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किसे जाता है National flag को डिडाइन करने का क्रेडिट? जानिए उस शख्सियत के जीवन से जुड़ी 10 बड़ी बातें।

National Flag के डिजाइनर पिंगरि वेंकय्या

हमारी आन बान और शान National flag को लेकर हर देशवासियों के मन में असीम श्रद्धा भाव है। किसी भी देश की पहचान उसके राष्ट्रीय प्रतीक राष्ट्रगान और राष्ट्र ध्वज के आधार पर तय होती है। जब भी हर हिन्दुस्तानी देश की आजादी के बारे में सोचते हैं,उसकी अनेकता में एकता के बारे में ध्यान करते हैं,तो मन में सिर्फ और सिर्फ तिरंगा ही आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं इस तिरंगे को अंतिम रूप यानी डिजाइन करने का क्रेडिट किसे जाता है?

उत्तर से दक्षिण तक और पूरब से पश्चिम तक की अगर बात करें तो हिन्दुस्तान में सैकड़ों भाषाएं और कई बोलियां बोली जाती है। उसी भाषाओं के प्रति उस शख्सियत का गहरा लगाव था, जिसने तिरंगे को डिजाइन किया। वो शख्स कोई और नहीं बल्कि पिंगलि वेंकय्या (Pingali Venkayya) थे, जिन्होंने तिरंगा का डिजाइन किया और विजयवाड़ा में कांग्रेस की बैठक में महात्मा गांधी के द्वारा अनुमोदित किया गया।

हमारा राष्ट्रध्वज(National Flag) अन्य देशों की तरह नहीं बल्कि बेहद अलग और अनोखा है। आज हम आपको बताएंगे राष्ट्रध्वज तिरंगा को डिजाइन करने वाले Pingali Venkayya से जुड़ी 10 खास जानकारियां।

2 अगस्त 1876 को जन्म

महान भाषाविद् पिंगली वेंकैया का जन्म मद्रास प्रेसीडेंसी के भाटलापेनुमारु स्थित एक ब्राह्मण परिवार में 2 अगस्त 1876 को हुआ था। पिंगलि वेंकय्या अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई मद्रास से ही किया औऱ उसके बाद वो उच्च शिक्षा के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी चले गए।

ब्रिटिश इंडियन आर्मी में दी सेवा

युवावस्था में पिंगलि वेंकय्या साउथ अफ्रिका जाकर दूसरे बोअर युद्ध में ब्रिटिश इंडियन आर्मी के सैनिक के तौर पर अपनी सेवाएं दी। साउथ अफ्रिका ब्रिटिश सैनिकों के बीच यूनियन जैक द्वारा राष्ट्रीयता की भावना को देखकर वेंकैया बहुत ज्यादा प्रेरित हुए।

‘पट्टी वेंकय्या’ नाम से मिली प्रसिद्धि

पिंगलि वेंकय्या को ‘पट्टी वेंकय्या’ के नाम से भी प्रसिद्धि मिली,क्योंकि उन्होंने कंबोडिया कपास में रिसर्च की थी। दरअसल,पट्टी का अर्थ होता है ‘कपास’ जो मछलीपट्टनम के लिए बेहद महत्व रखता है।

भाषाओं के प्रति प्रेम

पिंगलि वेंकय्या का भाषाओं के प्रति प्रेम ने भी लोगों का ध्यान खींचा। पिंगली को ‘जापान वेंकैया’ के नाम से भी लोग जानते थे। क्योंकि 1913 में उन्होंने आंध्रप्रदेश का एक कस्बा बापटला के एक स्कूल में जापानी भाषा में एक व्याख्यान दिया था।

पूरा जीवन राष्ट्र ध्वज के लिए समर्पित

विदेशों से लौटने के बाद पिंगलि वेंकय्या ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रीय ध्वज के लिए खुद को समर्पित कर दिया। साल 1916 में उन्होंने कई अन्य राष्ट्रों के झंडों पर एक किताब लिखी और उसे प्रकाशित किया। भारत के लिए एक राष्ट्रीय ध्वज,जिसमें भारतीय ध्वज बनाने के लिए करीब 30 डिजाइन उन्होंने पेश किया।

1919-1921 तक कांग्रेस अधिवेशन में राष्ट्रीय ध्वज रखने का विचार

पिंगलि वेंकय्या 1919 से लेकर 1921 तक लगातार कांग्रेस अधिवेशनों के दौरान भारत का राष्ट्रीय ध्वज रखने के विचार पर बल दिया।जिसे बाद में 1921 में अनुमोदित भी किया गया।

1921 में राष्ट्र ध्वज किया गया अनुमोदित

पिंगलि वेंकय्या द्वारा डिजाइन राष्ट्रीय ध्वज को साल 1921 में अनुमोदित किया गया। कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में पिंगलि वेंकय्या द्वारा डिजाइन राष्ट्र ध्वज को महात्मा गांधी ने अनुमोदित किया।

गरीबी में गुजरी वेंकैया का अंतिम समय

महान राष्ट्र भक्त पिंगलि वेंकय्या का अंतिम समय गरीबी में गुजरी। 4 जुलाई 1963 को उन्हों ने अंतिम सांस ली। वेंकय्या स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायक थे,जिनका भारत की स्वतंत्रता में अहम योगदान रहा।

उनके सम्मान में जारी किया गया डाक टिकट

स्वतंत्रता संग्राम के इस महानायक को 2009 में इतिहास से बाहर कर दिया गया,हालांकि उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया गया था।

Pingali Venkayya
Pingali Venkayya के सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया।

आंध्र के सीएम भारत रत्न के लिए भेजा प्रस्ताव

साल 2021 में आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी द्वारा भारत रत्न के लिए उनके नाम का प्रस्ताव भी किया गया था। हालांकि यह सम्मान जिसके वो हक़दार हैं उन्हें अभी तक नहीं मिल पाया है।

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