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इस्लाम छोड़ हिंदू बने वसीम रिजवी, जानें कैसे बदला जाता है धर्म और क्या है इस पर कानून

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शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने इस्लाम छोड़ हिंदू धर्म अपना लिया है। ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल है, जैसे हिंदू बनाने कि क्या प्रक्रिया होती है? क्या किसी मंदिर में किसी संस्कार के तहत किसी और धर्म के व्यक्ति को हिंदू बनाया जा सकता है? हिंदू बनने के लिए प्रक्रिया और विधि क्या है? चलिए आज हम आपको इन सभी सवालों के जवाब देते है… सबसे पहले जान लें कि धर्म बदलने के कितने तरीके होते हैं। दरअसल, मुख्य तौर पर धर्म बदलने के दो तरीके हैं। पहला 'कानूनी' और दूसरा 'धार्मिक स्थल पर जाकर धर्म बदलना'

 

क्या है कानूनी तरीका

सबसे पहले धर्म को बदलने का एक एफिडेविट बनवाना होता है। इसे शपथपत्र भी कहते हैं। इसे कोर्ट में वकील तैयार करवा देता है। इसमें अपना बदला हुआ नाम, बदला हुआ धर्म और अड्रेस लिखना होता है। इसमें एड्रेस प्रूफ और पहचान पत्र भी देना होता है। इसे नोटेरी अटेस्ट करवाया जाता है।

फिर किसी राष्ट्रीय दैनिक अखबार में अपने धर्म परिवर्तन की जानकारी का विज्ञापन प्रकाशित करना होता है।

सरकारी तौर पर इसे दर्ज करने के लिए गजट ऑफिस में आवेदन करना होता है। हर प्रदेश का अपना गजट ऑफिस होता है। आमतौर पर ये काम जिलाधिकारी कार्यालयों से होता है। इसमें कई डाक्युमेंट्स और पासपोर्ट साइज की फोटो लगती है।

आवेदन करने के बाद सरकारी प्रक्रिया पूरी होने में 60 दिन का समय लग सकता है। नया नाम धर्म के साथ गजट में दर्ज हो जाता है।

 

कैसे धार्मिक स्थल पर बदला जाता है धर्म

इसमें हर धर्म के धार्मिक स्थल और संस्थान अपने हिसाब से कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।

अगर कोई हिंदू धर्म ग्रहण करना चाहे तो इसके लिए आधिकारिक तौर पर हर मंदिर में कोई सिस्टम नहीं है।

मंदिर के पुजारी इच्छुक शख्स का शुद्धिकरण संस्कार करके उसे हिंदू बना सकते हैं।

 

क्या है धर्म परिवर्तन पर कानून

भारत धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है। कानून कहता है कि हर किसी को अपनी पसंद के धर्म का चयन करने के लिए स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए। भारतीय संविधान सभी व्यक्तियों को किसी भी धर्म का प्रचार और अभ्यास की आजादी देता है। लेकिन धर्म परिवर्तन समाज और राजनीति में सबसे गर्म मुद्दों में है।