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FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए हाथ जोड़ कर खड़े हैं Imran Khan! बोले- बस एक बार…

फिर FATF की ग्रे लिस्ट से Pakistan नहीं आ पाएगा बाहर

पाकिस्तान इस वक्त कंगाली के राह पर है जिसके लिए वो लगातार चीन, दुबई से कर्जा ले रहा है। अब तो वो रूस की भी शरण में जा पहुंचा है। पाकिस्तान की ये हालत उसके अपने ही कर्मों की सजा है। आतंकियों के चलते पाकिस्तान हमेशा ही मुश्किलों में रहा है। अब एक बार फिर से उसकी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। खबरों की माने तो जून तक फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF की ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान बना रहेगा और इसके बाद भी वो इस लिस्ट से बाहर हो जाए उसकी कोई उम्मीद नहीं है।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स की ही माने तो, अतिरिक्त मानदंडों के तहत कुछ लक्ष्य अधूरे रह गए हैं। पेरिस स्थित वैश्विक संस्था एफएटीएफ धनशोधन और आतंकी वित्तपोषण की निगरानी करती है। शुक्रवार को यानी आज इसकी एक बैठक होनी है। निर्धारित लक्ष्यों को अक्टूबर 2019 तक पूरा करने के लिए उसे एक कार्य योजना दी गई थी। पाकिस्तान के अखबार 'द डॉन' के अनुसार FATF की पूरक बैठक का समापन सत्र शुक्रवार को होना है और इसके एजेंडे में पाकिस्तान की प्रगति की समीक्षा शामिल है। अखबार के अनुसार, पाकिस्तान अब जनवरी 2023 के अंत तक धनशोधन और आतंकी वित्तपोषण से निपटने से जुड़ी 2021 की कार्य योजना को पूरा करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।

बता दें कि, अक्टूबर 2021 में FATF ने अपनी 27 सूत्री कार्य योजना के 26 बिंदुओं पर पाकिस्तान के प्रगति करने की बात स्वीकार की थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा प्रतिबंधित आंतकी सूमहों के शीर्ष कैडर के खिलाफ आतंकी फंडिंग की जांच और अभियोजन को लेकर उसने इस्लामाबाद को अपनी ग्रेस लिस्ट में बरकरार रखा था।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नई कार्य योजना के साथ सूत्रों में से चार को या तो पूरा कर लिया गया है या फिर उनमें प्रगति हुई है। इसमें कहा गया है कि अक्टूबर 2021 में FATF ने यह कहते हुए पाकिस्तान को उसकी कार्य योजना के शेष बिंदुओं को जल्द से जल्द संबोधित करने की कोशिशें जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया था कि आतंकी वित्तपोषण की जांच और अभियोजन यूएन द्वारा प्रतिबंधित शीर्ष आतंकी कमांडरों को निशाना बनाता है। ग्रे लिस्ट में जाने से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और यूरोपीय संघ से वित्तीय मदद हासिल करना मुश्किल होता जाता है। यही वजह है कि पाकिस्तान को लगातार आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, इसके बाद भी पाकिस्तान आतंकियों पर नकेल कसने से नाकमयाब रहा है।