China की चप्पलें चाटेंगे, अमेरिका की जूतियां खाएंगे, मगर आंतकी Yasin Malik को बचाएंगे- पाकिस्तान में लग रहे नारे!

Yasin-Malik-to-be-Hanged.webp

पूरे पाकिस्तान में लगी आतंकी Yasin Malik के नाम की आग!

ये वो पाकिस्तान है जिसने एक समय में जम्मू कश्मीर में जमकर खून की नदियां बहाई। कश्मीर पंडितों को ही उनके घरों से बाहर कर दिया गया और पूरे घाटी में जेहाद का कब्जा हो गया। घाटी में जेहाद फैलान में सबसे बड़ा हाथ पाकिस्तान का रहा और उसे साथ दिया घाटी के ही कुछ लोगों ने। जिनपर जम्मू-कश्मीर के लोगों ने भरोसा कर अपना नेता चुना। कुछ नेताओं ने घाटी के लोगों को धोखा देते हुए जमकर कश्मीर में आंतक फैलाया। जिसमें से एक है अलगाववादी नेता यासीन मिलक जिसने स्वीकार कर लिया है कि वो आतंकियों के साथ मिला था। पाकिस्तान इसी आतंकी को बचाने पर लगा हुआ है। अब ये पाकिस्तान चीन के शरण में जाता दिख रहा है।

जम्मू-कश्मीर के प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक को NIA कोर्ट ने टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराया है। मलिक ने भी अपना गुनाह कुबूल कर लिया है, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान को ये हजम नहीं हो रहा है। दरअसल, यासीन और इसी की तरह कुछ और नेताओं के इस्तेमाल से पाकिस्तान घाटी में आतंकवाद को फैलाता था। ऐसे में यह पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है और जैसे ही मलिक को दोषी ठहराए गया पाकिस्तान पूरी तरह बौखला गया है। वह दुनिया के सामने यासीन को सियासी कैदी बता रहा है। यहां तक कि पाकिस्तान के खुद प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ भी इसमें कूद पड़े हैं। वहीं भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रह चुके अब्दुल बासित ने भी इस मसले पर अपनी भड़ास निकाली है और कहा है कि पाकिस्तान को चाहिए कि वो इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में ले जाए। अब्दुल बासित ने कहा कि अगर पाकिस्तान चाहे तो मलिक को सजा दिए जाने से पहले भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है।

एक वीडियो जारी कर बासित ने कहा, 'हमारे विदेश मंत्री (बिलावल भुट्टो जरदारी) जब हाल ही में अमेरिका में थे तब मुझे नहीं पता कि उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री के सामने यासीन मलिक का मामला उठाया कि नहीं उठाया। लेकिन इस वक्त हमारे विदेश मंत्री को एक खत तो लिखना चाहिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष और महासचिव को। यहां तक कि अब्दुल बासित ने तो यह भी कहा है कि, पाकिस्तान को लॉबी का सहारा लेना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें थोड़ी-बहुत लॉबी करनी चाहिए इस मामले में। मैं समझता हूं कि इस मामले को विदेश मंत्री के द्वारा चीन के सामने भी उठाना चाहिए। उनका कहना है कि, इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में ले जाना चाहिए।

बता दें कि, यासीन मलिक ने खुद स्वीकार किया है कि वो पाकिस्तान के 20 आतंकी संगठनों के साथ संपर्क में है और इसके साथ ही कई आतंकी घटनाओं में भी लिप्त था। जाहिर है कि अब पाकिस्तान से भी जुड़ी कई राज खुलेंगे तो ऐसे में पाक सरकार यासीन को बचाने के लिए जमकर कोशिशें कर रही है। यहां तक फैसला सुनाते ही पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने दूतावास अधिकारी को आपत्तियों से जुड़ा एक दस्तावेज (डिमार्शे) सौंपा, जिसमें यासीन मलिक के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाए जाने की कड़ी निंदा की गई थी।