काबुल में जन्में कादर खान कब्रिस्तान में करते थे डायलॉग की प्रैक्टिस, एक्टिंग से बॉलीवुड में जमाई थी अपनी धाक

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बॉलीवुड के दिवंगत एक्टर कादर खान की आज 84वीं बर्थ एनिवर्सरी है। कादर खान अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन वो ​अनगिनत फिल्मों के जरिए लोगों के दिलों में आज भी जीवित हैं। कादर का जन्म अफगानिस्तान के काबुल में हुआ था। कादर खान से पहले उनकी मां के तीन बेटे हुए थे लेकिन सभी की 8 साल की उम्र पूरी होते-होते मौत हो जाती थी। इसी डर के कारण उनकी मां ने काबुल छोड़कर भारत आने का फैसला किया और मुंबई आ गई थीं।

कादर ने मुंबई के एम एच साबू सिद्दीक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर के तौर पर काम किया। लेकिन वो एक्टर बनना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजेश खन्ना की फिल्म 'दाग' से की।

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इस फिल्म में उन्होंने प्रॉसिक्यूटिंग अटॉर्नी का किरदार निभाया था। वहीं फिल्म परवरिश में उन्होंने एक गुंडे का रोल किया। इसके बाद फिल्म नसीब में उन्होंने नेगेटिव किरदार निभाया। अमिताभ बच्चन इस फिल्म में लीड रोल में थे। अमिताभ बच्चन हमेशा से ही कादर खान के अच्छे दोस्त रहे। उनके निधन पर एक ट्वीट में अमिताभ बच्चन ने उन्हें 'शानदार मंच कलाकार' और 'मेरी बहुत सफल फिल्मों में से एक महान लेखक' बताया था। उन्होंने फिल्म हम और अग्निपथ में अमिताभ बच्चन के लिए डायलॉग भी लिखे थे।

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एक इंटरव्यू में कादर खान ने बताया था कि वो यहूदी कब्रिस्तान में अपने डायलॉग की प्रैक्टिस करते थे, क्योंकि यहां उन्हें कोई सुनने वाला नहीं होता था। लेकिन एक दिन उन्हें  कब्रिस्तान में अशरफ खान ने देख लिया और उसी समय एक रोल ऑफर किया। कादर खान ने ऋषि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, अमजद खान, हेमा मालिनी, परवीन बाबी, अमरीश पुरी, प्रेम चोपड़ा, प्राण जैसे बड़े कलाकारों के साथ काम किया। उन्होंने परवरिश, सुहाग, शराबी, लावारिस, अमर अकबर एंथनी और मुकद्दर का सिकंदर जैसी कई हिट फिल्में दीं। कादर ने अपने फिल्मी करियर में 300 से ज्यादा फिल्में कीं।