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हेलीकॉप्टर ऑपरेशन: हिमाचल के ऊंचाई वाले हॉटस्पॉट में फंसे हुए 300 पर्यटकों में से 7 को बचाया गया

14,100 फीट की ऊंचाई पर चंद्रताल में शिविरों में करीब 300 लोग फंसे हुए हैं

आशुतोष कुमार
शिमला: जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति में 14,100 फीट की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल चंद्रताल में 300 पर्यटकों के फंसे होने के कारण बचाव अभियान में तैनात एक हेलीकॉप्टर द्वारा एक बच्चे सहित सात लोगों को एयरलिफ्ट कर लिया गया है।

कुल्लू के कसोल में फंसे 14 रूसी नागरिकों सहित अन्य 400 पर्यटकों के भी सुरक्षित होने की ख़बर है।

क्षेत्र में बर्फ़बारी हुई है, जिससे सड़कें अवरुद्ध हो गयी हैं और वाहनों की आवाजाही रुक गयी है, जबकि लाहौल क्षेत्र में भारी बारिश और बाढ़ आ गयी है।

पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्य कर रहे अतिरिक्त डीपीजी (सीआईडी) सतवंत अटवाल त्रिवेदी ने बताया,“हेलीकॉप्टर ने दिन में प्रयास तो किया, लेकिन खराब मौसम और खराब दृश्यता के कारण चंद्रताल तक नहीं पहुंच सका। बाद में दिन में एक बच्चे सहित सात लोगों को एयरलिफ्ट करने का प्रयास सफल साबित हुआ।”

अतिरिक्त उपायुक्त राहुल जैन के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम द्वारा जमीनी प्रयास दिन भर जारी रहने के बावजूद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद ही बाढ़ से तबाह मनाली का हवाई सर्वेक्षण किया था।उन्होंने हेलीकॉप्टरों की तैनाती का आदेश दिया।

पुलिस नियंत्रण कक्ष को ट्विटर और व्हाट्सएप दोनों पर विभिन्न स्थानों से भारी कॉल और संदेश मिल रहे हैं, जिसमें हिमाचल प्रदेश में बारिश, बाढ़, भूस्खलन और संचार में व्यवधान के बाद “लापता” रिश्तेदारों के कुशल-क्षेम के बारे में पूछा जा रहा है।

कार्यवाहक डीजीपी का कहना है, “हमने 200 से अधिक रिश्तेदारों से संपर्क करके उन्हें सूचित किया है कि उनके परिवार के सदस्य उन सभी स्थानों पर सुरक्षित हैं, जहां संचार टूट गया है। फंसे हुए पर्यटक सुरक्षित हैं और वे वापस जा रहे हैं। ज़मीन पर हमारी टीमें हर संभव सहायता प्रदान कर रही हैं। भोजन और दवायें भी उपलब्ध करायी जा रही हैं।”

कुल्लू के कसोल में फंसे 14 रूसी नागरिकों के बारे में रूसी दूतावास ने भी पुलिस से संपर्क किया है। पुलिस टीमें कसोल और तोश और कुलगा में फंसे अधिकांश पर्यटकों तक पहुंचने में सफल रही हैं। हर कोई सुरक्षित है, हालांकि मोबाइल फोन सेवाओं और सड़क संचार में व्यवधान के कारण वे घर वापस अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।

मनाली और कुल्ली के साथ-साथ मंडी और कुल्लू और लाहौल-स्पीति के बीच सड़क संपर्क बाधित है, क्योंकि राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा या तो बाढ़ में बह गया है या धंस गया है।

मुख्यमंत्री ने कुल्लू के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक, सैंज की यात्रा की है।उन्होंने कहा है कि बिजली को पूरी तरह से बहाल करने के प्रयास चल रहे हैं और उसके बाद अंततः कुल्लू और अन्य स्थानों पर पानी की आपूर्ति बहाल करने में मदद मिलेगी।

सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में बारिश ने 50 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बुनियादी ढांचे-सड़कों, पुलों, पेयजल आपूर्ति योजनाओं और सीवेज परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है।

उन्होंने बताया, “ सोमवार को पीएम ने मुझसे बात की थी और मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस अभूतपूर्व स्थिति के बारे में जानकारी दे दी है।। हमारा प्रारंभिक अनुमान भौतिक बुनियादी ढांचे और संपत्तियों को लगभग 4000 करोड़ रुपये का नुकसान दिखाता है। बाढ़ और आपदा में मरने वालों की संख्या लगभग 99 है।”

बाद में दिन में पुलिस ने बताया कि मनाली-कुल्लू सड़क के बायें किनारे से बहाल होने के बाद 400 हल्के वाहन मनाली से कुल्लू की ओर रवाना हो गये हैं।

बाढ़ ने कुल्लू और मंडी जिलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। मंडी में प्राचीन पंचवक्त्र मंदिर उफनती ब्यास में डूब गया, जबकि पानी कुल्लू के प्रसिद्ध सिल्क तीर्थ स्थान मणिकरण साहिब में घुस गया।

मंगलवार वह दिन था, जब बारिश ने बहुत जरूरी राहत प्रदान की और दिन के अंत में तेज धूप ने शिमला का स्वागत किया। पिछले चार दिनों से पेयजल संकट का सामना किया जा रहा था।