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दुनिया को रहना होगा खबरदार! किसी भी वक्त आतंकियों के हाथ लग सकता है पाकिस्तान का परमाणु हथियार

दाऊद इब्राहिम आतंकियों के हाथ में परमाणु हथियार देने की रच रहा साजिश

आतंकियों को पाल पोस कर बड़ा करने वाले पाकिस्तान की इस वक्त हलात यह है कि उसके ही पाले गए आतंकी उसे काटने के लिए दौड़ रहे हैं। इस वक्त पाकिस्तान में आतंकियों का बोल-बाला बढ़ता जा रहा है। हाल ही में चरमपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के आगे झुकना पड़ा और अब दाऊद इब्राहिम आने वाले दिनों में पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा बनने वाला है। क्योंकि इस वक्त दाऊद ऐसी चाल चल रहा है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार आतंकियों के हाथ लग जाए।

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भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम की आतंकवादी संगठनों से सांठगांठ और पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की कालाबाजारी परमाणु वैज्ञानिक ए.क्यू. खान के लिए 2009 में मुंबई में 26/11 हमलों के बाद अमेरिकी सीनेट की सुनवाई में चिंता का विषय बन गई थी। उस समय की सुनवाई के दौरान, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए मुंबई हमलों से सबक पर सीनेटर जॉन मैक्केन ने कहा था, यह एक खतरा है कि पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी संगठन परमाणु हथियार प्राप्त करने में सक्षम हो सकते हैं। हम सभी जानते हैं कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार है।

आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञ का कहना है कि, मुझे लगता है कि यह एक वास्तविक चिंता है। हमें पाकिस्तानी अधिकारियों से नियमित रूस से आस्वासन मिलता है कि उनके पास परमाणु हथियार कड़े नियंत्रण में हैं, लेकिन चिंता की बात तो है। इसके आगे उन्होंने कहा कि, जब हम दाऊद इब्राहिम और आतंकवादी संगठनों जैसे संगठित अपराध के आंकड़ों के बीच पाकिस्तान में गठजोड़ को देखते हैं और हम उन काले बाजारों को देखते हैं जो ए. क्यू. खान के माध्यम से पाकिस्तान के अपने परमाणु कार्यक्रम का समर्थन करने के लिए बनाए गए थे, मेरा मतलब है, यह कनेक्शन का एक सेट है। संगठित अपराध, सरकारी प्राधिकरण और आतंकवादी संगठन यदि सामूहिक विनाश की राह पर चले जाते हैं, तो बड़े पैमाने पर वित्त और वास्तविक चिंताओं की संभावना बढ़ा देते हैं।

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उनका मानना है कि पाकिस्तान में आतंकवादी कुछ अधिक तकनीकी चीजों का इस्तेमाल करना चाहते हैं और उनके पास कई अत्याधुनिकी तकनीक है। उधाहरण के तौर पर उन्होंने मुंबई हमले के नाम लिया। उनका कहना है कि, पाकिस्तान की सेना और खुफिया सेवाओं पर नागरिकों द्वारा चुनी गई सरकार का अधिकार सीमित है। इसलिए उनपर दबाव बनाया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, पाकिस्तान के खिलाफ पूरी तरह से सहयोग नहीं कर रहा है।