई चुनौतियों में ये घटनाएं अभी कुछ भी नहीं हैं। कुछ दिनों से लव जिहाद से जुड़ी घटनाओं की भी झड़ी सी लग गई। इसके विरोध में विहिप जैसे कुछ संगठन कानून बनाने की मांग भी कर रहे हैं। विहिप ने ऐसी घटनाओं की एक लंबी सूची जारी की है और सरकार से कठोर कानून बनाने की मांग की है। लखनऊ में विधानसभा भवन के सामने लव जिहाद की शिकार एक महिला ने आत्महत्या कर ली। सरकार की जांच में सामने आया कि विपक्षी पार्टी कांग्रेस के शासन काल में राजस्थान के राज्यपाल रहे स्व. सुखदेव प्रसाद के पुत्र और कांग्रेस नेता आलोक प्रसाद ने महिला को विधान सभा भवन के सामने आत्मदाह करने के लिये उकसाया था। पुलिस इस मामले में कुछ और नेताओं की भूमिका की भी जांच कर रही है।

उत्तर प्रदेश में पिछले 20 सालों में सबसे ज्यादा सत्ता में रही समाजवादी पार्टी योगी सरकार को घेरने का कोई भी मौका चूक नहीं रही है। जबकि जानकारों की मानें तो समाजवादी पार्टी के नेताओं की असामाजिक तत्वों के साथ मेलजोल और सहानुभूति किसी से छुपी नहीं है। जब उत्तर प्रदेश सरकार का नेतृत्व अखिलेश यादव के हाथों में आया तो उन्होंने अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे तमाम असामाजिक तत्वों से अपने दूरी साबित करने की कोशिश की। अखिलेश ने खुद की एक पाक-साफ नेता की छवि बनाने के लिए बहुत ज्यादा सतर्कता भी बरती।

जबकि समाजवादी पार्टी के कई नेता मानते हैं अगर राजनीति में और खासकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में मजबूती से टिका रहना है तो मीडिया और आईटी सेल जैसे संगठनों के साथ-साथ अपनी क्रिमिनल सेल की भी अनदेखी करना ठीक नहीं है। विपक्ष इनका भी मौके और समय के हिसाब से सुनियोजित ढंग से उपयोग करके सरकार के सामने समस्याएं खड़ी करता है क्योंकि बाद में इन्हीं समस्याओं पर विपक्ष की राजनीति खड़ी हो सकती है।

बलिया जिले में राशन कोटा के आवंटन में मारपीट और गोलीबारी की घटना हुई। इसमें एक पक्ष से एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दूसरे पक्ष से करीब आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हुए। जो खबरें सामने आ रही हैं उनके अनुसार मुख्य आरोपी के एक गंभीर रूप से घायल रिश्तेदार की बीएचयू अस्पताल में मौत हो चुकी है। उसके भाई की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्थानीय विधायक इसे परिवार के सदस्यों और आत्मरक्षा के लिये लाइसेंसी असलहे से की गई फायरिंग बता रहे हैं। मुख्य आरोपी की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए वह थाने पर भी गये हैं।

जबकि मीडिया ने तत्काल इस तरह से खबर को पेश किया कि योगीराज में दबंगों ने एक गरीब व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी। जबकि वास्तविकता अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। इस पूरे मामले में कहीं न कहीं प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध है। क्योंकि एसडीएम, सीओ, बीडीओ और थानाध्यक्ष ने भारी लापरवाही का परिचय दिया। पंचायत भवन से दूर एक पक्ष के घरों के पास खेत में तंबू लगाकर बैठक का आयोजन किया गया। जब मामला गंभीर हो गया और दोनों ओर से पथराव होने लगा तो अधिकारी मौके से भाग निकले। पहले से तैयारी कर के आए हुए हमलावरों ने हत्या के मुख्य आरोपी के परिवार के लोगों को बुरी तरह पीटा।

भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने जो बयान दिया है उसको भी मीडिया ने गलत तरीके से पेश किया है। सुरेंद्र सिंह अपनी बेबाकी और खरेपन के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने साफ कहा है कि लाइसेंसी हथियार से फायरिंग करना कोई अपराध नहीं है। सरकार लाइसेंस आत्मरक्षा के लिए ही देती है।

इससे भी बड़ी बात यह है कि 19 अगस्त को हुई मारपीट की एक घटना में बलिया के पूर्व सांसद और राज्य सरकार के मंत्री रह चुके भरत सिंह और उनके परिवार के लोगों पर भी मुकदमा दायर किया गया है। भरत सिंह का कहना है कि उनके परिवार के साथ भी मारपीट की गई, जिसमें उनके भाई के नाती को गंभीर चोट आई थी। अब अगर भरत सिंह जैसे लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं तो साफ है कि यह मामला केवल कानून व्यवस्था का नहीं है।

हाथरस का मामला पूरी तरह उल्टा मोड़ ले चुका है और बलिया का मामला भी आने वाले दिनों में उसी तरह साबित होगा। कहीं न कहीं इन सबके पीछे राजनीतिक पार्टियों से जुड़े अपराधियों के स्लीपर सेल जिम्मेदार हैं, जो ठीक राष्ट्र विरोधी स्लीपर सेल की तरह ही काम करते हैं। ये अपराधिक सेल गांव-देहात में साधारण दिनों में अपने रोजी-रोटी में लगे रहते हैं। लेकिन इनकी संपन्नता का राज राजनीतिक दलों की चाकरी होता है। जैसे ही इनको एक्टिव होने का संदेश मिलता है, यह उसकी कीमत वसूलते हैं और अपने अपराधिक कृत्यों को अंजाम देने में लग जाते हैं।

अपराधियों के स्लीपर सेल इसके लिए बकायदा एक रणनीति बनाते हैं और मौजूदा सरकार की सबसे कमजोर नस पर वार करना इनका इरादा होता है। उत्तर प्रदेश में जातिगत विद्वेष सामाजिक समरसता में एक बड़ी बाधा है और पूरी राजनीति कहीं न कहीं जातिगत समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। इसलिए कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसे विपक्षी दलों का मुख्य उद्देश्य समाज में फैली जातिगत विषमता को आधार बनाकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना है।

उत्तर प्रदेश की हाल की घटनाओं से समस्या कितनी बड़ी हो सकती है इसके बारे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर सामाजिक विषमता को खत्म नहीं किया गया और संविधान के अनुरूप आचरण करना हमारा लक्ष्य नहीं बना तो इससे देश की स्वतंत्रता ही खतरे में पड़ सकती है। उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल अपनी जहरीली समाज विरोधी मानसिकता का प्रयोग पूरी आक्रामकता से करने पर आमादा हैं। ऐसे तत्वों पर रोक लगाने के लिए सरकार को कठोर कदम उठाना ही होगा।

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