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UN को ही आंख दिखाने लगा Taliban, किसी को कोड़े तो किसी को दी पत्थर मारने की सजा

UN on Taliban

अफगानिस्तान में तालिबान (Taliban) ने कब्जा कर अपनी सरकार तो बना ली है लेकिन, इनके पास कुछ बचा ही नहीं है। तालिबान सरकार के पास पैसे के लाले पड़े हैं। अमेरिका सहीत जो देश अफगानिस्तान में मानवीय सहायता के लिए एक मोटी रकम भेजते थे वो भेजना बंद कर दिए हैं जिसके बाद अफगानिस्तान की हालत खस्ता है। तालिबानियों को आने के बाद से मुल्क में मानवीय संकट का खतरा गहराता चला जा रहा है। वहीं अब ताजा रिपोर्ट में अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज होने के बाद से सार्वजनिक मृत्युदंड देने, कोड़े मारने और पत्थर मारने की सजा के लिए सोमवार को तालिबान की कड़ी आलोचना की गई और देश के शासकों से इस तरह की गतिविधियों को रोकने को कहा गया।

दरअसल, अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले छह महीने में ही अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से 274 पुरुषों, 58 महिलाओं और दो लड़कों को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे गए। एजेंसी की मानवाधिकार प्रमुख फियोना फ्रेजर ने कहा, शारीरिक दंड देना, प्रताड़ना के खिलाफ समझौते का उल्लंघन है और इसे रोका जाना चाहिए। उन्होंने मृत्युदंड पर तत्काल पाबंदी की मांग की। तालिबान के विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि अफगानिस्तान के कानून इस्लामी नियमों और दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं और बड़ी संख्या में अफगान नागरिक इन नियमों को मानते हैं।

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उदार नियमों का वादा हुआ बेकार

रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के सत्ता में आने के बाद सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने की पहली सजा अक्टूबर 2021 में उत्तरी कापिसा प्रांत में दी गयी। इसके अनुसार इस मामले में व्यभिचार के दोषी एक महिला और पुरुष को मौलवियों और स्थानीय अधिकारियों की मौजूदगी में 100-100 कोड़े मारे गये थे। तालिबान के ओहदेदारों ने दिसंबर 2022 में हत्या के एक दोषी को मौत की सजा दी। रिपोर्ट के अनुसार तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के बाद सार्वजनिक मृत्युदंड का यह पहला मामला था। पीड़ित के पिता की राइफल से ही इस सजा को अंजाम दिया गया और यह मौलवियों तथा तालिबान अधिकारियों के सामने पश्चिमी फराह प्रांत में हुआ।