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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के घर ईडी का छापा

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को फर्टिलाइजर घोटाले के संबंध में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के घर समेत दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और पश्चिम बंगाल के एक दर्जन से अधिक स्थानों पर छापे मारे। हालांकि ईडी की इस कार्रवाई के समय को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। ईडी की छापेमारी के बाद भड़की कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला है। कांग्रेस ने कहा कि जब राज्य में कांग्रेस सरकार को गिराने की केंद्र की कोशिश नाकाम हो गई, तब ईडी ने छापेमारी की है, जिसमें गहलोत के भाई के परिसर शामिल हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने जयपुर में संवाददाताओं से कहा, "जब भी भाजपा किसी राज्य की सरकार को गिराने में विफल होती है तो वह ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग का सहारा लेती है।"

ईडी ये तलाशी अभियान धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत चला जा रही है।

ईडी ने कथित फर्टिलाइजर घोटाले के मामले में सीमा शुल्क विभाग की शिकायत और दाखिल किए गए आरोप पत्र के आधार पर पीएमएलए के तहत यह मामला दर्ज किया है।

ईडी के एक शीर्ष सूत्र ने आईएएनएस को बताया, "ईडी इस मामले में देश भर में 13 जगहों पर तलाशी ले रहा है। हमारी टीमें गुजरात में चार स्थानों पर, राजस्थान में छह स्थानों पर, पश्चिम बंगाल में दो और दिल्ली में एक स्थान पर तलाशी ले रही हैं।"

सूत्र ने यह भी कहा कि वित्तीय जांच एजेंसी अग्रसेन गहलोत के ठिकानों पर भी तलाशी ले रही है।

सूत्र ने दावा किया कि अग्रसेन गहलोत के स्वामित्व वाली कंपनी म्युरिएट ऑफ पोटाश (एमओपी) फर्टिलाइजर का निर्यात कर रही थी, जो निर्यात के लिए प्रतिबंधित है। एमओपी को इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) द्वारा आयात किया जाता है और फिर इसे किसानों के बीच रियायती दरों पर वितरित किया जाता है।

सूत्रों ने आगे कहा कि अग्रसेन गहलोत फर्टिलाइजर मामले में सात करोड़ रुपये की सीमा शुल्क पेनांल्टी का सामना कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, अग्रसेन गहलोत आईपीएल के अधिकृत डीलर थे और 2007-09 के बीच उनकी कंपनी ने रियायती दरों पर एमओपी को खरीदा और इसे किसानों को वितरित करने के बजाय कुछ अन्य कंपनियों को बेच दिया। उन्होंने इसे इंडस्ट्रियल सॉल्ट के रूप में मलेशिया और सिंगापुर को निर्यात किया।

ईडी का यह तलाशी अभियान तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सचिन पायलट द्वारा किए गए विद्रोह के बाद सामने आया है, जिसने राजस्थान में एक राजनीतिक संकट पैदा कर दिया है। इसके बाद 14 जुलाई को पायलट को पार्टी ने तमाम पदों से हटा दिया था।

राजस्व खुफिया निदेशालय ने 2012-13 में इस मामले का खुलासा किया था।.