Hindi News

indianarrative

अब किससे जंग छेड़ने की तैयारी कर रहा Taliban! कहा- खुद अपनी बनाएंगे Air Force

Taliban बनाएगा अपनी खुद की Air Force

अफगानिस्तान में इस वक्त वो आलम है जहां पर दाने-दाने के लिए लोग तरस रहे हैं। अफगान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है, तालिबान ने जब से कब्जा किया है तब से ही देश में भूखमरी और आतंक फैल गया है। अब जिसके पास खाने के लाले पड़े हो वो अब अपनी एयरफोर्स बनाने की तैयारी कर रहा है।

यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि आतंक चला है आतंक का खात्मा करने जो कि नामुमकीन है। दरअसल, इस अफगानिस्तान में अगर इस वक्त चरमपंथी संगठन तालिबान का कोई कट्टर दुश्मन है तो वो है इस्लामिक स्टेट जिसके आतंक से तालिबान की रातों की नीद उड़ी हुई है। इस्लामिक स्टेट ने तालिबान के ऊपर इतने हमले किए हैं कि तंग आकर तालिबान अब अपनी खुद की वायुसेना बनाएगा और उसके पास जहाजों की कमी तो है नहीं क्योंकि, अमेरिका ने अफगानिस्तान में वैसे ही खैरत में अपने विमान छोड़कर गया है, और अगर कमी पड़ी तो चीन और पाकिस्तान है ही मदद करने के लिए।

काबुल के मुख्य सैन्य अस्पताल सरदार दाऊद खान पर मंगलवार को संदिग्ध आईएसआईएस-के ने हमला किया था। इसमें 23 लोगों की मरने की बात कहीं जा रही हैं। हमले के बाद तालिबान ने अस्पताल की छत पर अमेरिका ब्लैक हॉक सहित तालिबान के तीन हेलीकॉप्टरों तैनात किया था। इस हमले के बाद तालिबान सरकार में गृहमंत्रालय के प्रवक्ता कारी सईद खोस्ती ने केन्यूज से बात करते हुए कहा है कि हम पिछली सरकार की वायुसेना और उनके पास जो पेशेवर थे, उनका उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे सभी वापस आएं। उन्होंने कहा कि हमारे पास सबके लिए अच्छी नीति है। वहीं केन्यूज के मुताबिक काबुल स्थित तालिबान के एक उच्च पदस्थ खुफिया अधिकारी ने जोर देकर कहा कि वायु सेना का होना अनिवार्य है।

तालिबान के प्रवक्ता बिलाल करीमी ने कहा है कि, हम एक वायुसेना का निर्माण कर रहे हैं। पायलट जो उड़ानों की सुविधा प्रदान कर रहे हैं, उनके लिए सामान्य माफी की घोषणा की गई है। साथ ही हमने उन्हें वापस आने और फिर सेना में शामिल होने और अपने देश की मदद करने के लिए कहा है। वहीं, रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह ख्वारिजमी ने कहा कि जिन विमानों को कम मरम्मत की आवश्यकता थी, उन्हें ठीक कर दिया गया है। केन्यूज के मुताबिक यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि तालिबान ने अफगान वायुसेना से जो उपकरण पर कब्जा किया है, उनमें से कितने उपकरण संचालित हैं।