Dlehi-NCR में कार से फर्राटा भरने वालों के लिए जरूरी खबर- अब 1 अक्टूबर से नहीं कर पाएंगे ऐसा- देखे क्या हो रहा है बदलाव

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दिल्ली-NCR में अब 1 अक्टूबर से केवल स्टैंडर्ड परमिटेड फ्यूल से ही चलेंगी गाड़ियां

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की बात करें तो यह यहां के लोगों के साथ ही सरकार के लिए गंभीर समस्या है। यहां की हवा में सांस लेने लायक नहीं है। पिछले काफी समय से दिल्ली और एनसीआर देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की लिस्ट में टॉप पर रहता तो है ही साथ ही दुनिया के भी पॉल्यूटेड सिटीज की लिस्ट में शामिल है। कई बार तो यहां कि हवा इतनी ज्यादा दूषित हो जाती है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अब, कमीशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट ने प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार को कुछ निर्देश जारी किए हैं।

इनके मुताबिक, अब केवल स्टैंडर्ड परमिटेड फ्यूल के इस्तेमाल की अनुमति होगी। जिन एरिया में पाइप्ड नैचुरल गैस की सुविधा होगी वहां यह निर्देश 1 अक्टूबर 2022 से लागू होगा। जहां पीएनजी की सुविधा नहीं होगी, वहां 1 जनवरी 2023 से स्टैंडर्ड परमिटेड फ्यूल्स को लागू किया जाएगा। कमीशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट को लगता है कि दिल्ली और एनसीआर की आवोहवा एक समान है। ऐसे में इन क्षेत्रों में फ्यूल स्टैंडर्ड भी एक समान होना चाहिए।

दरअसल, NCR में चार पहिया वाहनों में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल-डीजल के लिए बीएस छह मानक जरूरी है। इस फ्लूय में सल्फर 10 पीपीम तक रहता है। व्हीकल एंड इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए हाइड्रोजन और मिथेन गैस की अनुमति है। नैचुरल गैस, लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LNG), प्रोपेन, ब्यूटेन, इलेक्ट्रिसिटी, एविएशन टर्बाइन फ्यूल और बायो फ्यूल्स के इस्तेमाल की भी अनुमति है।

कमीशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट का कहा है कि, पावर प्लांट, सीमेंट प्लांस्ट, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स में रिफ्यूज डिराइव्ड फ्लूय (RDF) की अनुमति है। इसके साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बायोमास बैरीक्वेट्स की अनुमति है। जिसे कोल और चारकोल से तैयार किया जाता है। तंदूर और ग्रिल के लिए लकड़ी और बांस के इस्तेमाल की अनुमति है। यह अनुमति होटल्स और रेस्टोरेंट के लिए है, हालांकि वहां इमिशन की समुचित व्यवस्था हो। कपड़ा आयरन करने के लिए भी लकड़ी के चारकोल की अनुमति दी गई है। कमीशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट ने कहा है कि, दिल्ली और एनसीआर की आवोहवा बहुत खराब हो चुकी है। जो की चिंता का विषय है और इसके लिए कॉमन स्टैंडर्ड फ्यूल की लिस्टिंग जरूरी है। इसके साथ ही ये इंडस्ट्री भी जिस फ्यूल का इस्तेमाल कर रहे थे वो बेहद ही ज्यादा प्रदूषण फैला रहे थे। अब इन्हें भी पीएनजी और क्लीन एनर्जी की ओर शिफ्ट किया जा रहा है।