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रूस पर भरोसा करना सबसे बड़ी भूल! इस देश के PM ने पुतिन को सुनाई खरीखोटी

रूस-आर्मेनिया में विवाद बढ़ा

Russia-Armenia dispute: अजरबैजान की आक्रामकता का सामना कर रहे आर्मेनिया ने रूस को जमकर लताड़ा है। आर्मेनिया पहले सोवियत संघ का हिस्सा था। ऐसे में 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद आर्मेनिया ने रूस के साथ अपनी सुरक्षा के लिए समझौता किया। हालांकि, आर्मेनिया को इसका फायदा नहीं हुआ, बल्कि उसे अजरबैजान के हाथों अपने देश के सैकड़ों किलोमीटर की जमीन हारनी पड़ी। अब आर्मेनिया ने अपनी उसी ऐतिहासिक गलती पर पछतावा जताया है और रूस की जमकर आलोचना की है। आर्मेनिया के प्रधानमंत्री ने कहा है कि अपनी सुरक्षा की गारंटी के लिए केवल रूस पर निर्भर रहने की उनके देश की नीति एक रणनीतिक गलती थी, क्योंकि मॉस्को ऐसा करने में असमर्थ रहा है।

रूस पर आर्मेनिया की रक्षा नहीं करने का आरोप

रविवार को प्रकाशित इतालवी अखबार ला रिपब्लिका के साथ एक इंटरव्यू में आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनियन ने रूस पर आर्मेनिया की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। पाशिनियन ने कहा कि रूस का आर्मेनिया के साथ रक्षा समझौता है। इसके तहत आर्मेनिया में रूस का एक मिलिट्री बेस भी है। उन्होंने कहा कि रूस पर्याप्त रूप से आर्मेनिया को अपना समर्थक देश नहीं मानता। उन्होंने यह भी दावा किया कि उकना मानना है कि रूस व्यापर दक्षिण काकेशस क्षेत्र को छोड़ने की प्रक्रिया में है।

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रूस पर निर्भर रहना रणनीतिक गलती

पशिनियन ने ला रिपब्लिका का कहना है कि आर्मेनिया की सुरक्षा वास्तुकला 99.999% रूस से जुड़ी हुई थी, जिसमें हथियारों और गोला-बारूद की खरीद भी शामिल थी।लेकिन आज हम देख रहे हैं कि रूस को स्वयं (यूक्रेन में युद्ध के लिए) हथियारों, हथियारों और गोला-बारूद की आवश्यकता है और इस स्थिति में यह समझ में आता है कि अगर वह ऐसा चाहे तो भी रूसी संघ आर्मेनिया की सुरक्षा जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता है।