Taliban का रोना शुरू- Afghanistan के हालात पर देखिए किसे ठहरा रहा जिम्मेदार

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अफगानिस्तान को कंगाल करने वाले तालिबान के बिगड़े बोल

अफगानिस्तान में तालिबान ने 15 अगस्त 2020 को कब्जा कर लिया इसके बाद से भी भारती संख्या में दुनिया के लोगों के साथ अफगान के लोगों ने देश छोड़ दिया, लाखों लोगों ने तालिबानियों के डर से देश छोड़ दिया है और अब भी छोड़ रहे हैं। इस वक्त अफगानिस्तान की हालात यह है कि यहां के लोग दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं। इतना बड़ा आर्थिक संकट आ गया है कि ना तो नौकरी है और ना ही खाने के लिए पैसे। यहां तक की अब लोग अपने बच्चों तक को भी रासन की दुकान पर बेचकर रासन ला रहे हैं। इन सब के बीच तालिबान का कहना है कि अफगानिस्तान में जो भी कुछ चल रहा है वो इसका जिम्मेदार नहीं है।

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तालिबान प्रधानमंत्री ने तालिबान के शासन का बचाव करते हुए कहा कि समूह बिगड़ते हुए आर्थिक संकट के लिए दोषी नहीं है। तालिबान पिछली सरकार के भ्रष्टाचार को सुधारने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने अधिक समावेशी कैबिनेट के गठन के लिए बनाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव को भी खारिज कर दिया। सत्ता में आने के बाद मोहम्मद हसन अखुंद का यह पहला सार्वजनिक संबोधन था। तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान को मिलने वाली अतंरराष्ट्रीय सहायता बंद हो गई और विदेशों में रखी गई अरबों डॉलर की अफगान संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया। जिसके चलते अर्थव्यवस्था का बेड़ा गर्क हो गया। तालिबान लगातार फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करने की गुजारिश कर रहा है।

अखुंद ने कहा कि बढ़ती बेरोजगारी और वित्तीय मंदी की समस्या पिछली अमेरिकी समर्थित सरकार के तहत शुरू हो गई थी। उन्होंने ये कहते हुए कहा कि अफगानों को इस दावे पर विश्वास नहीं करना चाहिए कि तालिबान को दोष देना है। उन्होंने कहा, देश सतर्क रहे। पिछली सरकार के लोग बचे हुए हैं और वे चिंता पैदा कर रहे हैं। इसके अलावा लोगों को अपनी सरकार के खिलाफ भ्रम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने व्यापक भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हुए कहा कि पिछली सरकार ने दुनिया की सबसे कमजोर व्यवस्था चलाई थी। इसके उलट, तालिबान भ्रष्टाचार को खत्म कर रहा है और देशभर में सुरक्षा लेकर आया है।

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इसके आगे मोहम्मद हसन अखुंद ने कहा कि, हम लोगों की समस्याओं का यथासंभव समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं। हम हर विभाग में ओवरटाइम काम कर रहे हैं। समूह ने आर्थिक संकट को हल करने और सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने की कोशिश करने के लिए समितियों का गठन किया है।