Pakistan ने फिर दिखाया अपना असली रंग, India को लेकर भागते हुए UN के पास पहुंचे बिलावल भुट्टो

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अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा पाकिस्तान, कश्मीर मुद्दा लेकर फिर पहुंचा UN के पास

पाकिस्तान के भारत संग क्या रिश्तें हैं यह किसी से छुपा नहीं है और इसका कारण भी पाकिस्तान ही रहा है। भारत ने कई बार पाकिस्तान संग रिश्ते सुधारने की कोशिश की लेकिन, पाकिस्तान ये कभी नहीं चाहता। भारत पर लगातार बयानबाजी करने वाले पाकिस्तान एक हाथ सो मदद मांग रहा है और दूसरी ओर वो पीठ में खंजर घोंप रहा है। कांगाली के आलम में पाकिस्तान का साथ तो चीन ने भी छोड़ दिया है। जब पाकिस्तान ने चीन से कहा कि देश में बिजली की सप्लाई बढ़ा दी जाए तो उसके सदाबहार दोस्त ने यह कह दिया कि पहले बकाया पैसा जम करो वरना पूरा मुल्क अंधेरे में रहेगा। इसके बाद पाकिस्तान को भारत की याद आई है। लेकिन, यहां भी वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।

दरअशल, पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो एक बार फिर से भागते हुए यूएन के पास कश्मीर मुद्दा लेकर पहुंच गए हैं। भुट्टो ने संयुक्त राष्ट्र (United Nation) के शीर्ष अधिकारियों को एक पत्र लिखकर कश्मीर मुद्दे को उठाया है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बुधवार इसकी जानकारी दी। विदेश कार्यालय ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र महासचिव को संबोधित पत्र 10 मई को भेजा गया है। उसने कहा कि दोनों को लिखा पत्र उन्हें विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय परिवर्तन करने के भारत के कथित प्रयास से अवगत कराता है।

विदेश कार्यालय ने कहा कि मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि इन अवैध कदमों से अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन होता है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर और जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर संबंधित सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव शामिल हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अवैध परिसीमन के गंभीर प्रभावों का तत्काल संज्ञान लेने और भारत को यह याद दिलाने का आग्रह किया कि कश्मीर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य एक लंबित मुद्दा है जिसका समाधान अभी होना है तथा उसे किसी भी जनसांख्यिकीय परिवर्तन से बचना चाहिए। बिलावल के पूर्ववर्ती शाह महमूद कुरैशी ने भी अपने कार्यकाल के दौरान संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों को कई पत्र लिखे थे, जिसमें कश्मीर मुद्दे पर प्रकाश डाला गया।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्पष्ट रूप से कहा है कि अनुच्छेद 370 को खत्म करना उसका आंतरिक मामला है। इसने पाकिस्तान को वास्तविकता को स्वीकार करने और भारत विरोधी सभी दुष्प्रचार को रोकने की भी सलाह दी। भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि वह आतंकवाद, शत्रुता और हिंसा से मुक्त वातावरण में इस्लामाबाद के साथ सामान्य पड़ोसी संबंध चाहता है। अब पाकिस्तान को पहले यह तय कर लेना चाहिए कि वो भारत संग व्यापारिक रिश्ते रखना चाहता है या फिर अपने पुराने रवैये पर टिका रहेगा। अगर कश्मीर की इतनी पड़ी है तो पहले बलूच और Pok के लोगों की जिंदगी के बारे में सोचे। यहां के लोग अपने मूल जिवन के लिए तरस रहे हैं। यहां न तो शिक्षा के लिए कोई संस्थान है और ना ही कोई अस्पताल। यहां तक की यहां को लोगों के लिए तो नौकरी तक नहीं है। पाकिस्तान को पहले अपने कंगाली पर ध्यान देना चाहिए।