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कराची में बगावत, जनरल बाजवा के लिए एक और मुसीबत

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार वाले सिंध की राजधानी कराची में गृह युद्ध जैसे हालात हैं। शहर के सभी पुलिस स्टेशनों पर फौज का कब्जा है और आर्मी फ्लैग मार्च निकाल रही है।

मृत्युंजय कुमार झा अपडेटेड October 21, 2020 22:44 IST
Rebellion in Karachi, another trouble for General Bajwa
कराची में बगावत, जनरल बाजवा के लिए एक और मुसीबत

पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची में गृह युद्ध जैसे हालात होते जा रहे हैं। पूरे शहर में पाकिस्तानी फौज की तैनाती हो गई है। सारे पुलिस स्टेशनों पर फौज का कब्जा है और शहर में  पाकिस्तानी आर्मी फ्लैग मार्च निकाल रही है। कराची, पाकिस्तान के राज्य सिंध की राजधानी है और वहां पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार है।

सिंध पुलिस के मुताबिक सोमवार रात 3 बजे पाकिस्तानी आर्मी के रेंजर और आईएसआई के कुछ लोग कराची के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी आईजी (इंस्पेक्टर ऑफ जनरल ऑफ पुलिस) मुश्ताक महार को उनके घर से किडनैप कर आर्मी के कोर कमांडर मुख्यालय ले गए और उनसे पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दामाद कैप्टन (रिटायर्ड) सफदर की गिरफ्तारी के आदेश पर जबरदस्ती दस्तखत करवाए गए।

इसके विरोध में आईजी छुट्टी पर चले गए। लेकिन अपने सीनियर अधिकारी के साथ हुई बदसलूकी से सिंध पुलिस भड़क उठी। पाकिस्तानी मीडिया पर पहले से ही पांबदी लगी हुई है। जाहिर है तमाम खबरें सोशल मीडिया से मिल रहीं हैं। जिनमें तस्वीरों के साथ कहा जा रहा है कि कराची में सेना और पुलिस के बीच लड़ाई जारी है और हालात गृह युद्ध जैसे हो गए हैं। पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने कोर कमांडर को इन घटनाओं की जांच करने का हुक्म दिया है। लेकिन सिंध पुलिस का गुस्सा कम नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि उनके चीफ को आर्मी के लोग ही किडनैप करके कोर कंमाडर के दफ्तर ले गए थे, लिहाजा कोर कमांडर की जांच कोई मतलब नहीं है।

Pakistani Rangers in Karachi
कराची में पाकिस्तानी रेंजर्स

पुलिस के मुताबिक बिना आर्मी चीफ की जानकारी के कोई कोर कमांडर इतना बड़ा कदम नहीं उठा सकता। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने जनरल बाजवा को इस हालात के लिए कसूरवार ठहराया है। उन्होंने कहा, “कराची की घटनाओं ने एक बार फिर मेरी बात पर मुहर लगा दी है कि किस तरह आप ( जनरल बजवा) अपनी खुद की एक अलग सरकार चला रहे हैं। आपने राज्य की चुनी हुई सरकार का मजाक बनाया है, एक सीनियर पुलिस अधिकारी को किडनैप कर उनसे गिरफ्तारी के आदेश पर दस्तखत करवाए, होटल के कमरे का दरवाजा तोड़ कर मेरी फैमिली की प्राइवेसी में दखलदांजी की। यह साबित करता है कि आप किस कदर कानून तोड़ कर अपना काम कर रहे हैं।”

अमूमन केन्द्र सरकारें इस तरह की जांच बिठाती हैं, लेकिन पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान की जगह सारे फैसले जनरल बाजवा ले रहे हैं। विपक्ष भी इसी बात की ताकीद कर रहा है कि इमरान तो कठपुतली हैं, पॉवर तो बाजवा के पास है। अफवाहों का दौर चल रहा है कि इमरान खान के दिन पूरे हो गए हैं।

रविवार को 11 विपक्ष पार्टियों के संगठन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीम) की काफी बड़ी रैली हुई थी। इस संगठन में नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग, बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी जैसी बड़ी पार्टियां भी शामिल हैं। नवाज शरीफ की बेटी और पार्टी नेता मरियम नवाज शरीफ ने इमरान खान और बाजवा की जमकर आलोचना की थी। सोमवार की सुबह मरियम के होटल का दरवाजा तोड़कर उनके पति कैप्टन सफदर को गिरफ्तार किया गया। हालांकि शाम तक उन्हें जमानत मिल गई लेकिन मामला थमा नहीं। अगले दिन मंगलवार को पता चला कि किस तरह कराची के आईजी को बंधक बनाकर उनके साथ बुरा सुलूक किया गया।

सिंध, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का गढ़ है और वहां इसी पार्टी की सरकार है, जिसके चेयरमैन बिलावल भुट्टो हैं। उन्होंने कहा, ” मैं मुंह दिखाने के काबिल नहीं हूं, मेरे राज्य में, जहां मेरी सरकार है, वहां मेरे गेस्ट मरियम और उनके पति के साथ यह सूलूक हुआ। आईजी पुलिस को 3 बजे सुबह किडनैप कर लिया गया। सारी पुलिस का मोराल डाउन है, कैसे काम करेंगे वो। यह मैं बर्दाश्त नहीं करुंगा।” बिलावल ने यह भी कहा कि उनके संगठन को कमजोर करने की कोशिश कामयाब नहीं होगी।

Tanks are also seen on roads in Pakistan
पाकिस्तान में सड़कों पर टैंक भी दिख रहे

पिछले कई हफ्तों से कराची सुलग रहा है। पिछले दिनों इमरान खान ने सिंध सरकार के विरोध के बावजूद कराची पोर्ट के पास दो द्वीपों-बुंडल और बुड्डो को अपने अधिकार में ले लिया था। खबर है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक क़ॉरिडोर यानि सीपीईसी के नाम पर इमरान इन दोनों द्वीपों को चीन को बेच रहे हैं। इसके खिलाफ मछुआरों की संस्था खड़ी हो गई है। जिसका कहना है कि इससे करीब 10 लाख मछुआरों का रोजगार खत्म हो जाएगा। उनके साथ सिंध की अलगाववादी संस्थाएं जुड़ गईं हैं जो पाकिस्तान से अलग एक सिंधु देश की मांग कर रही हैं।

पाकिस्तानी जानकारों के मुताबिक प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी सरकार हर क्षेत्र में विफल रही है। पत्रकार जाहिद हुसैन का कहना है जिस तरह इमरान सरकार लोगों की नजरों से गिरी है, उसकी कोई मिसाल नहीं। “इमरान ने अपनी पार्टी के अंदर एक टाईगर फोर्स बनाई है..क्यों, क्या इसका कोई कानूनी अस्तित्व है? नहीं। वॉर लार्ड्स की तरह उनकी अपनी फोर्स है।” जानकार खुलकर बात करने से कतरा रहे हैं लेकिन इशारों में जरूर बता रहे हैं कि पाकिस्तानी आर्मी चीफ बाजवा के लिए इमरान खान बोझ बन गए हैं और अगर उन्हें अपनी साख बचानी है तो कड़े फैसले लेने होंगे।

लेकिन कड़े फैसले तो विपक्षी पार्टियों ने भी ले लिए हैं। मरियम नवाज शरीफ ने कहा है कि उनका संगठन जनरल बाजवा के दबाव में नहीं आने वाला। संगठन ने इमरान खान को अगले साल जनवरी तक इस्तीफा देने को कहा है, लेकिन इसके बीच उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। पीडीएम की अगली रैली बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में 25 अक्टूबर को होनी है। बलूचिस्तान की सारी पार्टियां, जिनमें अलगाववादी भी शामिल हैं, इसमें शरीक हो रही हैं।

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