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Gyanvapi Mosque: वाराणसी कोर्ट की ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक एएसआई सर्वेक्षण की अनुमति

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर

Gyanvapi Mosque: इस मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले विष्णु शंकर जैन ने शुक्रवार को कहा कि वाराणसी की एक अदालत ने वाजू टैंक को छोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का एएसआई सर्वेक्षण करने का निर्देश दे दिया है, जिसे सील कर दिया गया है।

अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा पूरे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के “वैज्ञानिक सर्वेक्षण” के लिए निर्देश देने की मांग करने वाली हिंदू पक्ष द्वारा दायर याचिका पर अपना आदेश सुनाया।

जैन ने कहा, “मुझे सूचित किया गया है कि मेरा आवेदन स्वीकृत हो गया है… मुझे लगता है कि सर्वेक्षण 3 से 6 महीने के भीतर पूरा किया जा सकता है।”

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा, “एएसआई सर्वेक्षण के लिए हमारा आवेदन स्वीकार कर लिया गया है। यह मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।”

हिंदू पक्ष ने वाराणसी कोर्ट में एक याचिका पत्र दाखिल कर विश्वनाथ मंदिर स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के पूरे परिसर का एएसआई अध्ययन कराने की मांग की थी।

हिंदू पक्ष के वकील और समर्थक आशान्वित हैं और याचिका पर कोर्ट के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

अदालत ने पिछले शुक्रवार को एक याचिका पर बहस पूरी की।

यह याचिका इस साल मई में उन पांच महिलाओं द्वारा दायर की गयी थी, जिन्होंने पहले एक अन्य याचिका में मंदिर परिसर के अंदर “श्रृंगार गौरी स्थल” पर प्रार्थना करने की अनुमति मांगी थी। मस्जिद परिसर में एक संरचना पायी गयी है, जिसके एक तरफ़ “शिवलिंग” और दूसरी तरफ़ एक “फव्वारा” होने का दावा किया गया था।

सर्वेक्षण में उस वज़ुखाने को शामिल नहीं किया जायेगा, जिसमें ‘शिवलिंग’ जैसी संरचना है। उस इलाके को सील कर दिया गया है और मामला सुप्रीम कोर्ट में है। मुस्लिम पक्ष इस आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दे सकता है।

विष्णु शंकर जैन ने 14 जुलाई को कहा था कि उन्होंने कोर्ट के सामने हमारी बात रखी।

“माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 21 मई को हमारे पक्ष में फैसला सुनाया.. हमने एएसआई द्वारा इस स्थल की जांच की मांग करते हुए जिला अदालत के सामने अपना दृष्टिकोण रखा… हमें अदालत के आदेश की प्रतीक्षा करनी चाहिए।”

इससे पहले 6 जुलाई को ज्ञानवापी मामले में हिंदू याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द से जल्द एक याचिका पर सुनवाई करने का आग्रह किया था, जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गयी थी, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को पिछले साल एक वीडियो ग्राफ़िक्स सर्वेक्षण के दौरान वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पाये गये “शिवलिंग” की कार्बन डेटिंग सहित “वैज्ञानिक सर्वेक्षण” करने का निर्देश दिया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को एक पत्र लिखकर कहा था कि मामला 19 मई, 2023 को शीर्ष अदालत के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था, जब उसने निर्देशों के कार्यान्वयन को 6 जुलाई, 2023 तक के लिए टाल दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले “शिवलिंग” की कार्बन डेटिंग पर रोक लगाते हुए कहा था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश में निहित निर्देशों का कार्यान्वयन सुनवाई की अगली तारीख तक स्थगित रहेगा।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जिला न्यायाधीश, वाराणसी की देखरेख और निर्देशन में ज्ञानवापी परिसर में स्थित “शिवलिंग” के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की अनुमति दी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और केवी विश्वनाथन की पीठ ने “वैज्ञानिक सर्वेक्षण” को यह कहते हुए स्थगित कर दिया था कि “चूंकि विवादित आदेश के निहितार्थ बारीकी से जांच के योग्य हैं, इसलिए आदेश में संबंधित निर्देशों का कार्यान्वयन अगली तारीख तक स्थगित रहेगा।”

पीठ ने “शिवलिंग” की समय निर्धारित करने के लिए एएसआई द्वारा वैज्ञानिक जांच के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति की अपील पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भी जारी कर दिया था।

ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुज़ेफ़ा अहमदी ने पीठ को बताया था कि कार्बन डेटिंग और सर्वेक्षण जल्द ही शुरू होगा।

उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश हुए भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि संरचना को कोई नुक़सान नहीं होना चाहिए, जिसे एक पक्ष “शिवलिंग” का दावा करता है और दूसरा इसे फव्वारा कहता है।

इस मामले में हिंदू याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि एएसआई के विशेषज्ञ पहले ही बता चुके हैं कि ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

सर्वेक्षण के दौरान पिछले साल 16 मई को काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित मस्जिद के अदालत-आदेशित सर्वेक्षण के दौरान मस्जिद परिसर में एक संरचना पायी गयी थी – जिसे हिंदू पक्ष ने “शिवलिंग” और मुस्लिम पक्ष ने “फव्वारा” होने का दावा किया था।

उच्च न्यायालय ने 12 मई को वाराणसी जिला न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया  था, जिसने 14 अक्टूबर, 2022 को “शिवलिंग” के वैज्ञानिक सर्वेक्षण और कार्बन डेटिंग के आवेदन को खारिज कर दिया था।

उच्च न्यायालय ने वाराणसी जिला न्यायाधीश को हिंदू उपासकों द्वारा “शिवलिंग” की वैज्ञानिक जांच करने के आवेदन पर कानून के अनुसार आगे बढ़ने का निर्देश दिया था।

याचिकाकर्ता लक्ष्मी देवी और तीन अन्य ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।