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CPEC: पाकिस्तान के गले की फांस बना खूनी इकोनॉमिक कॉरिडोर

पिछले 24 घंटों में पाकिस्तान में दो बड़े हमले चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पर हुए हैं। एक हमले में 6 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई और दूसरे हमले में 15 लोग मारे गए। जानकारों की मानें तो सीपीईसी, चीन और पाकिस्तान के गले की फांस बनता जा रहा है।

मृत्युंजय कुमार झा अपडेटेड October 16, 2020 18:47 IST
CPEC: Pakistan's bloody economic corridor becomes a noose
पाकिस्तान के गले का फंदा बना खूनी इकोनॉमिक कॉरिडोर

पिछले 24 घंटों में पाकिस्तान में दो बड़े हमले हुए हैं। पहला हमला वजीरिस्तान में हुआ और दूसरा हमला बलूचिस्तान के ग्वादर जिले में ओरवारा के चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के हाइवे पर। दोनों ही इलाके चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के अहम हिस्से हैं। उत्तरी वजीरिस्‍तान में हुए हमले में कम से कम 6 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई और बलूचिस्‍तान के ओरमारा में पाकिस्तान की सबसे बड़ी तेल कंपनी ‘ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड’ (OGDCL) के काफिले पर हुए हमले में 15 लोग मारे गए। जानकारों की मानें तो सीपीईसी, चीन और पाकिस्तान के गले की फांस बनता जा रहा है।

पाकिस्तानी सेना के मुताबिक ये हमला उस समय हुआ जब पाकिस्तानी सेना की सुरक्षा गाड़ियों में तेल कंपनी के कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा था। इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान के विद्रोही संगठन ‘बलोच राजी अजोई सिंगर’ (Baloch Raji Ajoi Singer-BRAS) ने ली है और इस हमले की योजना में बलूचिस्तान के 7 विद्रोही संगठन BLA, BRA, BLF, BRG, and SRA शामिल थे।

बलोच राजी अजोई सिंगर (BRAS) के बयान में कहा गया है, “हमने ओजीडीसीएल के काफिले पर हमला किया जो ग्वादर से कराची जा रहे थे। इनकी सुरक्षा पाकिस्तानी फौज की फ्रंटियर कंपनी कर रही थी। हमारे हमले में 15 लोग मारे गए।” यह हमला ओरमारा के पास कोस्टल हाईवे पर बुजी टॉप के पास किया गया। BRAS के बयान में कहा गया है कि “हमारी कई चेतावनियों के बावजूद OGDCL , चीन के साथ मिलकर बलूचिस्तान के पसनी, ग्वादर, खारन, लासबेला और ओच इलाके में तेल और गैस के कई प्रोजेक्ट्स चला रहा है। हमने बार-बार कहा है कि बलूचिस्तान के सारे प्राकृतिक संसाधनों पर सिर्फ बलूच लोगों का हक है। हम पाकिस्तान को हमारी संपदा चीन के हाथों बेचने नहीं देंगे।”

BRAS के प्रवक्ता बलोच खान ने कहा है कि “हम चीन और दूसरे इंटरनेशनल कंपनियों को अगाह करते हैं कि हम बलोच अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। चीन, पाकिस्तानी फौज के साथ मिलकर हमें खत्म करने की कोशिश कर रहा है लेकिन वो कामयाब नहीं होंगे। हम मुंहतोड़ जबाव देते रहेंगे। चीन की भलाई इसी में है कि वो बलूचिस्तान से बाहर हो जाए।” प्रवक्ता बलोच खान के बयान में आगे कहा गया है कि “बलूचिस्तान के लोग चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के सभी समझौतों को खारिज करते हैं। हम सारे संगठन मिलकर बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई आखिरी दम तक जारी रखेंगे।”

बलूच विद्रोहियों का यह पहला हमला नहीं था। इसके पहले फरवरी में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) मार्ग पर एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 9 लोग मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ने वाले तीन संगठनों बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA), बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) और बलूच रिपब्लिकन गार्ड (BRG) ने ली थी। मार्च में सीपीईसी में से जुड़े चीनी इंजीनियरों को ले जा रहे 22 वाहनों के काफिले पर कराची में हमला किया गया। इसमें भी चीनी कर्मचारियों सहित कई लोग घायल हुए थे। जून में कराची के स्टॉक एक्सचेंज पर हुए हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी की माजिद ब्रिग्रेड ने ली थी।

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक क़ॉरिडोर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी योजना ‘वन बेल्ट वन रोड’ ( One Belt One Road-OBOR) के तहत बनाया जा रहा है। जिसमें 40 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। पहले चरण में चीन के काशगर शहर को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के बीच जोड़ने वाला करीब 2000 किलोमीटर लंबा हाइवे लगभग बन चुका है। सीपीईसी के ज्यादातर प्रोजेक्ट्स पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान में चल रहे हैं। बलूचिस्तान पाकिस्तान का 40 फीसद भाग है और प्राकृतिक संपदा से भरपूर है। लेकिन यह भी सच है कि यह पाकिस्तान का सबसे पिछड़ा क्षेत्र है।

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बलूचिस्तान के लोग सीपीईसी के पूरी तरह खिलाफ हैं। उनका आरोप है चीन के साथ मिलकर बलूचिस्तान की प्राकृतिक संपदा को लूटा जा रहा है। बलूच नेताओं का आरोप है कि बलूचिस्तान की सूई कंपनी की गैस आज पूरे पाकिस्तान के घरों में इस्तेमाल हो रही है, लेकिन बलूचिस्तान के लोगों को एक साजिश के तहत यह नहीं मिल पा रहा है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री का कहना है कि “यह गैस बलूचिस्तान के इलाक़े सुई में स्थित गैस भंडारों से हासिल की जाती है लेकिन हमारे लोगों को नहीं मिलती।” यही नहीं इस पाकिस्तानी कंपनी में भी अब चीन की कंपनियों को भागीदारी दे दी गई है। जब बलूचिस्तान के लोगों ने इसका विरोध किया तो पाकिस्तानी फौज ने उसे कुचलने के लिए कई अभियान चलाए। मानवाधिकार हनन की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों में 45 हजार बलूच लापता हैं। उनका कुछ पता नहीं।

बलूचिस्तान के नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और दूसरे संगठनों का दरवाजा खटखटाया है। बलूच नेशनल मूवमेंट के नेता नसीम बलूच के मुताबिक, “सीपीईसी (CPEC) बलूच लोगों के खून से और बलूच लोगों की लाशों पर बनाई जा रही है। जब पाकिस्तान दिवालिया होने की कगार पर था, तब सीपीईसी के 60 अरब अमेरिकी डॉलर ने अर्थव्यवस्था के लिए ऑक्सीजन के रूप में काम किया।”

बलूच राष्ट्रीय आंदोलन के एक नेता हकीम बलूच का कहना है कि बलूच लोग खुश नहीं हैं और सीपीईसी के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, ” सीपीईसी वहां लंबे समय से है और लोग इसके बारे में अपनी आवाज और चिंताओं को उठाते रहे हैं। सिर्फ सीपीईसी ही समस्या नहीं है, वन बेल्ट वन रोड भी बड़ी समस्या है जिसे दुनिया को समझना चाहिए।”

लेकिन पाकिस्तानी हुकूमत के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। सीपीईसी का विरोध करने वालों पर जुल्म जारी है। पिछले दो सालों में हजारों लोग लापता हो गए हैं या फिर पाकिस्तानी जेलों में बंद हैं। जून में इमरान खान की सरकार में शामिल बलूचिस्तान नेशनल पार्टी के नेता और मंत्री सरदार अख्तर मेंगल ने बलूचिस्तान में पाकिस्तानी आर्मी की कार्रवाइयों के विरोध में इस्तीफा दे दिया था।

एक रिपोर्ट के मुताबिक 62 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाली इस परियोजना की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तानी आर्मी के चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने एक स्पेशल फोर्स का गठन किया है, जिसमें 13700 स्पेशल कमांडो शामिल हैं।

सीपीईसी (CPEC) को पाकिस्तान सरकार के प्रोपगेंडा में गेम चेंजर कहा जा रहा है। पाकिस्तानी जानकारों के मुताबिक बलूचिस्तान इस प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा है लेकिन वहां के लोगों को इसका कोई फायदा नहीं हो रहा। चीन के इतने बड़े निवेश के बाद बलूचिस्तान के लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार आदि की उम्मीद जगी थी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। चीनी प्रोजेक्ट्स में मैन पॉवर से लेकर मटीरियल और मशीनरी तक सब चीन के ही इस्तेमाल हो रहे हैं। प्रोजेक्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट भी चीनी ठेकेदारों को ही दिए जा रहे हैं। इसके अलावा बलूचिस्तान के लोग गलियारे के लिए जमीनों के अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर भी खासे नाराज हैं। साथ ही यहां सीपीईसी से जुड़ी परियोजनाओं में पारदर्शिता का अभाव और भ्रष्टाचार होने के आरोप भी लग रहे हैं।

दो साल पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बलूचियों की आवाज को दुनिया सामने रखा और पाकिस्तान द्वारा वहां किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघन की जानकारी पूरी दुनिया को दी। उसके बाद भारत हर मंच पर बलूचिस्तान के मसले को उठाता रहा है। पाकिस्तान बलूचिस्तान में हो रहे विद्रोह के लिए भारत को दोष देता रहा है लेकिन इससे कोई हल नहीं निकलने वाला। पाकिस्तान अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। पिछले दिनों पाकिस्तान की इमरान सरकार ने कराची के पास दो द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। जिसका विरोध सिंध की राज्य सरकार के साथ-साथ वहां के अलग सिंध राज्य की मांग करने वाले संगठन जोर-शोर से कर रहे हैं। बलूचिस्तान और सिंध के विद्रोही संगठनों ने मिलकर सीपीईसी के खिलाफ लड़ाई छेड़ने का ऐलान कर दिया है।

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