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पाकिस्तान आर्मी की मुश्किल, करप्शन के ये दाग कैसे धोंए?

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार, पाकिस्तानी आर्मी पर भ्रष्टाचार और धांधली के आरोप सबूतों के साथ खुल कर सामने आ रहे हैं।  मीडिया पर पांबदी के बावजूद, इंटरनेट, सोशल मीडिया, पूरी दुनिया में इसी के चर्चे  हैं और पाकिस्तान की जनता में आर्मी के खिलाफ असंतोष की चिंगारी फूटने लगी है।

मृत्युंजय कुमार झा अपडेटेड September 29, 2020 15:19 IST

वही हुआ जिसकी आशंका थी। सोमवार को लाहौर हाईकोर्ट ने अचानक पाकिस्तानी नेशनल एसेंबली में विपक्ष और पीएमएल के नेता शहबाज की जमानत रद्द कर दी और भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार करवा दिया। पिछले दिनों, शहबाज शरीफ, उनकी पत्नी और दो बेटोंपर 42 मिलियन डॉलर की रकम के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केस दर्ज किया गया था । पंजाब सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ , पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के छोटे भाई हैं और उनकी गैरहाजिरी में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। सोमवार के ही दिन इस्लामाबाद की एक अदालत ने  पूर्व राष्ट्रपति और पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ जरदारी को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिया । एक ही दिन पाकिस्तान की दो सबसे बड़ी पार्टियों के दो बड़े नेताओं के खिलाफ अदालतें हरकत में आ गईं और यह एक महज संयोग नहीं था। इसकी आशंका, पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों के साथ वहां की जनता को भी थी। शहबाज की भतीजी और नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज शरीफ ने एक ट्वीट में कहा, ( आपको पता होना चाहिए कि मेरे चाचा  शहबाज शरीफ को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि उन्होंने , उन लोगों की बात मानने से इंकार कर दिया, जो उन्हें अपने भाई(नवाज शरीफ) के खिलाफत करने को कह रहे थे। शहबाज जेल जाना पसंद करेंगे लेकिन अपने भाई के खिलाफ नहीं)

गौरतलब है कि नवाज शरीफ को पहले ही भ्रष्टाचार के मामले में सजा दी गई है और आजकल उन्हें भगोड़ा करार दिया गया है।

दरअसल बड़े बाजवा यानि पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा की नींद उड़ी हुई है। पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार, पाकिस्तानी आर्मी पर भ्रष्टाचार और धांधली के आरोप सबूतों के साथ खुल कर सामने आ रहे हैं।  मीडिया पर पांबदी के बावजूद, इंटरनेट, सोशल मीडिया, पूरी दुनिया में इसी के चर्चे  हैं और पाकिस्तान की जनता में आर्मी के खिलाफ असंतोष की चिंगारी फूटने लगी है। इस चिंगारी को और हवा दे दी पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने। 20 सितंबर के भाषण में उन्होंने सीधा निशाना साधा था पाकिस्तानी आर्मी के पर। शरीफ ने पाकिस्‍तानी सेना और उसकी कठपुतली  प्रधानमंत्री इमरान खान पर जमकर हमला बोला। शरीफ ने एक तरफ जहां बेहद ताकतवर फौज की आलोचना की, वहीं यह भी कहा कि विपक्ष इमरान खान के खिलाफ नहीं है, बल्कि उनके खिलाफ है जो ‘अक्षम’ व्यक्ति को सत्ता में लेकर आए हैं, (‘हमारा संघर्ष इमरान खान के खिलाफ नहीं है। आज, हमारा संघर्ष उन लोगों के खिलाफ है, जिहोंने इमरान खान को बैठाया है और जिन्होंने उन जैसे अक्षम व्यक्ति को लाने के लिए (2018) के चुनाव में धांधली की और मुल्क को तबाह किया।’)

यह मौका था जब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, पाकिस्तान मुसलिम लीग (नवाज) और जमिअत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) , पाकिस्तान की तीन बड़ी पार्टियां ऑल पार्टी कॉन्फ्रेंस में एक साथ मिलकर आईं और इमरान खान की सरकार के खिलाफ जंग छेड़ने का ऐलान कर दिया। लंदन से वीडियो लिंक के जरिए, नवाज शरीफ ने कहा कि उनकी पार्टी इमरान खान और उसके आका (आर्मी) के खिलाफ इस संगठन के साथ है।  जमियत नेता फजलुर रहमान,  पाकिस्तान की सबसे बड़ी धार्मिक पार्टी और सुन्नी कट्टरपंथी दल के चीफ हैं । उन्होंने इमरान खान के खिलाफ 27 अक्टूबर से देशव्यापी आजादी मार्च  निकालने का आह्वान कर दिया है।

आर्मी , अब इमरान खान को कोस रही है जिन्होंने नवाज शरीफ समेत दूसरे नेताओं के भाषणों को लाईव प्रसारण की इजाजत दी थी।  इमरान खान के बडबोले रेलमंत्री शेख राशिद के मुताबिक, इस कार्यक्रम से पहले, आर्मी चीफ बाजवा और आईएसआई चीफ ने विपक्षी पार्टियों के नेताओं को दो बार रावलपिंडी स्थित आर्मी हेडक्वार्डर (GHQ) में बुला कर आगाह कर दिया था कि सरकार की आलोचना करें लेकिन आर्मी, चीन-पाकिस्तान-आर्थिक गलियारे यानि सीपेक (CPEC) का कोई जिक्र ना हो। लेकिन नवाज शरीफ ने नाम लेकर इमरान खान के विशेष सलाहकार और सीपेक के चेयरमैन  छोटे बाजवा यानि ले जनरल आसिम सलीम बाजवा के चर्चित धांधलियों का जिक्र करते हुए आर्मी चीफ और न्यायपालिका को आड़े हाथों लिया और पाकिस्तान की जनता ने इसे बड़े गौर से सुना। लाईव प्रसारण रोकने की कोशिश की गई लेकिन तीर कमान से निकल कर निशाने पर लग चुका था। पाकिस्तानी विशेषज्ञों के मुताबिक , (आर्मी समझ चुकी है कि इमरान खान से कुछ नहीं होने वाला। इसके पहले जनता में आर्मी के खिलाफ शक और बढ़े, विपक्षी दलों पर अंकुश लगाना जरुरी है और अब वो हरकत में है)

जानकारों के मुताबिक, आर्मी चीफ ने शहबाज शरीफ, आसिफ जरदारी और फजलुर रहमान से आजादी मार्च कैंसिल करने को कहा लेकिन सबने मना कर दिया। शहबाज शरीफ ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से इसे सफल बनाने की अपील की । दो साल से ठंढी पड़ी पाकिस्तान की राजनीति गरमा रही है। शहबाज शरीफ की गिरफ्तारी के बाद, नवाज शरीफ की पार्टी की कमान उनकी बेटी मरियम नवाज शरीफ के हाथों में है। बिलावल भुट्टो जरदारी पीपुल्स पार्टी के चेयमैन है। गौरतलब है कि दोनों पार्टियों के नेता , एक दूसरे के घोर विरोधी रहे हैं लेकिन ऐसे समय में इन दोनों का साथ आना, इमरान खान के लिए खतरे की घंटी है।

स्तंभकार, सईदा यास्मीन अली के मुताबिक (दोनों पाकिस्तान की पॉलिटिक्स में फ्रेश चेहरे हैं और दो बड़े राजनीतिक घरानों के heir हैं.. पाकिस्तान की जनता दोनों को चाहती है..भले ही आप इसे डायनेस्टिक रुल्स कहें लेकिन पाकिस्तान में शुरु से यही रहा है । हां दोनों विरोधी रहे हैं लेकिन एक साथ आ जाएं तो किसी दूसरे का चांस नहीं।)

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की चिंता यही है। मरियम नवाज शरीफ और उनके पति के खिलाफ मनी लाउंड्रिंग के मुकदमे तो उनकी सरकार चला रही है लेकिन बिलावल के खिलाफ कुछ भी नहीं है। उस पर सुन्नी धार्मिक नेता फजलुर रहमान के साथ मिलकर आजादी मार्च का ऐलान,  इमरान खान को जरुर 2014 की याद दिला रहा होगा जब उन्होंने नवाज शरीफ के खिलाफ 126 दिनों का मार्च निकाला था और 4 साल बाद प्रधानमंत्री बने थे। हांलाकि सार्वजनिक तौर पर इमरान कहते हैं कि (धरने का एक्सपर्ट तो मैं हूं ..अपोजिशन अगर प्रोटेस्ट करेंगे तो सख्ती से निपटा जाएगा ।) लेकिन यह भी सच है कि  इमरान खान , फजलुर रहमान से मुलाकात करके अपनी तरफ मिलाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं जिससे कि उनके खिलाफ 27 अक्टूबर से शुरु होने वाली जंग ना होने पाए।

पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल बाजवा को इमरान खान की चिंता नहीं है बल्कि आर्मी के छवि पर लगे दाग से परेशानी है। अगर ये दाग, इमरान खान के हटाने से हट जाते तो यह कब का हो जाता लेकिन उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि यह दाग कैसे धुलेंगे।।

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