BSNL को संजीवनी मिलने से किस ऑपरेटर पर पड़ेगा क्या असर, पढ़ें यहां पूरी खबर

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BSNL में BBNL के विलय को दी मंजूरी

केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड-बीएसएनएल में नई जान फूंकने की तैयारी में जुट गई है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 27जुलाई यानी आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में कई बड़े मुद्दे पर विचार विमर्श कर फैसला लिया गया है। साथ ही कैबिनेट और कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स को लेकर भी बड़ा फैसला हुआ है। इसके साथ ही कैबिनेट ने भारत संचार निगम लिमिटेड के रिवाइवल के लिए 1.64लाख करोड़ रुपये के रिवाइवल पैकेज को मंजूरी दे दी है और सरकार ने बीएसएनएल और भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (BBNL) के विलय को मंजूरी दी है।

कैबिनेट बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने बीएसएनएल के रिवाइवल के लिए 1.64लाख करोड़ रुपये का रिवाइवल पैकेज की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, कैबिनेट ने भारत संचार निगम लिमिटेड और भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड के मर्जर को मंजूरी दी।

गौरतलब है कि इस मर्जर से अब देशभर में बिछे BBNL के 5.67लाख किलोमीटर के ऑप्टिकल फाइबर का पूरा कंट्रोल बीएसएनएल हाथों में आ जाएगा। इसके लिए सरकार अगले तीन साल में BSNL के लिए 23हजार करोड़ रुपये का बॉन्ड जारी करेगी। वहीं सरकार MTNL के लिए 2साल में 17हजार पांच सौ करोड़ रुपये का बॉन्ड जारी करेगी। केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि ‘सरकार ने बीएसएनएल के रिवाइवल के लिए 1,64लाख करोड़ रुपये का रिवाइवल पैकेज को मंजूरी दी। इससे टेलीकॉम कंपनी को 4G में अपग्रेड करने में मदद मिलेगी।

BSNL सेवाओं में होगा विस्तार

वहीं देखा जाए तो अब इस विलय से बीएसएनएल सेवाओं के विस्तार और तेजी के साथ ही इसकी बैलेंस शीट पर दबाव कम करने और फाइबर नेटवर्क को बढ़ाने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाओं का विस्तार करने में सरकारी दूरसंचार कंपनी को मदद मिलेगी। जो आने वाले दिनों के लिए अच्छा साबित होगा। क्योंकि जिस तरह से बीएसएनएल में लगातार ग्राहकों की संख्या में कमी देखने को मिल रही थी, उससे ऐसा लग रहा था कि आने वाले समय में बीएसएलएन की हालात काफी खराब हो जाएगी।

JIo-एयरटेल जैसी कंपनियों ने बिगाड़ा BSNL का खेल!

वो भी एक समय हुआ करता था जब बीएसएनएल का टेलीकॉम सेक्टर पर राज हुआ करता था। लेकिन धीमे-धीमे प्राइवेट कंपनियों ने इस तरह से इस सेक्टर में एंट्री मारी उसके बाद से ही बीएसएनएल के ग्राहकों में कमी देखने को मिलने लगी। लेकिन अब एक बार फिर से सरकार के फैलसे के बाद से रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने 4G नेटवर्क के जरिए जिस रणनीति को अपनाया उसने BSNL का खेल और बिगाड़ दिया। क्योंकि इस विलय के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब बीएसएनएल मौजूदा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने, 4जी सेवाओं को शुरू करने और वित्तीय रूप से बेहद सक्षम होगा। सरकार के इस फैसले से उम्मीद है कि इस पुनरुद्धार योजना के लागू होने के साथ, बीएसएनएल वित्त वर्ष 2026-27 में टर्न अराउंड और लाभ हासिल करेगा।