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मरते वक्त Pakistan की मिट्टी भी नसीब नहीं हुई Pervez Musharraf को!

कारगिल के खलनायक –  पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह सेना अध्यक्ष और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का दुबई में निधन हो गया। वो स्वनिर्वसन में रह रहे थे और काफी समय से गंभीर तौर पर बीमार थे। परवेज मुशर्फ ने नवाज शरीफ का तख्ता पलट कर पाकिस्तान की सत्ता पर कब्जा कर लिया था। कारगिल हमले से पहले भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी सद्भावना बस लेकर पाकिस्तान गए थे। ठीक उसी के बाद पाकिस्तानी सेना ने कारगिल में हमला कर दिया था।

भारत के साथ शत्रुता पूर्ण व्यवहार करने वाले परवेज मुशर्रफ की जान एक बार भारतीय एजेंसियों ने ही बचाई थी। हालांकि कहीं इस तथ्य के सबूत नहीं हैं लेकिन ऐसा कहा जाता है कि जिस रास्ते से परवेज मुशर्रफ का काफिला गुजरने वाला था उसक आतंकियों ने एम्बुश लगा रखा था। समय बहुत कम बचा था लेकिन तत्काल जैसे ही भारतीय एजेंसियों को पता चला कि परवेज मुशर्फ के काफिले पर हमला होने वाला है वैसे ही परवेज मुशर्रफ तक जानकारी पहुंचाई गई और परवेज मुशर्रफ ने अपने काफिले रुख आखिरी लम्हों में चेंज कर दिया। इस तरह परवेज मुशर्रफ की जान बच गई।

गद्दारी पाकिस्तानी शासकों के रग-रग में बसी हुई है। इसी कारण है कि परवेज मुशर्रफ ने जान बचाजाने के बावजूद भारत के खिलाफ जहर उगलना जारी रखा।

बहुत कम लोग जानते होंगे कि परवेज मुशर्रफ मुशर्रफ की पैदाइश दिल्ली की है। 11 अगस्त 1943 को दरियागंज में उनका जन्म हुआथा।  भारत यात्रा के दौरान परवेज मुशर्रफ उस हवेली को देखने भी गए थे जिसमें उनका जन्म हुआ था। उनका पूरा परिवार पाकिस्तान परस्त था। वो सभी लोग बंटवारे से पहले ही पाकिस्तान चले गए थे।