लद्दाख में वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला नाग लोक, 3.5 लाख साल पहले हिमालय के पहाड़ों में रहते थे विशालकाय सांप!

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वैज्ञानिकों ने खोज निकाला नाग लोक!

भारतीय वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक नई खोज कर सभी का हैरत में डाल दिया है। क्या हिमालय पर कभी नागों का राज था। क्या हिमालय में नागलोक था। नागलोक की कहानियां तो पंचतंत्र में पढ़ी हैं, नाग लोक की और भी कहानी हैं। एक यह कहानी ये भी है कि पांडवों के भाई भीम की मां नाग लोक की राज कन्या थीं। बहरहाल, ये सभी सिर्फ कहानियां हैं या इनमें कुछ सच्चाई है, इसपर तो हम कुछ नहीं कह सकते लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने लद्दाख में विशालकाय नागों के जीवाश्म खोज निकाले हैं। ये जीवाश्म साढ़ें तीन करोड़ साल पुराने हैं। 

भारतीय वैज्ञानिकों ने हिमालय के लद्दाख में दुर्लभ सांप 'मैडसोइइडे' के जीवाश्म खोज निकाले हैं और दिलचस्प बात यह है कि वो करीब 3.5करोड़ साल पुराने हैं। यह जीवाश्म शीरे के निक्षेपों में मिले हैं। वैज्ञानिकों की इस खोज से इतना तो स्पष्ट हो गया है कि यह सांप पूर्वानुमानों की तुलना में कहीं ज्यादा पहले से इस उपमहाद्वीप में मौजूद थे।

बता दें, मैडसोइइडे मध्यम आकार के विशाल सांपों का एक विलुप्त समूह है, जो सबसे पहले क्रिटेशस के अंतिम समय में सामने आए थे। यह सांप ज्यादातर गोंडवानारतीये  क्षेत्र में पाए जाते थे। हालांकि, उनका सेनोजोइक रिकॉर्ड काफी दुर्लभ है।

प्राप्त जीवाश्मों के रिकॉर्ड से मालूम होता है कि यह विशालकाय सांपों का एक समूह ऑस्ट्रेलिया को छोड़कर अधिकांश गोंडवाना महाद्वीप में पेलियोसीन युग के मध्य में पूरी तरह गायब हो गया था। हालांकि उस दौरान भी यह सांप अपने अंतिम ज्ञात समूह वोनाम्बी के साथ प्लीस्टोसीन युग के अंत तक जीवित रहे थे। इसके अलावा दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी यूरोप में भी इस सांप के जीवाश्म रिकॉर्ड मिले हैं।

 

विलुप्त होने में जलवायु में आए बदलाव

बता दें, शोध वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून, पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ और कोमेनियस यूनिवर्सिटी स्लोवाकिया के शोधकर्ताओं द्वारा मिलकर किया गया है। जोकि जर्नल ऑफ वर्टेब्रेट पेलियोन्टोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक यह पहला मौका है जब भारत में इस दुर्लभ सांप 'मैडसोइइडे' के जीवाश्म खोजे गए है जोकि लगभग 3.37से 2.38करोड़ वर्ष पूर्व पहले ओलिगोसीन युग में यहां पाए जाते थे। लद्दाख में ओलिगोसीन से मैडसोइडे युग के बीच इनकी मौजूदगी इस बात की पुष्टि करती है कि यह सांप कम से कम पैलियोजीन युग के अंत तक यहां व्यापक रूप से मौजूद थे। यह भूगर्भीय काल आज से करीब 6.6करोड़ वर्ष पूर्व क्रिटेशस के अंत से 4.3करोड़ वर्ष के बीच था।

शोध से मालूम होता है कि इस समूह के सदस्य इस उपमहाद्वीप में पूर्वानुमानों की तुलना में कहीं अधिक समय तक सफल से रहे थे। इससे यह भी साफ होता है कि इन सांपों ने इस दौरान सफलता पूर्वक जलवायु में आए बदलावों का सामना किया था और वो इसके समूह के विलुप्त होने का कारण नहीं थे।वहीं वैज्ञानिकों को जीवाश्मों के जो नमूने मिले हैं वो डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के एक स्वायत्त संस्थान वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून में संभाल कर रखे गए हैं।