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भारत ने फिर निभाई अपनी दोस्ती, Russia ने कहा- पूरी दुनिया की ताकत हमे तोड़ नहीं सकती!

भारत ने फिर निभाई अपनी दोस्ती

भारत और रूस के बीच दोस्ती कितनी गहरी है यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है। जब भी मुश्किल में भारत रहा है तो उसके सामने रूस सीना तान कर खड़ा रहा है। भारत के लिए रूस ने अमेरिका और ब्रिटेन जैसे सुपर पावर देशों से लड़ने के लिए तैयार हो चुका है। अब जब इस दोस्ती पर भारत को अमल होने की बारी आई तो प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपनी दोस्ती को बखुबी से निभाते हुए रूस का साथ दिया है। जिसे देखकर रूस काफी खुश है। रूस का कहना है कि, पूरी दुनिया की ताकत भारत और रूस के बीच के रिश्ते को नहीं तोड़ सकती है। दरअसल, युक्रेन जंग को लेकर अमेरिका और नाटो लगातार दुनिया को धमकी दे रहे हैं कि अगर उन्होंने रूस का साथ दिया तो वो उसे बर्बाद कर देंगे। अमेरिका ने भारत को भी कई बार धमकी दी है। लेकिन, भारत को अपना स्टैंड लेने अच्छे से आता है। अब जब संयुक्त राष्ट्र में रूस को निलंबित करने पर वोटिंग हुई तो भारत ने इससे फिर किनारा कर लिया।

अमेरिका और नाटो इन दिनों भारत के खिलाफ कई बार चेतावनी दिए हैं कि वो रूस से रिश्ता तोड़ ले। इसेक बाद पश्चिमी देशों को लगा था कि भारत पर इसका असर पड़ेगा और वो रूस के खिलाफ जाएगा। लेकिन, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में रूस को मानवाधिकार परिषद से निलंबित करने के प्रस्ताव पर मतदान हुआ तो भारत ने एक बार फिर से भाग न लेते हुए अपनी दोस्ती बनाए रखने की परिक्षा पास कर गया। रूसी सेनाओं द्वारा यूक्रेन की राजधानी कीव के पास आम लोगों की हत्या करने के आरोपों के चलते अमेरिका ने उक्त प्रस्ताव पेश किया था।

कुल 193 सदस्य देशों वाली महासभा ने गुरुवार को मानवाधिकार परिषद से रूस को निलंबित करने के प्रस्ताव पर मतदान किया। इस प्रस्ताव के पक्ष में 93 और विरोध में 24 मत पड़े जबकि 58 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया। रूस को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से निलंबित कर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने मतदान के बाद कहा, भारत ने आज महासभा में रूस महासंघ को मानवाधिकार परिषद से निलंबित करने से संबधित प्रस्ताव पर मतदान में भाग नहीं लिया। हमने तर्कसंगत और प्रक्रिया सम्मत कारणों से यह किया। उन्होंने कहा, यूक्रेन में युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक भारत शांति, संवाद और कूटनीति का पक्षधर रहा है। हमारा मानना है कि रक्त बहाने और निर्दोष लोगों के प्राण लेने से किसी समस्या का समाधान नहीं निकल सकता। यदि भारत ने कोई पक्ष लिया है तो वह है शांति और हिंसा का तत्काल अंत।