Pakistan के सदर नहीं Imran Khan की कठपुतली हैं आरिफ अलवी, नई कैबिनेट को शपथ दिलाने से किया इंकार

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Pakistan के कठपुतली प्रेसिडेंट आरिफ अलवी

पाकिस्तान की नेशनल असैंबली में इमरान खान को कुर्सी से उखाड़ फेंकने को पीटीआई कबूल नहीं कर रही है। नेशनल असैंबली के स्पीकर, डिप्टी स्पीकर और अब राष्ट्रपति भी पाकिस्तान के सदर के बजाए पीटीआई के वर्कर के तौर पर अपना रवैया दिखा रहे हैं। यह पाकिस्तान ही है जहां डेमोक्रैसी की शक्ल में डिक्टेटरशिप चल रही है। जहां डिक्टेटर के तौर पर अपदस्थ पीएम इमरान खान हैं और राष्ट्रपति आरिफ अलवी और दीगर संवैधानिक पदों पर बैठे लोग मुल्क के लिए नहीं बल्कि अभी तक इमरान खान के ही इशारों पर काम कर रहे हैं।

अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान की मंशा है कि किसी भी तरह शहबाज शरीफ की सरकार को गैर जायज ठहराकर मुल्क में प्रेसिडेंट रूल लागू करवा दिया जाए। इसी बीच कोई चुनी हुई सरकार न होने का फायदा उठा कर राष्ट्रपति आरिफ अलवी इमरान खान के चहेते जनरल को आर्मी चीफ बना दें फिर उसकी मदद से पाकिस्तान की सत्ता पर फिर से कब्जा कर सकें और शरीफ-जरदारी खानदान को जेल की सलाखों के पीछे डाल दे। 

इसका ताजा उदाहरण नए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के मंत्रिण्डल के सदस्यों को शपथ दिलाने से आरिफ अलवी ने इंकार कर दिया। इससे पहले आरिफ अलवी ने पीएम शहबाज शरीफ को भी शपथ दिलाने से ठीक पहले ट्वीट कर दिया कि उनके दांत में दर्द है और वो शपथ दिलाने में असमर्थ हैं। उनकी गैर मौजूदगी में सीनेट के अध्यक्ष सादिक संजरानी ने उन्हें पीएम पद की शपथ दिलाई थी।

अब भी यही समझा जा रहा है कि सादिक संजरानी ही शहबाज शरीफ के मंत्रिमंडल को शपथ दिला सकते हैं। शहबाज शरीफ के मंत्रीमण्डल को शपथ दिलाने का प्रोग्राम सोमवार को तय था लेकिन राष्ट्रपति आरिफ ने ऐन मौके पर मना कर दिया। अब समझा जा रहा है कि आज मंगलवार या फिर बुधवार को किसी समय शपथ ग्रहण हो सकता है।

पाकिस्तान के संवैधानिक पदों पर बैठे इमरान खान की पार्टी पीटीआई के ओहदेदारों के सियासी ड्रामे की दुनियाभर में मजाक बनाई जा रही है। लेकिन इमरान खान और उनके पार्टी वर्कर्स पर कोई असर नहीं हो रहा है। पाकिस्तान की मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति आरिफ अलवी को सियासी वर्कर की हैसियत से नहीं बल्कि पाकिस्तान के सर्वोच्च पद पर बैठे संवैधानिक अधिकारी की हैसियत से अपनी ड्यूटी निभानी चाहिए। क्यों कि राष्ट्रपति, नेशनल असैंबली के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के पद पर नियुक्ति से पहले वो किसी भी पार्टीके ओहेददार हो सकते हैं लेकिन जब वो अपने ओहदे का हलफ उठा लेते हैं तो वो किसी एक पार्टी के वर्कर न होकर पूरे मुल्क के कस्टोडियन हो जाते हैं। मुल्क के कस्टोडियन का सियासी वर्कर की तरह काम करना पाकिस्तान की डेमोक्रैसी के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

डॉक्टर आरिफ अलवी के इस रवैये से यह तय हो चुका है कि पीएम शहबाज शरीफ और उनके सहयोगी, राष्ट्रपति के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाकर नए राष्ट्रपति का चुनाव कर सकते हैं। शहबाज शरीफ को अब यह पक्का विश्वास हो चला है कि मंहगाई और बेरोजगारी के खिलाफ उनकी सरकार जो भी नए कानून बनाएगी उन्हें आरिफ अलवी मंजूरी नहीं देंगे। पाकिस्तान को चलाने और नए नियम बनाने के लिए शहबाज शरीफ को ऐसे राष्ट्रपति की जरूरत होगी जो उन्हें अतिरिक्त सहयोग करे या न करे लेकिन उनके कामों में अड़ंगे न अटकाए।