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पहले खर्चे कम करो…तंगहाल पाकिस्तान को IMF से लोन न मिलने पर अमेरिका ने भी लताड़ा

joe Biden and Shehbaz sharif

पाकिस्तान (Pakistan) आज जिस हाल में है वो उसका खुद का बनाया हुआ है। मुल्क जल्द ही डिफॉल्ट होने की कगार पर पहुंच गया है। पाकिस्तान के पास खाने के लाले पड़े हुए हैं। उसके कई बड़े उद्योग बंद होने के कगार पर हैं। खासकर टेक्स्टाइल इंडस्ट्री कुछ ही दिनों में बंद हो सकती है। इसके साथ ही अन्य कई क्षेत्रों का भी यही हाल है। अब जिन्ना का देश महाकंगाल हो गया है। क्योंकि, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार गिरते-गिरते अब पाताल तक पहुंच गया है। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से आईएमएफ से लोन हासिल करने के लिए तमाम मिन्नतें की जा रही हैं, लेकिन अब तक वह सफल नहीं हो सका है। इतना नहीं नहीं पिछले महीने तो खुद IMF की टीम खुद इस्लामाबाद में करीब 10 दिनों तक रही और तमाम फाइलें खंगालने के बाद भी आगे बातचीत भर भरोसा देकर चली गई।

अब पाकिस्तान के पास जब कोई विकल्प नहीं रहा तो आर्थिक संकट से निपटने के लिए आईएमएफ की मदद के इंतजार में ही है। इस बीच अमेरिका ने भी उसे नसीहत दी है कि आईएमएफ से लोन लेने के लिए उसे खुद में सुधार करना होगा। इस सवाल के पूछे जाने पर की IMF पर अमेरिका का अच्छा प्रभाव है, फिर भी पाकिस्तान को लोन क्यों नहीं मिल रहा?

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इस बात पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि आखिर पाकिस्तान को ही फैसला लेना होगा कि वह कैसे आईएमएफ से मदद ले सकता है। उन्होंने कहा, ‘हम पाकिस्तान से कहेंगे कि वह आईएमएफ के साथ मिलकर काम करे। खासतौर पर अपने यहां कारोबारी माहौल में सुधार करे।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान यदि अपने यहां निवेश आकर्षित करना चाहता है तो फिर उसे कारोबारी माहौल को प्रतिस्पर्धी बनाना होगा।

इसके अलावा जब नेड प्राइस से यह सवाल पूछा गया था कि क्या चीन और अमेरिका के बीच तनाव चल रहा है। इस वजह से वह आईएमएफ (IMF) के जरिए पाकिस्तान को मदद नहीं मिलने दे रहा है। इस बात पर उनका कहना था कि हम तो पाकिस्तान के दशकों से साझीदार हैं। उसकी आजादी के बाद से ही हम उसका साथ दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा विदेशी निवेश मिले, उससे हम जरूरत यह है कि तकनीकी विकास हो।

पाकिस्तान के लिए क्या है ज्यादा जरूरी

अमेरिकी प्रवक्ता का कहना है कि पाकिस्तानी कंपनियां यदि प्रतिस्पर्धी होंगी तो विदेशी संस्थाएं उनके साथ साझेदारी करेंगे। इससे आर्थिक ग्रोथ में इजाफा होगा। रोजगार बढ़ेगा और हर परिवार की कमाई बढ़ेगी। संकट को समाप्त करने का यही अच्छा तरीका हो सकता है।