कैसर जमाल रिजवी होनहार मुसलमान- अफसरी का मौका छोड़ बने योग आचार्य जमाल आनंद, लाखों लोगों को दे रहे नया जीवन!

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अफसर बनने के बजाए योग इंस्ट्रक्टर बने आचार्य जमाल आनंद

आज सातवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है, आज के समय में कई लोगों की ऐसी कहानी हैं जिन्होंने अपनी अच्छी खासी नौकरी को छोड़कर योग को अपने जिवन में शामिल किया है। ऐसे ही एक हैं डॉक्टर कैसर जमाल रिज़वी जो अब दुनिया में "आचार्य जमाल आनंद" के नाम से जाने जाते हैं। यहां तक कि जमाल आनंद ने सिविल सेवा और प्रोफेसर बनने के बजाय योग को चुना।

 बिहार के दरभंगा जिले के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्में डॉ. कैसर जमाल ने प्राथमिक से स्नातक तक दरभंगा और पटना में पढ़ाई की। कम उम्र से ही वह पढ़ने में तेज थे और उनमें कुछ नया करने का जुनून था। उच्च शिक्षा के लिए देश का सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जेएन यू, दिल्ली पहुंचे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से एमए, एम.फिल और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। यूजीसी नेट परीक्षा उत्तीर्ण। जेआरएफ (यूजीसी फेलोशिप) भी प्राप्त किया। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा परिक्षा की तैयारी भी कि और उन्हें इसमें सफलता भी मिली।

आचार्य जमाल आनंद का योग में उनका इतना मन लगा गया कि सिविल सेवा में शामिल होने या प्रोफेसर बनने के बजाय उन्होंने योग इंस्ट्रक्टर बनने का फैसला किया। हालांकि, इस दौरान उन्हें विरोध का भी सामना करना पड़ा लेकिन, वह अपने फैसले पर अड़े रहे। आचार्य जमाल आनंद योग पर बहुत अच्छे व्याख्यान देते रहें।

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उन्होंने तमाम हिंदु-मुसलान और अन्य धर्मों के लोगों को योग सिखाया। आचार्य जमाल आनंद ने योग से कितनों की बीमारियों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया। आज भारत ही नहीं विश्व के विभिन्न देशों में आचार्य जमाल आनंद का योग का कमाल चल रहा है। डॉ. जमाल आनंद ने कोरोना काल में अपने यू ट्यूब चैनल 'योगी डॉ. जमाल' से भी लोगों को योग की महत्ता की जानकारी दी है।