Nepal के पूर्व PM ओली के फिर बिगड़े बोल- भारत को लेकर दिया कौन सा विवादित बयान

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Nepal के पूर्व PM ओली के फिर बिगड़े बोल

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली भारत के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। अपने देश के मुद्दाओं को छोड़कर वो उस भारत के खिलाफ जाकर जनता को अपने पक्ष में करना चाहते हैं जो भारत नेपाल को अपने छोटे भाई जैसा मानता है। जो किसी भी वक्त सहायता के लिए तैयार रहता है। चाहे नेपाल में भूकंप से नुकसान हो या फिर बाढ़ से या फिर क्यों न कोरोना महामारी में जरूरी सामानों की नेपाल में कमी रही हो। भारत ने हर वो संभव प्रयास करने का पूरा किया है जिससे नेपाल पर संकट न आए लेकिन ऐसा लगता है कि पूर्व प्रधानमंत्री ओली की अब सत्ता में वापस आने की भूख बढ़ने लगी है तभी तो वो अब ऐसी राजनीति करने पर उतारू हो गए हैं।

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के पी शर्मा ओली का वादा है कि, अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह भारत से कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख क्षेत्रों को बातचीत के जिरए वापस ले लेंगे। लिपुलेख दर्रा कालापानी के पास एक सुदूर पश्चिमी बिंदु है, दो नेपाल और भारत के बीच एक विवादित सीमा क्षेत्र है। भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपने क्षेत्र के अभिन्न अंग के रूप में दावा करते हैं। भारत उत्तराखंड के पिथौरगढ़ जिले के हिस्से के रूप में औप नेपाल धारचूला जिले के हिस्से के रूप में इस पर दावा करता है।

काठमांडू से 160 किलोमीटर दक्षिण में चितवन में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के 10वें आम सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ओली ने दावा किया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में वापस आती है तो वह "भारत से बातचीत के माध्यम से लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख जैसे विवादित क्षेत्रों को वापस ले लेगी।" इसके साथ ही उनका मानना है कि यह हल वह बातचीत के जरिए सुलझाएंगे।

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भारत द्वारा उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को धारचूला से जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सड़क आठ मई, 2020 को खोले जाने के बाद द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण हो गये थे। नेपाल ने सड़क के उद्घाटन का विरोध करते हुए दावा किया था कि यह उसके क्षेत्र से होकर गुजरती है। कुछ दिनों बाद, नेपाल लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने क्षेत्रों के रूप में दिखाते हुए एक नया नक्शा लेकर आया। भारत ने इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। ओली ने कहा कि, उनकी पार्टी नेपाल की स्वतंत्रता औऱ संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।