अंतर्राष्ट्रीय

Saudi Arabia से सीखे Iran, अब बिना पुरुष साथी के हज या उमराह पर जा सकेंगी महिलाएं

New Rules For Women In Hajj: एक सऊदी अरब (Saudi Arabia) है जो महिलाओं के हित को लेकर नए-नए फैसले ले रहा है और एक बाकी के कई कट्टरपंथी इस्लामिक देश हैं जहां से औरतों की आजादी छिनी जा रही है। फिलहाल ईरान में तो हिजाब को लेकर बवाल मचा हुआ है। यहां पर जो औरतें चर्चा में आ रही हैं पुलिस उन्हें मौत के घाट उतारते जा रही है। ईरान हिजाब कंट्रोवर्सी की आग इस वक्त पूरी दुनिया में लगी हुई है। इस बीच सऊदी अरब एक बार फिर से महिलाओं के हित में फैसला लेते हुए साबित कर दिया है कि, वो इन कट्टरपंथी इस्लामिक देशों जैसा नहीं है। सऊदी अरब ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अब अब महिलाओं को ‘मेहरम’ या पुरुष साथी के बिना हज या उमराह (New Rules For Women In Hajj) करने की अनुमति दे दी है। सऊदी राजधानी रियाद ने सोमवार को इसकी घोषणा की और कहा कि यह दुनियाभर की श्रद्धालुओं पर लागू होगा। अब तक महिलाओं और बच्चों को ‘मेहरम’ के साथ ही हज (New Rules For Women In Hajj) पर जाने की अनुमति दी जाती थी। मेहरम वह पुरुष साथी होता है जो पूरे हज के दौरान महिला के साथ रहता है।

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बिना पुरुष के हज और उमराह कर सकती हैं महिलाएं
बता दें कि, सऊदी अरब लंबे समय से महिलाओं के अधिकारों को लेकर अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि बदलने की कोशिश कर रहा है। महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस और वोट देने का अधिकार मिले बहुत समय नहीं बीता है कि अब अब खाड़ी देश ने ये ऐतिहासिक फैसला लिया है। कुछ मामलों में 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को बिना मेहरम भी हज की अनुमति दी जा चुकी है। लेकिन सभी महिलाओं के लिए यह फैसला वाकई ऐतिहासिक है। सऊदी अरब के हज और उमराह मंत्री तौफीक अल रबिया ने कहा, ‘एक महिला अब बिना मेहरम के उमराह करने के लिए मुल्क में आ सकती है।’ इस आदेश ने सऊदी अरब की दशकों पुरानी प्रथा को खत्म कर दिया है। हालांकि तीर्थयात्रा में शामिल होने वाले महिलाओं के बड़े समूह के साथ हज या उमराह करने वाली महिलाओं को इसकी अनुमति पहले भी दी जा चुकी है।

क्या होता है हज और उमराह
साल में एक बार होने वाली हज यात्रा को इस्लाम का पांचवां स्तंभ माना जाता है। कहते हैं कि, हर मुस्लिम को अपने जीवन में कम से कम एक बार हज जरूर करना चाहिए जबकि उमराह साल में कभी भी किया जा सकता है। सऊदी मौलवियों का कहना है कि हज या उमराह के दौरान महिलाओं के साथ एक मेहरम का होना जरूरी है। वहीं दूसरे मुस्लिम स्कॉलर इस पर अलग राय रखते हैं।

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सऊदी अरब में बदल रही महिलाओं की तकदीर
वैसे सऊदी अरब महिलाओं की स्थिति में बदलाव को लेकर ये जो फैसला लिया है वो अंतरराष्ट्रीय निवशकों और पर्यटकों को लुभाने के लिए कर रहा है। 1955 में यहां लड़कियों के लिए पहले स्कूल खुला और 1970 में लड़कियों के लिए पहली यूनिवर्सिटी जाने का मौका। वहीं, 2001 में पहली बार महिलाओं को पहचान पत्र दिया गया। साल 2005 में जबरन शादी जैसी कुप्रथा को खत्म किया गया। इसके साथ ही महिलाओँ को वोट देने का 2015 में अधिकार मिला और 2018 के आते-आते सऊदी अरब में महिलाओं को पहली बार ड्राइविंग लाइसेंस दिया गया। यानी सऊदी अरब की सड़कों पर महिलाएं भी फर्राटा भर सकती है।

आईएन ब्यूरो

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