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पैसों की तंगी के चलते यह क्रिकेटर बना कारपेंटर, खेल चुका है 2015 का World Cup

ऑस्ट्रेलियाई का यह गेंदबाज बना कारपेंटर

स्पोर्ट्स की दूनियां में यह कई बार देखा गया है कि खिलाड़ियों को संन्यास लेने के बाद आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा है। कई खिलाड़ियों को अपना घर चलाने तक के लिए पैसे नहीं होते हैं जिसके बाद वो कुछ भी छोटा-मोटा काम शुरू कर देते हैं। ऐसे ही एक ऑस्ट्रेलिया के पूर्व गेंदबाद हैं जिन्होंने वर्ष 2017 में संन्यास ले ली थी लेकिन उन्हें नहीं पता था कि इसके बाद उनकी जिंदगी चुनौतियों से इनती भरी होगी की कारपेंटर का काम करना पड़ेगा।

दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई टीम के पूर्व स्पिनर जेवियर डोहर्टी ने साल 2017 में क्रिकेट से अलग होने के बाद बेहद मुश्किलों से गुजरे हैं। डोहर्टी फिलहाल अपना घर चलाने के लिए कारपेंटर का काम कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर्स एसोसिएशन ने कारपेंट्री का काम सीखते डोहर्टी का वीडियो पोस्ट किया। इसमें डोहर्टी एक बिल्डिंग साइट पर औजारों के साथ कारपेंटर के वेश में दिख रहे हैं।

ऐसा रहा डोहर्टी का करियर

डोहर्टी ने ऑस्ट्रेलिया के लिए चार टेस्ट में सात, 60 वनडे में 55 और 11 टी20 मैच में 10 विकेट लिए. वहीं 71 फर्स्ट क्लास मैच में उन्होंने 163, 176 लिस्ट ए मैच में 190 और 74 टी20 मैच में 62 विकेट लिए थे। उन्होंने 19 साल की उम्र में तस्मानिया के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा था। फिर 2010 में वे ऑस्ट्रेलियाई टीम में शामिल हो गए थे। उन्होंने वर्ल्ड कप 2015 भी खेला। उस साल ऑस्ट्रेलियाई टीम न्यूजीलैंड को हराकर पांचवीं बार वर्ल्ड चैंपियन बनी थी। डोहर्टी ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला वर्ल्ड कप में ही श्रीलंका के खिलाफ खेला था। हालांकि फाइनल मुकाबले में उन्हें टीम में जगह नहीं मिल पाई थी, उन्होंने साल 2017 में क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।

जब क्रिकेट छोड़ा तब पता नहीं था क्या करेंगे

ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर्स एसोसिएशन द्वारा शेयर किए गए वीडियो में डोहर्टी कहते हैं कि जब उन्होंने क्रिकेट छोड़ा था तब सोचा नहीं था कि आगे चलकर क्या करेंगे। ऐसे में शुरू के 12 महीने तक तो उन्हें जो भी काम मिला उन्होंने वह किया। इसके तहत लैंडस्केपिंग,ऑफिस का काम और कुछ क्रिकेट से जुड़ा काम भी किया। इसके बाद डोहर्टी ने कारपेंटर बनने के गुर सीखे और उनका तीन-चौथाई प्रशिक्षण भी पूरा हो चुका है।

 

डोहर्टी ने कहा, जब क्रिकेट पूरा हो जाता है तो आपको पता चलता है कि अब पैसे कैसे आएंगे। दिमाग में बातें चलती हैं कि आगे क्या होगा। जिंदगी कैसी रहेगी। ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर्स एसोसिएशन की ट्रांजिशन मैनेजर कार्ला ने फोन पर मदद की। साथ ही पढ़ाई-लिखाई के लिए पैसे भी मिले। इससे आर्थिक मदद मिली और मेरा खर्चा भी कुछ कम हो गया।