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Bhaum pradosh Vrat: आज भौम प्रदोष व्रत पर बन रहे शुभ संयोग, इस तरह पूजा करने से भगवान शिव के साथ बजरंगबली भी होंगे खुश, सुनें पूरी कथा

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आज भौम प्रदोष व्रत है। हिंदू पंचाग के मुताबिक, हर महीने त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। लेकिन जब ये प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ जाए तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहते है। इस दिन भगवान शिवजी की विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाती है। भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन यह खास संयोग भी बन रहा है। मंगलवार का दिन हनुमान जी को भी समर्पित होता है, तो वहीं प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। जिसके चलते ये व्रत बेहद शुभ संयोग बना रहे है।

भौम प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव और हनुमान जी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि इससे भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है तथा भक्त के सभी रोग दोष दूर हो जाते है। इस दिन सुबह उठकर स्नानादि कर भगवान का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। फिर पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करें और भगवान को फल अर्पित करें। शाम के समय स्नानादि करके साफ कपड़े पहनें। फिर मंदिर जाकर या घर में ही पूजन करें। भगवान शिव का गंगा जल से अभिषेक करें और चंदन लगाएं।

धूप-दीप प्रज्वलित करें और शिवजी को धतूरा, भांग, बेलपत्र, मदार का फूल आदि अर्पित करें। फल और मिष्ठान से भगवान शिव के साथ माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा भी करें। इसके बाद वहीं पर बैठकर शिव चालीसा या मंत्र जाप करें। इसके पश्चात हनुमान चालीसा का भी पाठ करें। पूजा के बाद शिवजी और हनुमान जी की आरती करें।

भौम प्रदोष व्रत कथा- एक समय की बात है। एक स्थान पर एक वृद्ध महिला रहती थी। उसका एक बेटा था। वह वृद्धा हनुमान जी की भक्त थी। हमेशा हनुमान जी की पूजा विधिपूर्वक करती थी। मंगलवार को वह हनुमान जी की विशेष पूजा करती थी। एक बार हनुमान जी ने अपने भक्त उस वृद्धा की परीक्षा लेनी चाही। वे एक साधु का वेश धारण करके उसके घर आए। उन्होंने आवाज लगाते हुए कहा कि कोई है हनुमान भक्त, जो उनकी इच्छा को पूर्ण कर सकता है। जब उनकी आवाज उस वृद्धा के कान में पड़ी, तो वह जल्दी से बाहर आई।

उसने साधु को प्रणाम किया और कहा कि आप अपनी इच्छा बताएं। इस पर हनुमान जी ने उससे कहा कि उनको भूख लगी है, वे भोजन करना चाहते हैं, तुम थोड़ी सी जमीन लीप दो। इस पर उसने हनुमान जी से कहा कि आप जमीन लीपने के अतिरिक्त कोई और काम कहें, उसे वह पूरा कर देगी। हनुमान जी ने उससे अपनी बातों को पूरा करने के लिए वचन लिया। तब उन्होंने कहा कि अपने बेटे को बुलाओ। उसकी पीठ पर आग जला दो। उस पर ही वे अपने लिए भोजन बनाएंगे। हनुमान जी की बात सुनकर वह वृद्धा परेशान हो गई। वह करे भी तो क्या करे। उसने हनुमान जी को वचन दिया था। उसने आखिरकार बेटे को बुलाया और उसे हनुमान जी को सौंप दिया।

हनुमान जी ने उसके बेटे को जमीन पर लिटा दिया और वृद्धा से उसकी पीठ पर आग जलवा ​दी। वह वृद्धा आग जलाकर घर में चली गई। कुछ समय बाद साधु के वेश में हनुमान जी ने उसे फिर बुलाया। वह घर से बाहर आई, तो हनुमान जी ने कहा कि उनका भोजन बन गया है। बेटे को बुलाओ ताकि वह भी भोग लगा ले। इस पर वृद्धा ने कहा कि आप ऐसा कहकर और कष्ट न दें। लेकिन हनुमान जी अपनी बात पर अडिग थे। तब उसने अपने बेटे को भोजन के लिए पुकारा। वह अपनी मां के पास आ गया। अपने बेटे को जीवित देखकर वह आश्चर्यचकित थी। वह उस साधु के चरणों में नतमस्तक हो गई। तब हनुमान जी ने उसे दर्शन दिया और आशीर्वाद दिया।