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Imran के दांव से शहबाज को तगड़ा झटका, जानिए पाकिस्तानियों को क्यों बताया गुलाम ?

इमरान के दांव से शहबाज को बड़ा झटका

पकिस्तान के हालात कुछ ऐसे हैं कि उनकी आपस में बन पाना ही बेहद मुश्किल है। हाल ही में पाकिसातन के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के पाकिस्‍तानी सेना से सीधे भिड़ते हुए आजादी मार्च निकालने से शहबाज शरीफ सरकार को करारा झटका लगा है। दरअसल इमरान के प्रदर्शन से अब सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान का पाकिस्‍तान दौरा खटाई में पड़ता दिख रहा है। पाक इन दिनों डिफॉल्ट होने की कगार पर है और विनाशकारी बाढ़ ने उसकी कमर तोड़ रखी है। यही नहीं पाक की अर्थव्‍यवस्‍था को बचाने के लिए इन दिनों शहबाज शरीफ दुनिया के सामने झोली फैला रहे हैं और उन्‍हें सऊदी प्रिंस के दौरे से अरबों डॉलर मिलने की उम्‍मीद थी। ऐसे में सऊदी प्रिंस नवंबर में भारत का दौरा कर सकते हैं जहां दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर की डील होने की उम्‍मीद जताई जा रही है।

इस बीच पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब का दौरा करने के बाद दावा किया है कि प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान (Saudi Crown Prince) पाकिस्‍तान की यात्रा पर आएंगे। हालांकि वह कब आएंगे, इस बारे में अभी कुछ स्‍पष्‍ट नहीं कहा गया है। इससे पहले सऊदी प्रिंस का नवंबर में ही पाकिस्‍तान जाने की योजना थी। पाकिस्‍तानी पीएम के दावे के विपरीत इस पूरे मामले से जुड़े देश के आधिकारिक सूत्रों ने पाकिस्‍तानी अखबार एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून से कहा कि मोहम्‍मद बिन सलमान का पाकिस्‍तान दौरा इमरान के आजादी मार्च की वजह से टल सकता है।

सऊदी प्रिंस से पाकिस्‍तान को क्या है उम्मीद

इमरान खान ने शुक्रवार को अपने आजादी मार्च को पंजाब प्रांत के लाहौर शहर से शुरू कर दिया है। पंजाब में इमरान खान की पार्टी की सरकार है। इमरान ने अभी तक लॉन्‍ग मार्च के इस्‍लामाबाद पहुंचने को लेकर कोई टाइम फ्रेम नहीं बताया है। इमरान यह आजादी मार्च ऐसे समय पर निकाल रहे हैं जब सऊदी प्रिंस शहबाज शरीफ के निमंत्रण पर पाकिस्‍तान आने वाले थे। पाकिस्‍तान को उम्‍मीद है कि सऊदी प्रिंस पाकिस्‍तान के लिए अरबों डॉलर के वित्‍तीय बेलआउट पैकेज और तेल रिफाइनरी लगाने का ऐलान कर सकते हैं।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्‍तान और सऊदी अरब दोनों ही प्रिंस की यात्रा की तिथियों को लेकर विचार विमर्श कर रहे हैं। वहीं सऊदी अधिकारी इमरान को लेकर पाकिस्‍तान में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए हैं। इमरान का लॉन्‍ग मार्च अगर जारी रहता है और वह इस्‍लामाबाद में धरना देते हैं तो दोनों ही पक्ष इस दौरे की तिथियों को बदल सकते हैं जैसा साल 2014 में उन्‍होंने किया था। विश्‍लेषकों का कहना है कि जिस तरह से पाकिस्‍तान में राजनीतिक अनिश्चितता चल रही है, कोई भी विदेशी राष्‍ट्राध्‍यक्ष इस्‍लामाबाद नहीं आना चाहेगा।

सऊदी प्रिंस ने भारत के लिए किया था इस बात का ऐलान

इस बीच सऊदी अरब के प्रिंस नवंबर में ही भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। सऊदी अरब और अमेरिका के बीच इन दिनों काफी तनाव बढ़ा हुआ है और प्रिंस की भारत यात्रा का उद्देश्‍य अरबों डॉलर के समझौते पर हस्‍ताक्षर करना है। माना जा रहा है कि इस बैठक के दौरान भारत के साथ यूक्रेन संकट के बीच खाद्यान और ऊर्जा जरूरतों पर बातचीत होगी। सऊदी अरब भारत के लिए एक प्रमुख ऊर्जा स्रोत रहा है। अपने पिछले दौरे में सऊदी प्रिंस ने भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया था। ताजा दौरे में इसकी समीक्षा और भारत में तेल रिजर्व बनाने पर बात हो सकती है।