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Chaitra Navratri: मां कालरात्रि ने बनाया शुभ योग, इस मुहूर्त में करें पूजा, देखें किस चीज का भोग लगाने से प्रसन्न होंगी माता?

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आज नवरात्रि का सातवां दिन है और सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। माता के इस स्वरूप को भयंकर माना जाता है। जब माता पार्वती ने शुंभ-निशुंभ का वध करने के लिए अपने स्वर्णिम वर्ण को त्याग दिया था, तब उन्हें कालरात्रि के नाम से जाना गया। मां कालरात्रि का वाहन गधा है और इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से ऊपर का दाहिना हाथ वरद मुद्रा में और नीचे का हाथ अभयमुद्रा में रहता है। जबकि बायीं ओर के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और निचले हाथ में खड़ग है। इनका रंग काला है और ये तीन आखों वाली हैं। मां कालरात्रि हमेशा अपने भक्तों का कल्याण करती हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।

 

नवरात्रि के सातवें दिन बन रहा ये शुभ योग-

नवरात्रि के सातवें दिन शोभन योग का निर्माण हो रहा है। शास्त्रों में शोभन योग को अति शुभ योगों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों में सफलता हासिल होती है। शोभन योग 08 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

 

मां कालरात्रि का प्रिय रंग और पुष्प

मां कालरात्रि को रातरानी का पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि को लाल रंग प्रिय है। इसलिए पूजा के समय लाल रंग का गुलाब या गुड़हल अर्पित करना चाहिए।

 

मां कालरात्रि पूजा विधि

मां कालरात्रि की पूजा सुबह के समय करना शुभ माना जाता है। मां की पूजा के लिए लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए। मकर और कुंभ राशि के जातको को कालरात्रि की पूजा जरूर करनी चाहिए। परेशानी में हो तो सात या नौ नींबू की माला देवी को चढ़ाएं। सप्तमी की रात्रि तिल या सरसों के तेल की अखंड ज्योति जलाएं। सिद्धकुंजिका स्तोत्र, अर्गला स्तोत्रम, काली चालीसा, काली पुराण का पाठ करना चाहिए। यथासंभव इस रात्रि संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

 

मां कालरात्रि को भोग

सप्तमी नवरात्रि पर मां को खुश करने के लिए गुड़ या गुड़ से बने व्यंजनों का भोग लगा सकते हैं।

 

ध्यान

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।

लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।

 

वामपादोल्लसल्लोहलताकंन्टकभूषणा।

वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।

 

खास उपाय

नवरात्रि के सातवें दिन विशेष उपाय करने से शत्रुओं के छुटकारा मिल सकता है। इसके लिए 108 बार नवार्ण मंत्र पढ़ते जाएं और एक-एक लौंग मां कालरात्रि को चढ़ाते जाएं। नवार्ण मंत्र है- "ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे". इसके बाद उन 108 लौंग को इकठ्ठा करके अग्नि में डाल दें। मान्यता है कि ऐसा करने से विरोधी और शत्रु शांत हो जाते हैं।