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Sonia Gandhi के बस में नहीं Congress के नेता- सरेआम एक दूसरे को दे रहे गाली- देखें रिपोर्ट

हार का गम भुला नहीं पा रही Congress, आपस में भिड़े दो नेता

कांग्रेस में इस वक्त सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, अब ऐसा लगता है कि सोनिया कमान ने जो कांग्रेस को जिम्मेदारी दी थी वो नेताओं में से खत्म होते जा रहा है। सोनिया गांधी ने अपने नेताओं को काम करने के साथ ही यह भी कहा था कि किसी भी तरह की आपत्तजिनक बयान से बचे। लेकिन अब तो कांग्रेस के नेता सरेआम गाली-गलौज पर उतर आए हैं।

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दरअसल, चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस पार्टी में चल रहा तनाव शनिवार को तब सार्वजनिक हो गया। जब प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता देविंदर सिंह बबला आपस में भिड़ गए। शनिवार को सेक्टर-17 स्थित नगर निगम भवन में नवनिर्वाचित पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान यह घटना हुई। चावला और बबला दोनों वीजिटर्स गैलरी में बैठे हुए थे, उसी दौरान दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हुई। इस दौरान वहां बैठे अन्य पार्षदों ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की लेकिन उन्होंने किसी की एक नहीं सुनी। और काफी देर तक दोनों के बीच नोकझोंक चलती रही।

चावला का कहना है कि, बबला ने उन्हेंन गालियां दीं और उनके व्यवहार से वो काफी परेशान हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी तय करेगी कि उनके इस व्यवहार के लिए उनके खिलाफ क्या एक्शन लेना है। चावला द्वारा लगाए गए इस गौली-गलौज के आरोप को बबला ने साफ इनकार करते हुए कहा है कि, मैं उनसे पूछ रहा था कि हार पर चर्चा के लिए पार्टी की बैठक क्यों नहीं बुलाई गई। हालांकि, उनका व्यवहार अजीब था। मुझे तब गुस्सा आ गया जब उन्होंने कहा कि बैठक की जरूरत नहीं है। बबला ने कहा कि चावला को हार की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इस्तीफा दे देना चाहिए। मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि बबला ने चावला पर पार्टी को बर्बाद करने का आरोप लगाया।

इसके साथ ही बबला ने कहा कि, चावला ने पूर्व कांग्रेस प्रमुख प्रदीप छापड़ा जैसे वरिष्ठ नेताओं को पार्टी छोड़ने औऱ कई अन्य लोगों के साथ आप में शामिल होने दिया। इसके आगे उन्होंने कहा कि, चावला पर टिकट बेचने और इसे उन लोगों को देने का आरोप लगाया, जिन्हें अपने मोहल्लों में भी जीतने का मौका नहीं मिला। इस घटना के बाद बबला ने कहा कि, चावला अपने ही बेटे की जीत सुनिश्चित नहीं कर सके। हमारे लिए चुनाव जीतने का यह बहुत अच्छा मौका था। लेकिन, चावला के खराब प्रबंधन के कारण हम चुनाव हार गए।

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बता दें कि, कांग्रेस का गढ़ माना जाने वाले चंडीगढ़ में कांग्रेस को अब आम आदमी पार्टी जबरदस्त टक्कर दे रही है। यहां तक कि कांग्रेस के वोट पर अब आप ने कब्जा जमा लिया है। इन चुनावों में कांग्रेस को केवल आठ सीटें ही मिल सकी हैं। लेकिन AAP ने 14 सीटों पर बाजी मारी है और भाजपा ने 12 सीटों पर जीत हासिल की।