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इमरान खान : खुद मियां फजीहत, दूसरों को नसीहत

दूसरों को नसीहत देने के मौके तलाशने वाले प्रधानमंत्री इमरान खान को नेशनल असेंबली से भाषण दिए बगैर अपनी फजीहत करवा कर वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

राकेश सिंह अपडेटेड October 17, 2020 15:40 IST
In Pakistan's National Assembly on Friday, the opposition protested in an uproar.
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में शुक्रवार को विपक्ष ने हंगामेदार विरोध किया।

पाकिस्तान नेशनल असेंबली में विपक्ष ने शुक्रवार को इमरान खान को भाषण दिए बिना बैरंग वापस लौट जाने के लिये मजबूर कर दिया। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में शुक्रवार को विपक्ष ने पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) की गुजरांवाला रैली के दौरान ही नेशनल असेंबली की बैठक बुलाने पर सवाल खड़े करते हुए हंगामेदार विरोध किया। दूसरों को नसीहत देने के मौके तलाशने वाले प्रधानमंत्री इमरान खान भाषण दिए बगैर अपनी फजीहत करवा कर वापस लौटने के लिए मजबूर हुए।

इससे पहले अपनी ही पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI)  की संसदीय समिति की बैठक में भी इमरान खान को खाने-पीने की जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों और उनकी हो रही किल्लत को लेकर और अपने सलाहकारों की भूमिका को लेकर कठोर सवालों का सामना करना पड़ा था। जबकि नेशनल असेंबली में उपस्थित रहे विपक्षी दलों के संसद सदस्य तब तक नारेबाजी और हंगामा जारी रखे, जब तक कि नेशनल असेंबली के स्पीकर असद कैसर ने  नेशनल असेंबली की कार्यवाही को सोमवार तक स्थगित नहीं कर दिया। विपक्षी दलों के सांसद हाथों में तख्तियां लिए हुए थे और प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। नेशनल असेंबली के स्पीकर की उनसे सदन में व्यवस्था बनाए रखने की बार-बार की अपीलों का भी कोई असर नहीं हुआ।

जैसे ही इमरान खान अन्य अपनी पार्टी के सदस्यों और मंत्रियों के साथ नेशनल असेंबली में आए विपक्षी सांसदों ने जमकर नारेबाजी की। नेशनल असेंबली के इस सत्र को उस समय बुलाया गया था जब पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट की गुजरांवाला रैली हो रही थी। जहां बड़ी विपक्षी पार्टियों के नेता और समर्थक सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए जमा हुए थे।

नेशनल असेंबली के सत्र की शुरुआत उत्तरी वजीरिस्तान और ग्वादर में हमलों में मारे गए 13 सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के साथ शुरू हुई। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई विपक्षी दलों के सांसदों ने मेजें पीटना शुरू कर दिया और प्रधानमंत्री को अपना भाषण दिए बगैर सदन से बाहर जाने के लिए मजबूर कर दिया। सदन में स्थिति को सामान्य होने की अपील कर रहे स्पीकर ने सत्र को पहले 40 मिनट के लिए स्थगित कर दिया, लेकिन उसके बाद भी विपक्ष के विरोध में कोई कमी नहीं होते देख सदन की कार्रवाई को स्थगित कर दिया।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सांसद नवीद कमर ने स्पीकर से पूछा कि जब सत्र का आयोजन 19 अक्टूबर को होना तय था तो फिर इसे शुक्रवार को ही क्यों बुला लिया गया। उन्होंने सवाल किया कि जब विपक्षी दल गुजरांवाला में अपनी पहली रैली के लिए इकट्ठा हो रहे हैं तो फिर ऐसे समय में शुक्रवार को सदन का सत्र बुलाने की क्या जरूरत पड़ी? कमर ने कहा कि सरकार इस तरह से सत्र आयोजित करके विपक्ष की भूमिका को कमतर साबित करना चाह रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष नेशनल असेंबली में जनता की समस्याओं को उठाना चाहता है लेकिन सरकार ने उसे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संसद की पिछली संयुक्त बैठक के दौरान स्पीकर ने विपक्षी नेता शाहबाज शरीफ और पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी को बोलने की अनुमति नहीं दी, जबकि इस दौरान सदन से कई बिल पारित किए गये। उन्होंने नेशनल असेंबली के स्पीकर असद कैसर से आग्रह किया कि वे विपक्ष को किनारे लगा कर नेशनल असेंबली को अप्रासंगिक न बनाएं। उन्होंने कहा कि देश में सरकारों के खिलाफ 1947 से ही प्रदर्शन और आंदोलन होते रहे हैं और यह भविष्य में भी जारी रहेंगे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संसद को बिना विपक्ष के चलाया जाए।

इससे पहले संसदीय दल की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री इमरान खान को पीटीआई और सरकार में शामिल सहयोगी सासंदों के  कठोर सवालों का सामना करना पड़ा। एक पीटीआई नेता ने बताया कि प्रधानमंत्री से उपभोक्ता वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और उनकी कमी पर रोक लगाने के लिए कहा गया। उनके सलाहकारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। जहां तक गुजरांवाला की विपक्ष की रैली का सवाल है, प्रधानमंत्री ने कहा कि उनको विपक्ष के आंदोलन और जनसभाओं से कोई दिक्कत नहीं है।

इमरान ने कहा कि उन्होंने खाद्य सुरक्षा मंत्री फख़र इमाम और उद्योग मंत्री हम्माद अजहर को गेहूं और चीनी की कीमतों के संकट से निपटने के लिए कहा है। इमरान खान ने बैठक के दौरान कहा कि वह नेशनल असेंबली के मंच पर एक भाषण देंगे जिसमें महंगाई पर नियंत्रण के लिए सरकार की भूमिका से लोगों को होने वाले लाभ की जानकारी होगी। प्रधानमंत्री खान ने यह भी कहा कि वह गैस और बिजली के बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखने के बारे में कुछ सदस्यों की चिंताओं के बारे में भी कदम उठाएंगे।

फिर इसके बाद तत्काल पलटी मारते हुए इमरान खान ने कहा कि पीटीआई की सरकार देश में मौजूदा समस्याओं के लिए जिम्मेदार नहीं है। क्योंकि यह सब पिछली सरकारों की गलतियों का नतीजा है। जिन लोगों ने इससे पहले राज किया है, उन लोगों ने देश को इस तबाही के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

इमरान ने कहा कि विपक्ष को महत्व देने की कोई जरूरत नहीं है। वह तो चाहते हैं कि विपक्ष हर रोज रैली करे, जिससे कि वह जनता के सामने रोज उसका कच्चा-चिट्ठा खोलें। महंगाई के बारे बैठक में इमरान खान ने देश को आश्वस्त किया है कि खाने-पीने के सामानों की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लगाया जाएगा और वे जल्द ही नीचे आ जाएंगी।

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