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Ajit Doval Warns China: भारत 'स्वार्थ' नहीं 'परमार्थ' के लिए लड़ेगा, किसी भी वक्त जंग का ऐलान!

Ajit Doval Warns China: भारत 'स्वार्थ' नहीं 'परमार्थ' के लिए लड़ेगा, किसी भी वक्त जंग का ऐलान!

इंडिया के एनएसए अजित डोभाल (NSA Ajit Doval) ने चीन (China) को साफ शब्दों में चेतावनी (warns) दी है कि भारत जंग के लिए तैयार है।  गलवान वैली में सैनिकों की शहादत, सीडीएस और सेनाध्यक्षों की टू फ्रंट वॉर की तैयारी,  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चीन और पाक को चेतावनी और पीएम नरेंद्र मोदी की एलओसी दौरा! इन सब गतिविधियों के बावजूद लोग कशमकश में थे कि क्या चीन  भारत के साथ जंग करेगा ! चीन दो दर्जन से ज्यादा देशों के साथ विवाद में उलझा हुआ है। साउथ चाईना सी और ताइवान में युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना चीन कर ही रहा है। पेसिफिक ओशियन में अमेरिका ने मोर्चाबंदी कर ही ली है। चीन को जापान की ओर से भी खतरा है। हांगकांग में अनिश्चितता और अस्थिरता का माहौल है। घरेलू मोर्चे पर शी जिनपिंग को पहले जैसा समर्थन नहीं मिल रहा है। मीडिया पर सेंसरशिप के बावजूद चीनी नागरिकों के आक्रोश की खबरें दुनिया भर की मीडिया की सुर्खियां बन ही रही हैं। शिनजियांग (पूर्वी तुर्कमेनिस्तान) में उइगरों पर अत्याचार की खबरों ने चीन के भारीसमर्थन को नुकसान पहुंचाया है। कोरोना के बाद चीन उद्योगों ने उबरने की कोशिश की है लेकिन बेरोजगारों की संख्या कम नहीं हुई है। पाकिस्तान में सीपेक प्रोजेक्ट का काम ठप हो गया है। चीन के 73 बिलियन डॉलर पाकिस्तान में फंस चुके हैं। अफ्रीकी देशों ने बीआरआई प्रोजेक्ट को बाय-बाय  कहना शुरू कर दिया है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका ने अलग ही अभियान छेड़ रखा है। इन सब के बावजूद क्या चीन भारत के साथ जंग में उलझने की कोशिश करेगा?

सवाल लाख टके से भी ज्यादा बड़ा है। चीन से जंग का यह सवाल तब और बड़ा और गंभीर हो जाता है जब देश का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल सार्वजनिक तौर पर चीन से जंग तो हम करेंगे ही लेकिन स्वार्थ के लिए नहीं परमार्थ के लिए! अजित डोभाल ने ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में देशी-विदेशी श्रद्धालुओं के बड़े समूह के बीच कहा- चीन से हम जंग तो लड़ेंगे लेकिन वहां नहीं जहां तुम चाहते हो। हम जंग वहां लड़ेंगे जहां से हमें खतरा आ रहा है। जंग हम अपनी जमीन पर भी लड़ेंगे और बाहर भी। जंग हम अपने स्वार्थ के लिए नहीं परमार्थ के लिए लड़ेंगे। अजित डोभाल का यह बयान केवल चीन के लिए ही चुनौती नहीं बल्कि भारत की जनता के लिए भी एक संदेश है कि हिंदुस्तानी सेना एक लालची और धोखेबाज हमसाया से जंग के लिए कदम बढ़ा चुकी हैं। देशवासियों को आनंद और आलस्य को छोड़ कर सरकार और सेना के सहयोग के लिए तत्पर रहना है। सेना सज्ज हो चुकीं हैं युद्ध के लिए तो अब जनता को सज्ज हो जाना चाहिए सहयोग के लिए।

अजित डोभाल के बयान की गंभीरता पिछले कुछ समय से देश के भीतर और बाहर चल रही घटनाओं से पता चलती है। डेढ़ महीने के भीतर दर्जन भर से ज्यादा मिसाइलों का टेस्ट, मिसाइलों की सीमा पर तैनाती और म्यांमार, थाईलैण्ड, भूटान और नेपाल में भारतीय दूतों का आवागमन भी बहुत कुछ कहता है। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंगवेन का सोशल मीडिया पर भारत से नजदीकियां दिखाना, भारत का ताइवान के साथ ट्रेड डील करना, म्यांमार और थाईलैण्ड में भारतीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मण्डलों का जाने का उद्देश्य भी कुछ-कुछ समझ आता है। रॉ प्रमुख का अचानक नेपाल पहुंचना और केपी शर्मा ओली से मुलाकात करने के कई गहरे मतलब हैं। टोक्यो में क्वाड की मीटिंग, फिर चारों देश भारत-अमेरिका-जापान और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास केवल एक सामान्य अभ्यास नहीं है। इसके बीच बांग्लादेश के साथ युद्धाभ्यास जैसी तमाम छोटी-मोटी गतिविधियां तो तमाम हो रही हैं। इन सबके अलावा भारत और अमेरिका के बीच टू बाय टू मीटिंग की महत्ता तो अपने आप ही बढ़ जाती हैं। ऐसा नहीं है कि भारत और उसके शुभच्छु देशों के बीच गतिविधियां हो रही हैं। चीन  सिर्फ एक एलएसी पर ही सैन्य गतिविधियां नहीं बढ़ा रहा बल्कि  पाकिस्तान को पश्चिमी और पूर्वी दोनों मोर्चों पर युद्ध स्तर की जंगी मदद कर रहा। अरुणाचल से लेकर  लद्दाख तक एलएसी पर चीनी फौज के अलावा चीन गिलगिट बालटिस्तान, गुलाम कश्मीर (पीओके) के अलावा राजस्थान और गुजरात की सीमा पर पाकिस्तानी फौज को जंग के लिए तैयार कर चुका है। ऐसा भी संदेह है कि चीन ने अंतरिक्ष से हमले की तैयारियां कर ली हैं। भारत पर हमले के लिए चीन ने अंतरिक्ष में हथियार तैनात कर दिए हैं। इनसे निपटने की तैयारी भी भारत ने कर ही ली होगी।

लाख टके के सवाल से भी बड़ा सवाल यह है कि क्या शी जिनपिंग की सेना तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी राष्टपति चुनाव का इंतजार कर रही है। ऐसा अहसास होता है कि एनएसए अजित डोभाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सहित सीडीएस और तीनों सेनाओं के अध्यक्षों को बता दिया है कि चीन भारत पर हमला कब और किस ओर से करेगा। जंग के हलात में चीन के साथ-साथ पाकिस्तान के अलावा और कौन-कौन से देश हो सकते हैं। चीन के साथ जंग की हालात में रूस भारत को क्या और कितनी मदद करने जा रहा है।  जंग का मैदान चीन नहीं भारत तय कर चुका है।  चीन भारत की रणनीति में ऐसा फंस चुका है कि अगर  युद्ध छिड़ा तो मुकाबला वहीं होगा जहां भारत चाहेगा। चीन ने भारत की खुफियागिरी में तो कोई कमी छोड़ी नहीं है। अगर अजित डोभाल ने ऋषिकेश के गंगा तट से अपनी जुबान खोली है तो शी जिनपिंग के पास खबर पहुंच ही चुकी होगी। ध्यान रहे, चीन से वार्ताओं के दौर के बीच थल सेनाध्यक्ष एलएसी और एलओसी दोनों पर युद्ध की तैयारियों का जायजा भी लेने जा रहे हैं। भारतीय सेना के जो जवान छुट्टियों पर थे उन्हें टेलीग्राम और रेडियो संदेश भेजकर वापस बुलाया जा रहा है।.