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इमरान खान के मुल्क के हालात अफगानिस्तान से भी खराब, किसी भी समय 4-5 टुकड़ों में टूट सकता है पाकिस्तान!

पाकिस्तान पर टूटने का खतरा बढ़ा!

यह ऊपर वाले का रहम है या फिर ऊपर वाला पाकिस्तान का हाल अफगानिस्तान से भी बतदतर करना चाहता है। अपने कुकर्मों की मुकम्मल सजा पाने के लिए पाकिस्तान का वजूद अभी तक बचा हुआ है। 10 साल पहले पाकिस्तान पर 6 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज था जो इस समय 30 ट्रिलियन डॉलर हो चुका है। हालात तो ऐसे हैं कि पाकिस्तान के अब तक चार से पांच टुकड़े हो जाने चाहिए थे।

पाकिस्तान की इमरान सरकार के पास पैसे नहीं हैं। फौज के पास गोला-बारूद नहीं हैं, हिम्मत और जज्बा नहीं और पाकिस्तान के आवाम के पास धैर्य नहीं है। ‘नाबीना’ हो चुकी पाकिस्तान की इमरान सरकार कायद-ए-आजम का चश्मा भी नहीं बचा सकी। चोर चुराकर ले गए जिन्ना का चश्मा। वैसे पाकिस्तानियों ने जिन्ना को उसके कर्मों की सजा उसके जिंदा रहते ही दे दी थी। यह सजा कैसे-कैसे दी, ज्यादातर लोग जानते ही हैं। जिन्ना ने पाकिस्तान को संविधान बनाया पाकिस्तानियों ने उसे ही नेस्तनाबूद कर दूसरा संविधान खड़ा कर दिया। बहुत कम लोग जानते हैं कि जिन्ना ने पाकिस्तान का पहला संविधान एक हिंदू जोगिंदर नाथ मण्डल से लिखवाया था। बाद में लौट के बुद्धू घर को आए वाली कहावत को दोहराते हुए जोगिंदर नाथ मण्डल को जान बचाकर वापस भारत भागना पड़ा था।

बहरहाल, इस कहानी को बताने से पहले यह बताना जरूरी है कि अखण्ड भारत का हिस्सा रहे पाकिस्तान के हालात इंडियन सब-कॉंन्टिनेंट में सबसे गई-गुजरी हो चुकी है। कथित परमाणु ताकत पाकिस्तान में नेपाल-भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका ही नहीं बल्कि अफगानिस्तान से ज्यादा गंभीर स्थिति है। पाकिस्तान की करैंसी युद्धग्रस्त-अशांत अफगानिस्तान की करैंसी के मुकाबले कमजोर और अस्थिर है।

सर्बिया स्थित पाकिस्तान के दूतावास के कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन न मिलने का मामला सामने आया, जिसने एक बार फिर पाकिस्तान में आर्थिक तंगी के हालात को जगजाहिर कर दिया। सर्बिया में पाकिस्तानी दूतावास के टि्वटर हैंडल से पाकिस्तान की आर्थिक परिस्थितियों को दुनिया के सामने रख दिया गया। यह ट्वीट प्रधानमंत्री इमरान खान को भी टैग किया गया था। जिसमें कहा गया कि तीन महीने से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों के बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया है।

पाकिस्तान बढ़ती महंगाई दर, खाली होते विदेशी मुद्रा भंडार, चालू खाते में घाटे के बढ़ते दबाव और पाकिस्तानी मुद्रा ‘रुपया’ की पतली होती हालत से जूझ रहा है। बीते अक्तूबर में पाकिस्तान में तेल की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि की गई थी। बीते 24 नवंबर को प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि उनके पास मुल्क चलाने के लिए पैसे नहीं हैं और कर्ज बढ़ता जा रहा है। थर्ड वर्ल्ड कंट्रीज की अर्थव्यवस्थाओं पर नजर रखने वाली संस्था एशियन डेवलपमेंट आउटलुक के अनुसारपाकिस्तान की इस साल महंगाई दर 8.9प्रतिशत है जो कि इस क्षेत्र के आठ देशों में सबसे ज्यादा है। इसके मुकाबले भूटान में 8.2%,बांग्लादेश में 5.6%,  भारत में मंहगी 5.5%, अफगानिस्तान में 5%, श्रीलंका में महंगाई दर 5.1%, नेपाल 3.6%औरमालद्वीव में 2.5%है।