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पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई से हर ओर मचा हाहाकार, कंगाली में कहीं फूट न जाए अवाम का गुस्सा!

पाकिस्तान में गहरा रहा आर्थिक संकट

पाकिस्तान (Pakistan) में दिन पर दिन बड़ी तेजी से महंगाई बढ़ती जा रही है। मुल्क में दो वक्त की रोटी खाने के भी लाले पड़े हुए है महंगाई लोगों के सिर चढ़कर बोल रही है और अब ऐसे में जनता का सब्र खत्म होता जा रहा है। कर्ज चुकाने के लिए हुकूमत जन-विरोधी फैसले ले रही है। तो बस फिर अब अवाम भी चुप बैठने वालों में से नहीं है। दरअसल, मौजूदा आर्थिक संकट ने पाकिस्तान के सामने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या नकदी की तंगी से जूझ रहा देश बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को झेल सकता है? हालिया रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान को चीन से बड़ा कर्ज मिलने वाला है जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में कुछ सुधार होने की उम्मीद है।

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक संकटग्रस्त देश का चालू खाता घाटा (CAD) जनवरी में 90.2 फीसदी घटकर 0.24 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। यह पिछले साल इसी महीने में 2.47 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के अधिकारियों को आईएमएफ (IMF) के बेलआउट पैकेज को हासिल करने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत है। अगर इसमें देरी हुई तो लोग विरोध में सड़कों पर उतर सकते हैं जिससे हालात और मुश्किल हो जाएंगे।

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रोजगार का भारी संकट

चालू खाता घाटे में कमी आयात में एक बड़ी कटौती के कारण हुई है। इसका सीधा असर पाकिस्तान के कई उद्योगों पर पड़ा है। लगभग हर क्षेत्र की कई कंपनियों ने या तो उत्पादन रोक दिया है या उसका पैमाना कम कर दिया है, जिससे छंटनी और रोजगार संकट जैसे हालत पैदा हो गए हैं। आयात पर प्रतिबंध ने पाकिस्तान को डिफॉल्ट की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

मुल्क में चरम पर महंगाई

गौरलतब है, पाकिस्तान में लोग 100 से 150 रुपए प्रति किग्रा के दाम पर आटा, 250 रुपए प्रति लीटर में दूध और 780 रुपए प्रति किग्रा में चिकन खरीद रहे हैं। पाकिस्तान अपने विदेशी मुद्रा भंडार के लिए निर्यात और विदेशी कर्ज के अलावा प्रवासी पाकिस्तानियों से आने वाले पैसे पर बहुत अधिक निर्भर है। चिंता की बात यह है कि इसमें भी भारी गिरावट आई है।