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बौखलाए चीन के इरादे खतरनाक! ड्रैगन ने पाकिस्‍तान के साथ की परमाणु प्‍लांट डील

Pakistan China Vs India

चीन (china) उनमें से जो सिर्फ अपना फायदा चाहता है। अब एक बार फिर चीन को मिर्ची लग रही है। दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती दोस्‍ती और पीएम नरेंद्र मोदी के वॉशिंगटन दौरे पर जाने से चीन के लिए रोटी हजम कर पाना बेहद मुश्किल सा हो रहा है। ऐसे में अब बौखलाए चीन ने एक साथ दो भारत विरोधी कदम उठाए हैं। चीन ने कंगाल हो चुके पाकिस्‍तान के साथ विशल परमाणु बिजली प्‍लांट पर समझौता किया है। पाकिस्‍तान के पास जनता को खिलाने के लिए पैसे नहीं हैं और इसके बाद चीन 4.8 अरब डॉलर की लागत से परमाणु बिजली प्‍लांट बनवा रहा है। वहीं चीन ने मुंबई आतंकी हमलों में शामिल लश्‍कर आतंकी साजिद मीर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने के भारत के संयुक्‍त राष्‍ट्र में पेश किए गए प्रस्‍ताव को रोक दिया है। इतना ही नहीं चीन का सरकारी भोंपू ग्‍लोबल टाइम्‍स भी पीएम मोदी की यात्रा को लेकर तिलमिलाया हुआ है और जहरीले बयान दे रहा है। विश्‍लेषक इसे चीन के नापाक प्‍लान का हिस्‍सा मानते हैं।

चीन ने पाकिस्‍तान के साथ जो परमाणु समझौता किया है, उसके तहत 1200 मेगावाट के परमाणु बिजली प्‍लांट को लगाया जाएगा। इस बिजली प्‍लांट का नाम चश्‍मा 5 होगा और इसे पंजाब प्रांत के मियांवाली जिले में बनाया जाएगा। चीन इसके पहले भी 4 परमाणु बिजली घर बना चुका है। चीन परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) का सदस्‍य देश है और बिना उसकी मंजूरी के ही पाकिस्‍तान के साथ 5वां परमाणु बिजली प्‍लांट बनवा रहा है।

NSG के नियमों को ताक पर रख पाकिस्‍तान की मदद

चीन का कहना है कि एनएसजी ने भारत-अमेरिका को इस तरह की डील की छूट दी है। चीन ने इस डील का विरोध किया था लेकिन फिर भी भारत को छूट मिल गई थी। चीन भारत की इसी डील का उदाहरण पाकिस्‍तान जैसे कंगाल मुल्‍क को परमाणु बिजली प्‍लांट देने पर न्‍यायोचित ठहराने के लिए दे रहा है। यह एनसीजी के कानून के मुताबिक अवैध है लेकिन चीन भारत के दुश्‍मन पाकिस्‍तान की परमाणु तकनीक में मदद कर रहा है।

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दरअसल, चीन अपने बेल्‍ट एंड रोड परियोजना के लिए 65 अरब डॉलर का निवेश पाकिस्‍तान में कर रहा है। पाकिस्‍तान इस कर्ज को आईएमएफ से लोन लेकर चुका रहा था। यही वजह है कि आईएमएफ ने अब लोन देने से किनारा कर लिया है। चीन अब पाकिस्‍तान को न केवल लोन देकर डिफॉल्‍ट होने से बचा रहा है, बल्कि अत्‍याधुन‍िक तकनीक भी दे रहा है। चीन ईरान के साथ डील करा रहा है ताकि बलूच विद्रोहियों का खात्‍मा क‍िया जा सके जो सीपीईसी परियोजना का विरोध कर रहे हैं।