पूरी दुनिया से आतंकी Yasin Malik को बचाने के लिए गिड़गिड़ा रहा पाकिस्तान, शाहबाज शरीफ बोले- कोई तो पीएम मोदी को रोक ले

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आतंकी Yasin Malik को बचाने के लिए गिड़गिड़ा रहा पाकिस्तान

जम्मू कश्मीर में एक समय था जब यहां पर जमकर खून की नदियां बहाई गई। कश्मीर पंडितों को ही उनके घरों से बाहर कर दिया गया और पूरे घाटी में जेहाद का कब्जा हो गया। घाटी में जेहाद फैलान में सबसे बड़ा हाथ पाकिस्तान का रहा और उसे साथ दिया घाटी के ही कुछ लोगों ने। जिनपर जम्मू-कश्मीर के लोगों ने भरोसा कर अपना नेता चुना। कुछ नेताओं ने घाटी के लोगों को धोखा देते हुए जमकर कश्मीर में आंतक फैलाया। जिसमें से एक है अलगाववादी नेता यासीन मिलक जिसने स्वीकार कर लिया है कि वो आतंकियों के साथ मिला था। पाकिस्तान इसी आतंकी को बचाने पर लगा हुआ है। यहां तक की खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ दुनिया के सामने गिड़गि़डा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर के प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक को NIA कोर्ट ने टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराया है। मलिक ने भी अपना गुनाह कुबूल कर लिया है, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान को ये हजम नहीं हो रहा है। दरअसल, यासीन और इसी की तरह कुछ और नेताओं के इस्तेमाल से पाकिस्तान घाटी में आतंकवाद को फैलाते था। ऐसे में यह पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है और जैसे ही मलिक को दोषी ठहराए गया पाकिस्तान पूरी तरह बौखला गया है। वह दुनिया के सामने यासीन को सियासी कैदी बता रहा है। इतना ही नहीं उसने मानवाधिकारों का हवाला देते हुए दुनिया के अन्य देशों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोषी ठहराए जाने की अपील तक कर डाली है।

यहा तक की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने का है कि, दुनिया को जम्मू और कश्मीर में सियासी कैदियों के साथ भारत सरकार के रवैये पर ध्यान देना चाहिए। प्रमुख कश्मीरी नेता यासीन मलिक को फर्जी आतंकवाद के आरोपों में दोषी ठहराना भारत के मानवाधिकारों के उल्लंघन की आलोचना करने वाली आवाजों को चुप कराने की कोशिश है। मोदी सरकार को इसके लिए दोषी ठहराया जाना चाहिए।

यासीन मलिक ने खुद स्वीकार किया है कि वो पाकिस्तान के 20 आतंकी संगठनों के साथ संपर्क में है और इसके साथ ही कई आतंकी घटनाओं में भी लिप्त था। जाहिर है कि अब पाकिस्तान से भी जुड़ी कई राज खुलेंगे तो ऐसे में पाक सरकार यासीन को बचाने के लिए जमकर कोशिशें कर रही है। यहां तक फैसला सुनाते ही पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने दूतावास अधिकारी को आपत्तियों से जुड़ा एक दस्तावेज (डिमार्शे) सौंपा, जिसमें यासीन मलिक के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाए जाने की कड़ी निंदा की गई थी।