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America-Japan के झटके से कराह उठा चीन, जंग के डर से देने लगा धमकियां

China on America And Japan

China on America And Japan: दुनिया के कुछ ही ऐसे देश होंगे जो चीन से परेशान न हो। सिर्फ वही देश जिनकी चीन के साथ अच्छी बनती है। जिसमें दो-तीन देश ही शामिल हैं। चीन वो देश है जो अपने दोस्तों तक को नहीं छोड़ता। चीन से सीमा साझा करने वाले देश तो परेशान हैं ही साथ ही वो भी जो इससे सीमा साझा नहीं करते। अमेरिका और चीन (China on America And Japan) की दुश्मनी काफी पुरानी है। अमेरिका और जापान ने मिलकर जब चीन की दुखती रग पर हाथ रखा तो दर्द से ड्रैगन कराह उठा। अमेरिका और जापान के पूर्वी एशिया के सैन्यीकरण से ड्रैगन घबराया हुआ है। ये वो चीन है जो ताइवान को घेर कर युद्धभ्यास कर रहा था। जो जापान के क्षेत्रों में अवैध रुप से घुस आता है। जो दक्षिण चीन सागर में अपनी दादागीरी दिखाता है। चीन को बोलते हुए शर्म आनी चाहिए। खैर पाकिस्तान के बाद चीन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बेशर्म देश है। चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और जापान (China on America And Japan) से काल्पनिक दुश्मन बनाने से बचने और इलाके को जंग के अखाड़े में बदलने से बचने को कहा है। साथ ही ड्रैगन इन देशों को शीत युद्ध की मानसिकता से बाहर आने के लिए कहा है। ये ताइवान और हॉन्ग-कॉन्ग को हड़पने की मंसा रखने वाला चीन बोल रहा है। इतना ही नहीं, चीन ने अमेरिका से अपन वैचारिक पूर्वाग्रह को छोड़ने के लिए भी कहा।

अमेरिका-जापान ने मिलकर घेरा तो भड़क उठा चीन
दरअसल, चीन और जापान के बीच पूर्वी चीन सागर में द्वीपों को लेकर विवाद है। वहीं, चीन और अमेरिका ताइवान, तिब्बत, हॉन्ग कॉन्ग, उइगर और दक्षिण चीन सागर के सैन्यीकरण को लेकर आमने-सामने हैं। जापान और अमेरिका इन दिनों एक बड़े नौसैनिक अभ्यास को अंजाम दे रहे हैं। चीन इसी को लेकर चिढ़ा हुआ है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने एक नियमित प्रेस वार्ता में कहा कि इंडो पैसिफिक शांति और विकास का केंद्र है। यह किसी भूराजनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए कुश्ती का मैदान नहीं है। इस क्षेत्र के देश न्याय के लिए हैं और अधिपत्य के खिलाफ हैं। वे सहयोग में भागीदार बनने की उम्मीद करते हैं, टकराव के नहीं। वे सच्चे बहुपक्षवाद की आकांक्षा रखते हैं और गोलबंदी को अस्वीकार्य करते हैं। वांग ने अमेरिका और जापान से चीन के खिलाफ शीत युद्ध की मानसिकता और वैचारिक पूर्वाग्रह को त्यागने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका, चीन को काल्पनिक दुश्मन बनाना बंद करे और एशिया प्रशांत में एक नए शीत युद्ध का बीज बोने की कोशिश करना बंद करे।

अमेरिका-जापान के संयुक्त बयान को भी ड्रैगन ने किया खारिज
चीन इतना ज्यादा अमेरिका और जापान से चिढ़ा हुआ है कि, वो दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों की बैठकों के बाद वाशिंगटन में यूएसजजापान सुरक्षा सलाहकार समिति के 11 जनवरी को जारी संयुक्त बयान को भी खारिज कर दिया। इसमें चीन पर आरोप लगा था कि, वर वर्ल्ड ऑर्डर को बदलने और पूर्वी चीन सागर में ताकत के दम पर एकतरफा स्थिति को बदलने का प्रयास कर रहा है। चीन इतना चिढ़ा हुआ है कि, वांग इस संयुक्त बयान को लेकर बोल रहे हैं कि, शीत युद्ध मानसिकता की भारी बू आ रही है। वांग का कहना है कि, अमेरिका और जापान क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को आगे बढ़ाने का दावा करते हैं, लेकिन वे सैन्य निर्माण और ताकत के जानबूझकर उपयोग के बहाने खोजने में व्यस्त हैं। इसके आगे चीनी प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका और जापान एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक का दावा करते हैं, लेकिन विभाजन और टकराव पैदा करने के लिए विभिन्न ब्लॉक बनाते हैं।

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