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Indian Army के प्लान से हिली पाकिस्तानी सेना- फिर करने जा रही है ‘सर्जिकल ऑपरेशन’

अब आतंकियों पर चलेगा सेना का सर्जिकल ऑपरेशन

भारतीय सेना लगातार आतंकियों के मंसूबों को नाकाम कर रही है। आंतकी जब सेना और कोई बड़ा हमला करने में नाकाम रहे तो वो आम नागरिकों को निशाना बनाने लगे और पिछले महीने जम्मू-कश्मीर में निर्दोष नागरिकों की हत्याओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ। आम नागरिकों की हत्याओं में शामिल लगभग सभी आतंकवादियों को खोज-खोज कर सेना ने मार गिराया है। अब इसके बाद सेना जो करने जा रही है उससे पाकिस्तानी सेना की नींद उड़ गई है।

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दरअसल, सशस्त्र बल अब खुफिया-आधिरित 'सर्जिकल ऑपरेशन' पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसमें आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए छोटी टीमें शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से बताया गया कि, आतंकवाद से निपटने के लिए एक 'रिफाइन्ड' दृष्टिकोण जम्मू-कश्मीर पुलिस, खुफिया एजेंसियों और सेना के बीच बेहतर समन्वय के एक अधिक सूक्ष्म ढांचे के तहत रखा गया है। इसका उद्देश्य आतंकवाद से होने वाली क्षति को कम करना है। सूत्रों ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का मुख्य फोकस निर्दोष लोगों की हत्या को रोकना है।  सुरक्षा बलों की सभी शाखाएं इसे हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।

यही कारण है कि खुफिया-आधारित सर्जिकल ऑपरेशन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें छोटी टीमों को शामिल किया गया है। इस तरह की कार्रवाइयों के लिए स्थानीय आबादी से समर्थन प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह भी खबर है कि, पाकिस्तान स्थिति आतंकी आकाओं ने कश्मीर में सक्रिय अपने प्रॉक्सी को निर्देश दिाय है कि जब भी सुरक्षा बल आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू करें तो कम से कम 10 नागरिक मारे जाएं। उन्होंने कहा कि 2018 में विभिन्न आतंकवाद विरोधी अभियानों में 24 नागरिक मारे गए और 49 घायल हुए। सूत्रों ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में, सुरक्षा बलों ने नागरिकों की रक्षा के लिए कई उपाय किए और इस तरह के प्रयासों के परिणामस्वरूप, केवल दो नागरिक मारे गए और दो को मामूली चोटें आईं।

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जम्मू-कश्मीर के लोग अब बदल रहे हैं, वो अब सुरक्षा बलों के साथ भरोसा दिखाते हुए कई खुफिया जानकारी के साथ समर्थन कर रहे हैं और इसके साथ ही पाकिस्तान द्वारा चलाए जा रहे झूठ प्रचार को खारिज कर रहे हैं। घाटी में इस वक्त स्थिति नियंत्रण में है, 2018 में 318 आतंक से संबंधित घटनाओं की तुलना में 2021 में केवल 121 घटनाएं दर्ज की गई हैं।