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वैशाख पूर्णिमा के विशेष दिन पीपल के वृक्ष की पूजा के पीछे का रहस्य? इन चीजों से मिलेगी मुक्ति

Peepal Worship Benefits

हिन्दू धर्म में पूर्णिमा का बेहद खास महत्व माना जाता है। वैशाख महीने में आने वाली इस पूर्णिमा को वैशाख पूर्णिमा व बुध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस साल ये पूर्णिमा 16मई को होगी। इसी दिन इस बार पूर्ण चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। ऐसे में पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें, पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है। इस दिन पीपल की पूजा का भी खास महत्व बताया गया है।

शास्त्रों के मुताबिक वैशाख पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करना बेहद लाभकारी माना जाता है। कहा जाता है इस विशेष दिन पीपल की पूजा करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। साथ ही पितर भी शांत हो जाते हैं। यही नहीं कहा जाता है, इस दिन पेड़ लगाने से  ग्रह का अशुभ फल भी कम होता है। तो चलिए आपको बतातें हैं इस दिन पीपल की पूजा करने के कुछ गजब के लाभ।

पीपल के पेड़ की पूजा करने से होंगे ये फायदे

 -वैशाख पूर्णिमा के खास दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने से कुंडली में शनि, गुरु व अन्य ग्रह से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

– वैशाख पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से मुश्किल से मुश्किल कार्य को सफल किया जा सकता है। दरअसल, पीपल के पेड़ में तीन देवताओं- ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास होता है। इस दिन सुबह उठकर पीपल पर  जल अर्पित करने, पूजा करने और दीपक जलाने से तीनों देवताओं की कृपा आपके ऊपर बनी रहती है।  

– पितर को संतुष्ट करने व उनकी कृपा पाने के लिए के लिए इस दिन पीपल के पेड़ पर पानी में दूध और काले तिल मिलाकर अर्पित करें। मान्यता यह भी है कि पीपल के पेड़ पर सुबह के वक्त पितरों का वास होता है।  

-शास्त्रों में लिखा है कि सूर्योदय के बाद मां लक्ष्मी का वास शुरू हो जाता है। परन्तु, सूर्योदय के बाद पीपल की पूजा की जा सकती है क्योंकि ऐसा करने से परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।

-वैशाख पूर्णिमा पर सभी शुभ काम किये जा सकते हैं। क्योंकि इस दिन अबूझ साया होता है। बता दें,  सुबह पीपल के पेड़ की पूजा करने के बाद दिन में किसी भी समय कोई भी मांगलिक कार्य किया जा सकता है।

–  इन सब चीजों के अलावा यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में विधवा योग बन रहा है तो पहले पीपल या घड़े से शुभ लग्न में उसकी शादी करवाने से उसका वैधव्य योग खत्म हो जाता है। बताया जाता है ऐसा करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव भगवान विष्णु ग्रहण कर लेते हैं।